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Women's Day: इनफर्टिलिटी से बचना है तो महिलाएं तुरंत इन आदतों में कर लें सुधार, गायनोलॉजिस्ट की सलाह

Sun, 08 Mar 2026 06:49 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इनफर्टिलिटी का जोखिम हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा हो सकता है, जिन्हें समय रहते बदलकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सी आदतें महिलाओं की प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाती हैं और किन चीजों को तुरंत छोड़ देना चाहिए।
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महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepil.com
प्रजनन की समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं, इससे हर 6 में से 1 कपल प्रभावित है। अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने वैज्ञानिक तथ्यों के साथ समझने की कोशिश की कि आखिर इस समस्या के लिए महिला या पुरुष कौन ज्यादा जिम्मेदार होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जब बात महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य की होती है तो ये विषय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। बच्चे पैदा करने की उम्र में देरी, पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण और लाइफस्टाइल से जुड़े कारक महिलाओं की प्रजनन क्षमता और अंडे की क्वालिटी को खराब करते जा रहे हैं।

हमारी रोजमर्रा की भी कई आदतें प्रजनन समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिसके बारे में सभी महिलाओं को जरूर जनाना चाहिए और समय रहते आदतों में सुधार कर लेना चाहिए।
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इनफर्टिलिटी के क्या कारण हैं? - फोटो : Freepil.com
महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक भागीदारी को बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 8 मार्च को इंटरनेशनल विमेंस डे मनाया जाता है। 

महिलाओं में फर्टिलिटी की समस्या

महिलाओं में फर्टिलिटी यानी गर्भधारण करने की क्षमता कम होना एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह समस्या अधिक उम्र की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती थी, लेकिन अब 20-30 साल की उम्र में भी कई महिलाओं को गर्भधारण में कठिनाई हो रही है।

अध्ययनों से पता चलता है कि दुनिया भर में लगभग 12-18% प्रजनन आयु की महिलाओं को किसी न किसी स्तर की इनफर्टिलिटी की समस्या होती है। महिला दिवस के इस खास अवसर पर आइए जान लेते हैं कि महिलाओं की कौन-कौन सी आदतें उनके लिए दुश्मन बनती जा रही हैं?
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महिलाओं में प्रजनन विकारों का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं डॉक्टर?

अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ गायनोलॉजिस्ट डॉ शशि श्रीवास्तव बताती हैं, महिला की फर्टिलिटी, शरीर की कई स्थितियों जैसे हार्मोन, अंडाशय की सेहत, ओवुलेशन और पोषण पर निर्भर होती है। यदि इस सिस्टम में गड़बड़ी हो जाए तो गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। 

कई मामलों में इनफर्टिलिटी का जोखिम हमारी रोजमर्रा की आदतों से जुड़ा होता है, जिन्हें समय रहते बदलकर काफी हद तक कम किया जा सकता है। 


किन आदतों में तुरंत सुधार जरूरी?
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहती हैं, प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर रखना है तो कम उम्र से ही लाइफस्टाइल और आहार में सुधार जरूरी है।

उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं की फर्टिलिटी और अंडों की गुणवत्ता प्राकृतिक रूप से कम होती जाती है। 35 की उम्र के बाद अंडों की संख्या और गुणवत्ता तेजी से कम होने लगती है। इसलिए समय शादी या प्रेग्नेंसी प्लान करना जरूरी है। यदि संभव हो तो 30 साल से पहले परिवार की योजना बनाना बेहतर माना जाता है।

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धूम्रपान के नुकसान - फोटो : Freepik.com
बढ़ने न पाए आपका वजन

वजन बढ़ने का हमारी सेहत पर सीधा असर होता है। ये आपकी प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है। मोटापा होने पर शरीर में इंसुलिन और हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे ओवुलेशन में दिक्कत आ सकती है जिससे गर्भधारण कठिन हो जाता है। इसलिए वजन को कंट्रोल करना जरूरी है।


धूम्रपान और शराब सेहत के लिए दुश्मन 

डॉक्टर कहती हैं महिलाओं में मॉर्डन दिखने के चक्कर में धूम्रपान और शराब की आदत तेजी से बढ़ी है जिसका उनके प्रजनन स्वास्थ्य पर सीधा असर हो रहा है।
  • सिगरेट और शराब में मौजूद रसायन और टार अंडों की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं और हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित करते हैं। 
  • धूम्रपान से अंडाशय की उम्र जल्दी बढ़ती है और गर्भपात का खतरा भी बढ़ सकता है।

इसके अलावा शराब और नशीले पदार्थ शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाते हैं, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए डॉक्टर साफ सलाह देते हैं कि फर्टिलिटी बनाए रखने के लिए इन आदतों से दूर रहना जरूरी है।
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अक्सर स्ट्रेस में रहना हो सकता है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
बढ़ता तनाव भी डालता है असर

तनाव में रहना भी आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। लगातार तनाव में रहना, नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करती है।

तनाव बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ जाता है, जो प्रजनन हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकता है। यही कारण है कि महिलाओं के लिए रोजाना वॉक करना जरूरी हो जाता है जो मूड को ठीक रखने और कॉर्टिसोल के स्तर को घटाने में मददगार है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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