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Imran Khan: क्या है सीआरवीओ की समस्या जिससे जूझ रहे हैं इमरान खान, 85% कम हो गई आंख की रोशनी

Sun, 15 Feb 2026 12:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Imran khan vision loss: पूर्व प्रधानमंत्री इमारान खान के आंखों की रोशनी 85% तक कम हो गई है। जांच की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि उन्हें सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ) नाम की समस्या हो गई है। इसके लिए डॉक्टरों ने तुरंत इलाज और देखभाल की सलाह दी है।
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इमरान खान को विजन लॉस की समस्या - फोटो : Amarujala.com
पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी दाईं आंख की रोशनी बिल्कुल कम हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी सलमान सफदर ने एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें बताया गया है कि इमरान खान के आंखों की रोशनी 85% तक कम हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान ने जेल अधिकारियों को बार-बार आंखों की रोशनी में हो रही समस्या के बारे में शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जिसके कारण अब उन्हें दिखना बिल्कुल कम हो गया है। 

पूर्व प्रधानमंत्री इमारान खान ने एमिकस क्यूरी को बताया कि लगभग तीन से चार महीने पहले, अक्टूबर 2025 तक उनकी दोनों आंखों में नॉर्मल रोशनी थी। फिर उन्हें लगातार धुंधला दिखने की समस्या होने लगी। इसके बारे में उन्होंने बार-बार जेल सुपरिटेंडेंट को बताया लेकिन जेल के अधिकारियों ने इन शिकायतों को दूर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खान को ब्लड क्लॉट का पता चला था। उनकी दाहिनी आंख में सिर्फ 15% रोशनी बची है।
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आंखों की समस्या - फोटो : Adobe Stock Photo
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

साझा की गई रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक ने पूर्व प्रधानमंत्री की आंखों की जांच की है। जांच की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि उन्हें सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ) नाम की समस्या हो गई है। इसके लिए डॉक्टरों ने तुरंत इलाज और देखभाल की सलाह दी है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया, "पिटीशनर अपनी आंखों की रोशनी जाने और समय पर मेडिकल मदद न मिलने से बहुत परेशान और दुखी लग रहा था। उनकी आंखों से पानी आ रहा था और वह बार-बार उन्हें पोंछने के लिए टिशू का इस्तेमाल कर रहा था, जिससे उसे शारीरिक परेशानी दिख रही थी। खान को उनके डॉक्टर से मिलने नहीं दिया गया, जबकि वह 73 साल के हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
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आंखों की रेटिना में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन क्या है?

सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (सीआरवीओ) आंखों की एक गंभीर बीमारी है जिसे अक्सर आई स्ट्रोक कहा जाता है। रेटिना से खून को बाहर निकालने वाली मुख्य नस में जब कोई थक्का बन जाता है औ ये ब्लॉक हो जाती है तो इस तरह की समस्या हो सकती है।
  • सीआरवीओ के कारण अचानक और बिना दर्द के आंखों की रोशनी जाने का खतरा हो सकता है।
  • यह मुख्य रूप से 50 साल से ज्यादा उम्र के उन लोगों को होता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या ग्लूकोमा जैसी समस्याओं के शिकार लोगों में सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

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आंखों की रोशनी कमजोर होने का खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या होते हैं इसके लक्षण?

सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन का सबसे आम लक्षण है नजर कम होना या बिल्कुल धुंधला दिखना। यह अचानक हो सकता है। कभी-कभी इस समस्या के कारण पूरी तरह से अंधापन भी हो सकता है।
 
  • फ्लोटर्स दिखना इसका आम लक्षण है। आपकी आंखों से काले धब्बे, लाइनें या टेढ़े-मेढ़े निशान दिख सकते हैं।
  • ये रेटिना की नसों से रिसने वाले खून के छोटे-छोटे गुच्छों की परछाईं होती हैं।
  • कुछ गंभीर स्थितियों में आंखों में तेज दर्द और दबाव की भी समस्या हो सकती है।
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डायबिटीज-ब्लड प्रेशर को रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
इससे बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन को वैसे तो पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है हालांकि कुछ उपायों की मदद से इसके खतरे को कम कर सकते है।
  • आंखों की समस्याओं से बचे रहने के लिए लाइफस्टाइल और खानपान में सुधार जरूरी है।
  • लो फैट वाली चीजें खाएं। आहार में पौष्टिक चीजों की मात्रा अधिक करें।
  • विटामिन-ए और ई वाली चीजें आहार में शामिल करें। ओमेगा-3 फैटी एसिड भी आपके लिए जरूरी है। 
  • रेगुलर एक्सरसाइज करें। व्यायाम योग से रक्त संचार ठीक रहता है।
  • सही वजन बनाए रखें। इससे डायबिटीज, हृदय रोग और ब्लड प्रेशर से बचाव होता है।
  • धूम्रपान न करें, इससे आंखों को नुकसान होता है।
  • ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल करें। इसका अनियंत्रित रहना आंखों की दिक्कतें बढ़ा सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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