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बच्चों को हो रही इस अजीब बीमारी का कोरोना से क्या है संबंध?

Tue, 26 May 2020 11:25 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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बच्चे की थर्मल स्क्रीनिंग करते कर्मचारी(File Photo) - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ बच्चों में इन दिनों एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी देखने को मिल रही है। इस बीमारी का संबंध कोरोना वायरस संक्रमण से है। ये बीमारी कुछ बच्चों के लिए गंभीर मुश्किलें पैदा कर सकती है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है।

ब्रिटेन में अब तक करीब 100 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। अध्ययन बताते हैं कि यूरोप में अन्य जगहों पर भी बच्चों में ऐसी ही बीमारी के लक्षण देखे जा रहे हैं। माना जा रहा है कि जिन बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) कोरोना वायरस पर देर से प्रतिक्रिया दे रहा है, उनमें इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका ज्यादा है। ये बीमारी ‘कावासाकी डिजीज’ से मिलती-जुलती है।
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बच्चे में कावासाकी बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : Pexels
कावासाकी बीमारी की वजह से बच्चों की रक्त कोशिकाएं फूल जाती हैं और उनके पूरे शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते हैं। बच्चों को तेज बुखार आता है और उनकी आंखें भी लाल हो जाती हैं। पिछले महीने ब्रिटेन में नेशनल हेल्थ सर्विस के डॉक्टरों से कहा गया था कि वो इस खतरनाक बीमारी के बारे में पता लगाएं। इससे पहले लंदन में आठ बच्चे बीमार पड़ चुके थे और उनमें से एक (14 साल) की मौत भी हो चुकी थी।
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बच्चे में कावासाकी बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : social media
बीमारी के प्रमुख लक्षण
इन सभी बच्चों को लंदन के एवेलिना चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था और सबमें लगभग एक जैसे लक्षण थे। जैसे - तेज बुखार, बदन पर लाल चकत्ते, लाल आंखें, शरीर में सूजन और दर्द। बच्चों को फेफड़ों या सांस से जुड़ी कोई बीमारी नहीं थी लेकिन इनमें से सात को वेंटिलेटर पर रखना पड़ा था।

डॉक्टरों का कहना है कि ये एक ‘नई बीमारी’ है जो कावासाकी डिजीज शॉक सिन्ड्रोम (KDSS) से मिलती जुलती है। केडीएसएस आम तौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को होता है। इसके लक्षण हैं: शरीर पर चकत्ते आना, गले की ग्रथियों में सूजन, होठों का सूखना और फटना। लेकिन ये नई बीमारी बड़ी उम्र के बच्चों (14-16 साल) को भी प्रभावित कर रही है। इसकी वजह से कुछ बच्चों को गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं।

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बच्चे में कावासाकी बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : Pexels
कोरोना संक्रमण से संबंध
डॉक्टर लिज विटेकर इंपीरियल कॉलेज, लंदन में ‘पीडियाट्रिक इंफेक्शियस डिजीज ऐंड इम्युनोलॉजी’ में क्लीनिकल लेक्चरर हैं। उनका मानना है कि चूंकि ये बीमारी कोरोना वायरस महामारी के दौर में हो रही है, इसका मतलब है कि दोनों एक-दूसरे से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा, “उधर कोविड-19 के मामले पढ़े और इधर तीन-चार हफ्तों बाद बच्चे इस बीमारी की चपेट में आने लगे। इसीलिए हमें लगता है कि ये बीमारी कोरोना संक्रमण के बाद ही हो रही है।” इसका मतलब है कि इस नई बीमारी का सम्बन्ध कोविड-19 संक्रमण के बाद शरीर में पैदा हुई एंटीबॉडी से है।
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बच्चे में कावासाकी बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
बेहद दुर्लभ बीमारी
प्रोफेसर रसेल वाइनर रॉयल कॉलेज ऑफ पीडियाट्रिक्स ऐंड चाइल्ड हेल्थ के प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित ज्यादातर बच्चों पर इलाज का असर हो रहा है, वो ठीक हो रहे हैं और घर जाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि ये सिन्ड्रोम ‘बेहद दुर्लभ’ है।

प्रोफेसर वाइनर कहते हैं, “इस बीमारी के बारे में ज्यादा अध्ययन करने पर पता चल सकता है कि बहुत कम बच्चे कोविड-19 की चपेट में क्यों आ रहे हैं। ज्यादातर बच्चों पर या तो कोरोना वायरस का असर नहीं है या फिर उनमें कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं।”
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न्यूयॉर्क में बीमार हो रहे बच्चे (प्रतीकात्मक) - फोटो : social media
कोरोना संक्रमित कुल लोगों में बच्चे सिर्फ एक-दो फीसदी ही हैं। माइकल लेविन इंपीरियल कॉलेज लंदन में पीडियाट्रिक्स ऐंड इंटरनेशनल चाइल्ड हेल्थ के प्रोफेसर हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बच्चों को कोरोना वायरस टेस्ट तो निगेटिव आया है लेकिन उनके शरीर में संक्रमण के बाद बनने वाली एंटीबॉडी मौजूद थीं।

प्रोफेसर लेविन ने कहा- हमें लगता है कि नई बीमारी की वजह से वायरस के प्रति एक असामान्य इन्यून रिस्पॉन्स तैयार हो जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि इस रिएक्शन और नई बीमारी के बारे में अभी ‘बहुत कुछ जानना’ बाकी है। ये बीमारी अभी पिछले तीन-चार हफ्तों से ही सामने आई है।
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बच्चे में बीमारी (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
आम तौर पर कोरोना वायरस से संक्रमित होने के छह हफ्तों बाद बच्चों में इस नई बीमारी के लक्षण नजर आते हैं। शायद यही वजह है कि कोरोना संक्रमण फैलने के कुछ हफ्ते बाद ही इस बीमारी के मामले सामने आए।

बाकी दुनिया का हाल
ब्रिटेन के अलावा अमेरिका, स्पेन, इटली, फ्रांस और नीदरलैंड में भी इस बीमारी के मामले सामने आए हैं। न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रू क्यूमो के अनुसार कम से कम 15 अमरीकी राज्यों में इस दुर्लभ बीमारी के मामले देखने को मिले हैं।

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बच्चे में बीमारी (सांकेतिक)
न्यूयॉर्क में 82 बच्चों को इस नई बीमारी से ग्रसित पाया गया है और इनमें से 53 के शरीर में कोविड-19 की एंटीबॉडी पाई गई हैं। अमेरिका में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) ने इस हफ्ते सभी अस्पतालों को एक अलर्ट जारी कर अपनी वेबसाइट पर नई बीमारी के बारे में अपडेटेड जानकारी अपलोड करने को कहा है।

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
इस बीच इटली में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि वहां भी 10 बच्चे नई बीमारी से प्रभावित हुए हैं। इन सभी बच्चों को इटली के बेरगमो शहर के अस्पताल में भर्ती कराया था। बेरगमो वही शहर जो संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। फिलहाल ये बच्चे ठीक हो चुके हैं।

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कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करती महिला स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
इन बच्चों की औसत उम्र सात साल थी। इनमें कई गंभीर लक्षण मसलन, दिल से जुड़ी तकलीफ और टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के लक्षण थे। उन्हें अतिरिक्त स्टेरॉइडड्स भी देना पड़ा था। 10 में से आठ बच्चों के शरीर में कोरोना वायरस संक्रमण के बाद बनने वाली एंटबॉडी भी मौजूद थीं। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि ये टेस्ट 100 फीसदी सही नहीं था क्योंकि ये बीमारी संक्रमण के कई हफ्ते बाद नजर आती है।

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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
बेरगमो अस्पताल में डॉक्टर लूसियो वर्डोनी ने कहा, “हालांकि ये बहुत दुर्लभ बीमारी है लेकिन हमने इस बारे में अध्ययन किया है और रिपोर्ट लिखी है। हमारी रिपोर्ट इस बारे में और सबूत उपलब्ध कराती है कि कैसे कोरोना वायरस बच्चों पर असर डाल रहा है।”
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बच्ची के शरीर के तापमान की जांच करता स्वास्थ्य कर्मी(File Photo) - फोटो : PTI
ब्रिटेन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है ये बीमारी बच्चों के अलावा वयस्कों को भी प्रभावित कर रही हो। ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों के विशेषज्ञ अब मिलकर इस नई बीमारी पर रिसर्च कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने इसे ‘पीडियाट्रिक इन्फ्लेमेटरी मल्टीसिस्टम सिंड्रोम’ का नाम दिया है।
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