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ICMR की चेतावनी: कोविड के बाद अब बढ़ रहे हैं H3N2 वायरस के मामले, अस्पतालों में बढ़ी भीड़, बचाव जरूरी

Sat, 04 Mar 2023 12:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंफ्लुएंजा संक्रमण के मामले - फोटो : istock
मौसम में बदलाव के साथ देशभर में इन्फ्लूएंजा (फ्लू) की समस्या देखी जा रही है। इस बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने पुष्टि की है कि राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में H3N2 वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसके कारण लोगों को तेज बुखार और खांसी-जुकाम की समस्या हो रही है। इस संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते अचानक से अस्पतालों में मरीजों की भीड़ भी बढ़ रही है। सभी लोगों को इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतने और फ्लू से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी गई है।
 
डॉक्टरों का कहना है कि H3N2 वायरस, इन्फ्लुएंजा-ए वायरस का एक प्रकार है, जिसके कारण पिछले एक महीने में अस्पतालों में भीड़ बढ़ती हुई देखी गई है। दिसंबर से मार्च तक के डेटा के अनुसार इन्फ्लूएंजा A H3N2 के मामलों लगातार वृद्धि जारी है। श्वसन संक्रमण के साथ-साथ ज्यादातर लोगों को सिरदर्द-बदन दर्द, सर्दी-जुकाम और तेज बुखार की दिक्कत हो रही है।
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इंफ्लुएंजा H3N2 वायरस का संक्रमण - फोटो : iStock
अस्पतालों में भर्ती होने की पड़ रही है जरूरत

वैसे तो इन्फ्लुएंजा ज्यादा गंभीर नहीं होता है, पर रिपोर्ट्स के मुताबिक H3N2 वायरस से संक्रमित कई लोगों को अस्पतालों में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है। इन रोगियों में से 90 फीसदी से अधिक लोगों को तेज बुखार-कफ, 27 फीसदी को सांस की दिक्कत, 16 फीसदी को निमोनिया और 6 फीसदी लोगों में झटके आने की दिक्कत देखी गई है।

करीब 7 फीसदी लोग ऐसे भी हैं जिन्हें गंभीर रोग के कारण आईसीयू में भर्ती करना पड़ा है।
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सर्दी-जुकाम के लक्षणों पर ध्यान दें - फोटो : istock
इन्फ्लूएंजा में गंभीर रोग के मामले क्यों?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि H3N2 वायरस, इन्फ्लूएंजा के अन्य वायरस की तुलना में अधिक संक्रामक और गंभीर लक्षण पैदा करने के लिए जाना जाता है। हालांकि यह कोई नया वैरिएंट नहीं है, इसके मामले पहले भी देखे जाते रहे हैं। सामान्य इन्फ्लूएंजा संक्रमण की तुलना में इसके कारण गंभीर रोग विकसित हो सकता है, जिसमें समय पर इलाज मिलने से रोग की गंभीरता को कम किया जा सकता है।

इस संक्रमण के लक्षण हमेशा ठंड लगने के साथ शुरू होकर तेज बुखार और फिर खांसी-अन्य श्वसन समस्याओं का कारण बनते हैं।

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वायरल फीवर की गंभीरता - फोटो : iStock
किन लोगों को खतरा अधिक

डॉक्टर्स का कहना है कि ज्यादातर संक्रमितों को 102-103 डिग्री तक बुखार हो सकता है। शरीर में दर्द और अन्य श्वसन समस्याओं के कारण कई तरह की अन्य कठिनाइयों का भी एहसास हो सकता है। ज्यादातर रोगी, एंटीवायरल दवाओं से ठीक हो जा रहे हैं, पर जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है उन्हें अस्पतालों में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।

वैसे तो इन्फ्लुएंजा-ए आम तौर पर सेल्फ लिमिटिंग होता है, यानी कि कुछ दिनों में यह स्वत: ही ठीक हो जाता है और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी नहीं होती है, पर डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बढ़ते प्रदूषण के स्तर और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण बीमारी के गंभीर रूप लेने का जोखिम बना हुआ है। 
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H3N2 वायरस से बचाव के तरीके - फोटो : iStock
संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर्स कहते हैं, कुछ सामान्य सी बातों को ध्यान में रखकर संक्रमण से बचाव और इसके प्रसार को कम किया जा सकता है।
  • जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण हों, उनके निकट संपर्क से बचें। 
  • बीमार होने पर घर पर रहें और आराम करें।
  • छींकते-खांसते समय मुंह और नाक ढक लें।
  • हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
  • बार-बार आंख, नाक या मुंह को छूने से बचें।
  • शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाले उपाय करते रहें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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