प्रजनन विकारों का दूर होगा खतरा
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6 सप्ताह में ही दिखने लगे लाभ
30 कपल्स जिन्होंने बार-बार गर्भपात का अनुभव किया था और 30 कपल्स जिन्होंने भ्रूण प्रत्यारोपण में विफलता का अनुभव किया था, उन्हें इस अध्ययन में शामिल किया गया था। इन लोगों को करीब छह सप्ताह नियमित योग की सलाह दी गई। अध्ययन का नेतृत्व करने वाली एनाटॉमी की प्रोफेसर रीमा दादा कहती हैं, छह सप्ताह के अंत में शुक्राणु टेलोमेरेस की लंबाई में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो डीएनए और प्रोटीन से बनी संरचनाएं हैं और गुणसूत्रों के सिरों पर पाई जाती हैं। महिलाओं में गर्भधारण की समस्या में भी योग से विशेष लाभ का अनुभव हुआ।