थ्री डी मूवी देखने के शौकीन लोग ये बात जान लें कि उनका ये शौक उनकी सेहत के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है। आजकल बच्चे हों या बड़े, थ्री डी मूवी का क्रेज हर किसी के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन शायद ही आप ये बात जानते होंगे कि आपका ये शौक धीरे-धीरे आपकी सेहत को अंदर से खोखला बना रहा है। इसके साइड इफ़ेक्ट कई बार इतने खराब होते हैं कि व्यक्ति चलने फिरने लायक तक नहीं रहता।
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डॉक्टर रजनी बताती हैं कि दरअसल ज्यादा थ्री डी मूवी देखने से शरीर में वेस्टिबुलर सिस्टम और आंखों की मसल के बीच सही तालमेल न बैठने की वजह से ऐसी स्थिति पैदा होती है। सरल शब्दों में कहा जाए तो हमारी आंखों से होती हुई एक नस हमारे दिमाग तक जाती है जो हमारी आंखों की गतिविधियों को कंट्रोल करती है जिसे Occulomotor नाम से जाना जाता है।
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डॉक्टर रजनी बताती हैं कि अधिक थ्री डी मूवी देखने की वजह से इसका असर न सिर्फ दिमाग पर पड़ता है बल्कि शरीर की मूवमेंट भी प्रभावित होती है। जिसकी वजह से व्यक्ति को उल्टी आना, चक्कर,आंखों का बेलेंस बिगड़ना, डबल विजन की शिकायत के साथ गर्दन और घुटनों में भी दर्द हो सकता है।
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एक रिसर्च में बताया गया कि जॉन नाम का एक व्यक्ति थ्री डी मूवी देखने गया। पहले तो जॉन को मूवी देखने के लिए दिए गए चश्में को एडजस्ट करने में ही 10 मिनट लग गए क्योंकि वो उ चश्में में काफी असहज फील कर रहा था। इसके बाद जब उसने मूवी देखनी शुरु की तो उसे कुछ धुंधला दिखाई देना लगा। साथ ही उसके घुटनों में भी काफी दर्द शुरू हो गया।
जॉन ने बताया कि ये सब तब हो रहा था जब वो बीच-बीच में इधर उधर देखकर दिमाग पर प्रेशर को कम करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि फिल्म के खत्म होने के 10 मिनट बाद भीउसे नार्मल होने में एक्ट्रा 10 मिनट लगे।
उपाय-
इस तरह की दिक्कत से बचने के लिए डॉक्टर्स अक्सर थ्री डी मूवी के शौकिन लोगों को कम मूवी देखने की सलाह देते हैं। साथ ही लोगों को हमेशा ये एडवाइज किया जाता है कि वो अपनी डाइट का खास ध्यान रखें। यदि आपको बेलेंस मेंटेन करने में दिक्कत होती हो या अक्सर चक्कर आते हो अपने फिजियोथेरेपिस्ट या फिर फिजिशियन को दिखाएं। साथ ही समय-समय पर अपनी आंखों की जांच करवाते रहे।