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चिंताजनक: देश में बढ़ती बांझपन की समस्या, कौन से कारण जिम्मेदार? पुरुषों से जुड़ी इस रिपोर्ट ने चौंकाया

Sat, 27 Dec 2025 05:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • एम्स और आईसीएमआर के शोध बताते हैं कि 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पुरुषों की फर्टिलिटी तेजी से घट रही है। इसके बावजूद पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई मिथक अभी भी समाज में गहराई से फैले हुए हैं।
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भारत में प्रजनन की समस्याएं - फोटो : freepik.com
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने वैश्विक स्तर पर क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम तो बढ़ाया ही है, साथ ही इसका प्रजनन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर देखा जा रहा है। भारतीय आबादी में भी इनफर्टिलिटी (बांझपन) एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, जो लाखों दंपत्तियों (लगभग 2.75 करोड़ से अधिक) को प्रभावित करती है। आंकड़ों से पता चलता है कि गांवों की तुलना में शहरों में बांझपन की समस्या अधिक देखी जा रहा है। अगर इसके कारणों पर गौर करें तो पता चलता है कि महिलाओं में पीसीओएस, लाइफस्टाइल से जुड़े कारक और पुरुषों में स्पर्म काउंट कम होना और  उम्र से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। 

प्रजनन विकारों की समस्या पिछले एक-दो दशकों में काफी तेजी से बढ़ी है। अमर उजाला में इससे संबंधित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि था कि किस तरह से लोगों के लिए सामान्य तरीके से गर्भधारण मुश्किल होता जा रहा है और लोग आईवीएफ जैसे उपायों की तरफ भाग रहे हैं। आईवीएफ पर लोगों की निर्भरता कितनी अधिक हो गई है, ये इस बात से स्पष्ट होता है कि मौजूदा समय में ब्रिटेन के हर क्लासरूम में औसतन एक बच्चा आईवीएफ से जन्मा हुआ देखा जा रहा है।

अब सवाल उठता है कि इनफर्टिलिटी की समस्या के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है, पुरुष या महिला? आइए इस बारे में समझते हैं।
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पुरुषों में स्पर्म काउंट - फोटो : Adobe Stock
पुरुषों में बढ़ती प्रजनन की समस्या

लंबे वक्त से माना जाता रहा है कि प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी पर उम्र का असर केवल महिलाओं पर होता है, लेकिन नई वैज्ञानिक रिपोर्टें बताती हैं कि पुरुषों की भी अपनी ‘बायोलॉजिकल क्लॉक’ होती है। उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में स्पर्म संख्या, गतिशीलता, डीएनए क्वालिटी और हार्मोनल संतुलन में गिरावट आती है, जिसका सीधा असर गर्भधारण की संभावना और संतान के स्वास्थ्य पर पड़ता है। 

स्टैनफोर्ड, हार्वर्ड, मेयो क्लिनिक और यूसीएसएफ सहित कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के साथ भारत के एम्स और आईसीएमआर के शोध बताते हैं कि 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में पुरुषों की फर्टिलिटी तेजी से घट रही है। इसके बावजूद पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कई मिथक अभी भी समाज में गहराई से फैले हुए हैं।
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प्रजनन की बढ़ती दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
प्रजनन विकारों के लिए कौन से कारण जिम्मेदार?

भारत के एम्स, आईसीएमआर और फोर्टिस हेल्थ के अध्ययनों में सामने आया है कि महानगरों में रहने वाले 40 वर्ष से ऊपर के पुरुषों में स्पर्म काउंट में 30-40% गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके कारणों में प्रदूषण, तनाव, धूम्रपान, अल्कोहल, सिडेंटरी लाइफस्टाइल और फास्ट-फूड प्रमुख हैं। 

विशेषज्ञ कहते हैं कि जीवनशैली में सुधार, तापमान नियंत्रण, पोषण और नियमित मेडिकल जांच से 3 से 6 महीनों में पुरुष स्पर्म क्वालिटी में उल्लेखनीय सुधार संभव है। 

भारत में पर्यावरण प्रदूषण भी एक गंभीर चिंता का विषय रहा है। अध्ययनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि हवा, पानी और खाने में मौजूद रसायन और माइक्रोप्लास्टिक शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण के कारण पुरुषों में स्पर्म काउंट और महिलाओं में फर्टिलिटी रेट में गिरावट देखी जा रही है। इसके अलावा देर से विवाह और गर्भधारण के कारण भी प्रजनन की समस्या देखी जा रही है। 
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प्रजनन को कैसे सुधारें - फोटो : Freepik
प्रजनन बढ़ाने वाली ओवर-द-काउंटर दवाओं से सावधान

डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि ‘मर्दाना ताकत’ या ‘हार्मोन पावर’ के नाम पर ली जाने वाली अनियंत्रित दवाओं से लीवर और हार्मोन प्रणाली को गंभीर खतरा होता है। भारत में अब डीएनए-फ्रैग्मेंटेशन टेस्ट, फर्टिलिटी विटामिन, हार्मोनल बैलेंस मैनेजमेंट और माइक्रो-न्यूट्रीशन थेरेपी जैसी सुविधाएं बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं। इस वजह से पुरुष समय रहते सावधान हो सकते हैं।

समय पर जांच, संतुलित आहार, तनाव नियंत्रण, नियमित व्यायाम और जागरूकता ही इस समस्या से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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