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Women's Day 2024: कुपोषण-एनीमिया महिलाओं की सेहत के लिए बड़ा खतरा, सेहतमंद रहने के जानिए जरूरी बातें

Thu, 07 Mar 2024 09:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाओं की स्वास्थ्य समस्या - फोटो : iStock
भारतीय महिलाओं में कुछ प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बड़ी चिंता का कारण रही हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ज्यादातर महिलाओं को आहार से पर्याप्त पोषण ही नहीं मिल पाता है, जिसके कारण उनमें कई प्रकार की बीमारियों के विकसित होने का जोखिम हो सकता है। भारतीय महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। समय के साथ इसमें सुधार तो हुआ है पर ग्रामीण भारतीय महिलाओं में ये अब भी बड़ा जोखिम बना हुआ है।

हर साल 8 मार्च को महिला अधिकारों, समानता और महिलाओं के खिलाफ हिंसा-दुर्व्यवहार जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने, महिलाओं के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाएं किसी भी स्वस्थ समाज की प्रमुख धुरी होती हैं, अगर ये अस्वस्थ हैं तो इससे परिवार और समाज पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए महिलाओं के पोषण पर ध्यान देना बहुत आवश्यक हो जाता है।
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महिलाओं में होने वाली बीमारी - फोटो : iStock
भारतीय महिलाओं में कुपोषण और एनीमिया का खतरा

पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015-16 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस)- 4 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 22.9% महिलाएं (15-49 वर्ष की आयु) कम वजन वाली हैं। महिलाओं में कुपोषण का प्रतिशत सबसे अधिक पांच राज्यों- झारखंड (31.5%), बिहार (30.4%), केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली (28.7%), मध्य प्रदेश (28.4%), गुजरात (27.2%) और राजस्थान (27%) में रहा है।

इसी तरह भारत में 15 से 49 वर्ष की आयु की 57% महिलाओं और छह महीने से 59 महीने के बीच के 67% बच्चे एनीमिया के शिकार हैं, जिसका सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है।
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कुपोषण की समस्या (सांकेतिक) - फोटो : pixabay
महिलाओं में कुपोषण की समस्या

कई अध्ययनों और शोधों ने निर्णायक रूप से साबित किया है कि स्वस्थ महिलाएं, बेहतर बौद्धिक क्षमता वाले स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं। हालांकि दुर्भाग्यवश भारत सहित दुनिया के कई देशों के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में आवश्यक विटामिन्स और पोषक तत्वों से भरपूर आहार नहीं मिल पाता है। ये न सिर्फ उनकी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली समस्या है, साथ ही इससे बच्चों की सेहत पर भी कई प्रकार से असर हो सकता है।

पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं में दीर्घकालिक कुपोषण का बोझ, महिलाओं की भोजन की आदतों और इसमें पोषकता की कमी कई प्रकार से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।

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एनीमिया और इसके जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
एनीमिया का बढ़ता जोखिम

एनीमिया भारतीय महिलाओं में होने वाली एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें 58.6% बच्चे, 53.2% महिलाएं और 50.4% गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। एनीमिया यानी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी की समस्या है, जिसके कारण कमजोरी, थकान जैसी दिक्कतों के साथ तंत्रिकाओं और शरीर के अन्य अंगों पर असर हो सकता है। एनीमिया की गंभीर स्थिति के जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
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पौष्टिक आहार का सेवन जरूरी - फोटो : istock
कैसे करें इन स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आहार को ठीक रखना न सिर्फ महिलाओं, बल्कि सभी की सेहत के लिए जरूरी है। खाने की थाली में रंग-बिरंगी सब्जियों-फलों को शामिल करें। आहार में आयरन, विटामिन बी और प्रोटीन की भरपूर मात्रा को शामिल करके कुपोषण और एनीमिया जैसी दिक्कतों से बचाव किया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र से ही महिलाओं को अपने आहार को ठीक रखने पर ध्यान देना चाहिए। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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