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बड़ी कामयाबी: हर साल लाखों महिलाओं की मौत का कारण बनने वाली इस बीमारी से मिलेगी राहत, स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च

Thu, 01 Sep 2022 03:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सर्वाइकल कैंसर की पहली स्वदेशी वैक्सीन लॉन्च - फोटो : Twitter
कैंसर वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। हर साल लाखों लोगों की मौत कई प्रकार के कैंसर के कारण हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर ऐसा ही एक बड़ा खतरा है, भारत में भी इसके रोगी काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल 122,844 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है, वहीं 67 हजार से अधिक महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है, हालांकि अब इस गंभीर खतरे को कम किया जा सकेगा। गुरुवार 1 सितंबर को सर्वाइकल कैंसर के लिए देश की पहली स्वनिर्मित वैक्सीन लॉन्च की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन इस गंभीर रोग की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

इससे पहले  सर्वाइकल कैंसर के लिए अब तक यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा अनुमोदित 'गार्डासिल 9' नामक एचपीवी वैक्सीन दी जा रही थी। अध्यनों में पाया गया है कि यह वैक्सीन  योनि और वुल्वर कैंसर के खतरे को भी कम करने में लाभकारी हो सकती है।

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। यह गर्भाशय ग्रीवा में विकसित होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में दुनियाभर में अनुमानित 570 000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था और लगभग 3.11 लाख महिलाओं की इससे मृत्यु हो गई थी।
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सर्वाइकल कैंसर रोकथाम में वैक्सीनेशन से मिल सकती है बड़ी कामयाबी - फोटो : istock
सर्वाइकल कैंसर की मेड इन इंडिया वैक्सीन

एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) ने पहले स्वदेशी रूप से विकसित क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन (क्यूएचपीवी) को लॉन्च किया है। सर्वाइकल कैंसर  के लिए 'मेड इन इंडिया' इस वैक्सीन को लेकर विशेषज्ञों में काफी उत्साह है।

नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) में कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरपर्सन डॉ एन.के अरोड़ा ने कहा कि मेड-इन-इंडिया वैक्सीन लॉन्च करना एक रोमांचक अनुभव है। यह महिलाओं में बढ़ती एक गंभीर समस्या की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम साबित होने वाला है। 
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सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला - फोटो : ANI
कितनी होगी वैक्सीन की कीमत?

वैक्सीन लॉन्च के मौके पर सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने बताया कि दिसम्बर से जनवरी के बीच वैक्सीन का निर्माण शुरू हो जाएगा और दो साल में दो सौ मिलियन डोज़ का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वाइकल कैंसर के इस टीके की कीमत 200 से 400 रुपये के बीच हो सकती है, सरकार से बात करके दाम तय किया जाएगा। देश के लिए यह बड़ी कामयाबी है, उम्मीद है कि इससे हर साल होने वाली लाखों मौतों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

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सर्वाइकल कैंसर को कम होगा खतरा - फोटो : iStock
एचपीवी वायरस पर असरदार है वैक्सीन

सर्वाइकल कैंसर की इस स्वदेशी वैक्सीन के बारे में डॉ एन के अरोड़ा ने बताया- करीब 90 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के केस ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) वायरस के कारण होते हैं। परीक्षण में इस टीके को इस वायरस के खिलाफ काफी असरदार पाया गया है। अगर इस वैक्सीन को युवाओं को दिया जाए तो इससे अगले 30 साल तक उन्हें इस गंभीर प्रकार के कैंसर के जोखिम से बचाया जा सकता है। यह वैक्सीन हर साल लगभग लाखों महिलाओं की इस कैंसर से होने वाली मौत के जोखिम को कम करने में मदद कर सकेगी। 
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सर्वाइकल कैंसर से लंबे समय तक मिलेगी सुरक्षा - फोटो : iStock
30 साल तक कैंसर से मिलेगी सुरक्षा

डॉ अरोड़ा कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर को लेकर उपलब्ध वैक्सीन की दुनियाभर में बड़ी कमी देखी जा रही थी, हालांकि अब हमारे पास स्वदेशी टीके उपलब्ध होंगे और हमें उम्मीद है कि इसे 9-14 साल की लड़कियों के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के रूप में उपलब्ध करके उन्हें भविष्य के एक बड़े खतरे से सुरक्षित करने में मदद मिल सकेगी। 
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सर्वाइकल कैंसर से हर साल हो जाती है लाखों मौत - फोटो : Pixabay
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण और खतरा

प्रारंभिक चरण के सर्वाइकल कैंसर में आमतौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं, यही कारण है कि इसका अंदाजा लगा पाना काफी कठिन हो जाता है। कैंसर बढ़ने के साथ इसके लक्षण दिख सकते हैं। इसमें संभोग के बाद, मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद योनि से खून बहने की समस्या और पैल्विक हिस्से में या फिर संभोग के दौरान दर्द की समस्या होती रह सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक लोगों के साथ यौन संबंध रखने, धूम्रपान करने या फिर प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी के कारण इस कैंसर के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। 



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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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