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Td Vaccine: देश में लॉन्च हुई दो गंभीर बीमारियों से बचाने वाली स्वदेशी वैक्सीन, जानिए इसके बारे में विस्तार से

Sat, 21 Feb 2026 07:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वदेशी रूप से निर्मित टिटनेस एंड एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन (टीडी) लॉन्च की। इसे  यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम में शामिल किया गया है। जानिए ये वैक्सीन क्यों जरूरी है?
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टिटनेस एंड एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन (टीडी) लॉन्च - फोटो : Freepik.com
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली स्थित सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में स्वदेशी रूप से निर्मित टिटनेस एंड एडल्ट डिप्थीरिया वैक्सीन (टीडी) लॉन्च की। इस लॉन्च के साथ, वैक्सीन को अब यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (यूआईपी) के तहत आपूर्ति के लिए भी शामिल कर लिया गया है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय अनुसंधान संस्थान अप्रैल तक यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम को 55 लाख खुराक की आपूर्ति करेगा। आने वाले वर्षों में वैक्सीन के उत्पादन को और भी बढ़ाने का लक्ष्य है ताकि टीकाकरण कार्यक्रम को और मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इसे देश के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह लॉन्च राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा और भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा - फोटो : ANI
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य और दवा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना है। भारत में बनी यह वैक्सीन उसी दिशा में एक मजबूत कदम है। आज भारत को दुनिया की “फार्मेसी” कहा जाता है, क्योंकि भारत वैश्विक स्तर पर वैक्सीन बनाने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ग्लोबल रैंकिंग में भारत ने मैच्योरिटी लेवल-3 हासिल किया है, जो देश की मजबूत वैक्सीन रेगुलेटरी प्रणाली को दिखाता है।

भारत का  यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम

नड्डा ने कहा, पहले वैक्सीन और दवाइयों को विकसित करने में दशकों लग जाते थे लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने सिर्फ 9 महीने में दो स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर लीं और देशभर में 220 करोड़ से ज्यादा डोज लगाए। 
 
  • भारत का टीकाकरण कार्यक्रम दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम है। इसमें अभी 11 टीके दिए जाते हैं जो वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली 12 बीमारियों से बचाने में मदद करती है।
  • हर साल करीब 2 से 2.5 करोड़ बच्चों का जन्म होता है और इतनी ही महिलाएं गर्भवती होती हैं। 
  • इन सभी को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ट्रैक किया जाता है और गर्भावस्था से लेकर बच्चे के 16 साल की उम्र तक कुल 27 टीके दिए जाते हैं।
  • सरकार के अनुसार, हर साल करीब 5 करोड़ लोग इस टीकाकरण कार्यक्रम का लाभ लेते हैं, जिनमें 2.5 करोड़ गर्भवती महिलाएं और 2.5 करोड़ बच्चे शामिल हैं। 
  • लगातार प्रयासों और बेहतर सिस्टम की वजह से अब देश में टीकाकरण कवरेज करीब 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
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टीकाकरण से कम होता है बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्यों जरूरी है ये वैक्सीन?

टिटनेस-डिप्थीरिया (Td) वैक्सीन की शॉट दो बीमारियों टिटनस और डिप्थीरिया से बचाने में मदद करती है। यह आमतौर पर बचपन में शुरुआती वैक्सीनेशन के बाद इम्यूनिटी बनाए रखने के लिए बूस्टर शॉट के तौर पर दिया जाता है। 

टेटनस-डिप्थीरिया वैक्सीन दो गंभीर बीमारियों के खिलाफ आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है।
 
  • डिप्थीरिया एक प्रकार का बैक्टीरियल संक्रमण है। डिप्थीरिया आपके गले में एक मोटी परत बना लेती है जिससे सांस लेने में रुकावट आ सकती है। डिप्थीरिया के कारण हार्ट फेलियर, पैरालिसिस और मौत का भी खतरा रहता है। अच्छी बात यह है कि वैक्सीनेशन से डिप्थीरिया संक्रमण में 99% की कमी आ सकती है।
     
  • टिटनेस एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो घाव या कट के जरिए शरीर में जा सकता है। टिटनेस से पूरे शरीर की मांसपेशियों में दर्द और अकड़न का कारण बनती है। गंभीर मामलों में इससे सांस लेने में दिक्कत और मौत भी हो सकती है। वैक्सीनेशन की मदद से इस तरह के जोखिमों को भी कम किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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