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एयर पॉल्यूशन: साफ दिखने वाली हवा भी हो सकती है प्रदूषित, सिर्फ एक्यूआई ही नहीं इन बातों पर भी दें ध्यान

Sat, 24 Oct 2026 05:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Air Pollution Risk: साफ दिखाई देने वाली हवा भी PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषकों से प्रभावित हो सकती है।  प्रदूषण अधिक होने पर बाहरी गतिविधियां कम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
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वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल्ली-एनसीआर में दिवाली से पहले ही हवा की  गुणवत्ता खराब होनी शुरू हो गई है। हर साल दिवाली के बाद पटाखों के धुंआ और पराली जलाने के कारण ये समस्या देखी जाती रही है, परअभी दिवाली में करीब दो हफ्तों का समय बाकी है और दिल्ली में एहतियातन प्रदूषण कंट्रोल के लिए ग्रैप-1 लागू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, प्रदूषण के साथ हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर भी बढ़ने लग जाता है, ये सेहत के लिए गंभीर खतरे बढ़ाने वाले हो सकते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने पीएम 2.5 और पीएम 10 में अंतर को समझाया है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान साफ दिखने, धूप निकलने और दूर तक सब कुछ स्पष्ट नजर आने के बावजूद हवा सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है? दरअसल, हवा में मौजूद हर प्रदूषक आंखों से दिखाई नहीं देते। पीएम2.5 जैसे बेहद महीन कण इतने छोटे होते हैं कि उन्हें सामान्य आंखों से देखना संभव नहीं होता। ये सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ कण तो खून में भी मिल जाते हैं।

यही वजह है कि केवल आसमान का रंग, धुंध की मौजूदगी या सड़क पर धूल देखकर हवा की गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।
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हवा में प्रदूषण का स्तर - फोटो : ANI
वायु प्रदूषण का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) प्रदूषण की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण तरीका है, इससे वातावरण में प्रदूषण के स्तर का पता लगाया जा सकता है। प्रदूषण बढ़ने के साथ हमारी आंखों में जलन-लालिमा, खांसी और सांस की दिक्कतें होने लगती हैं। इसलिए प्रदूषण के दिनों में भले ही दिखने में हवा साफ लग रही हो पर फिर भी सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए। हवा में  पीएम 2.5 और पीएम 10 का बढ़ा स्तर धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता जाता है।
 
  • पीएम 2.5 का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये वाहन के धुएं, ईंधन जलने, औद्योगिक गतिविधियों और कचरा जलाने से निकल सकते हैं। इनका आकार छोटा होने के कारण ये फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं।
  • वहीं पीएम 10 निर्माण कार्य, सड़क की धूल, मिट्टी और दूसरी गतिविधियों से हवा में फैल सकते हैं। ये आंख, नाक और गले में जलन तथा खांसी पैदा कर सकते हैं। 
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वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन का खतरा

हवा भले ही देखने में साफ हो पर इसमें कई बार नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और ओजोन का स्तर ज्यादा हो सकता है।

नाइट्रोजन डाइऑक्साइड मुख्य रूप से ईंधन जलने और वाहन उत्सर्जन से निकलती है। वहीं, जमीन के पास बनने वाली ओजोन (O₃) सूर्य के प्रकाश में कुछ प्रदूषकों के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बन सकती है। ये दोनों सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं और अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। 

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प्रदूषण का खतरा - फोटो : Adobe Stock
एक्यूआई के अलावा इन बातों पर दें ध्यान

एक्यूआई हवा की गुणवत्ता समझने का पैमाना है। एक्यूआई का बढ़ना बताता है कि हवा में प्रदूषण का स्तर ज्यादा हो गया है। प्रदूषण वाले दिनों में एक्यूआई पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। 
 
  • आपके घर या दफ्तर के आसपास ट्रैफिक, निर्माण कार्य, कचरा जलाना, फैक्ट्री या डीजल जनरेटर चलना प्रदूषण बढ़ा सकता है। 
  • एक ही शहर के अलग-अलग इलाकों में हवा की गुणवत्ता अलग हो सकती है। इसलिए केवल शहर का औसत एक्यूआई देखकर अपने घर के आसपास की स्थिति पूरी तरह नहीं समझी जा सकती।
  • वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यदि लक्षण बार-बार हों, बढ़ें या सांस लेने में परेशानी हो तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
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मास्क से होता है प्रदूषण से बचाव - फोटो : Freepik.com
प्रदूषित हवा से बचने के लिए क्या करें?

प्रदूषण को सिर्फ सांस और फेफड़ों के लिए ही खतरनाक न मानें, इसका आपके संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो सकता है। सेहत को ठीक रखने के लिए प्रदूषण से बचाव करते रहना बहुत जरूरी है। 
 
  • एक्यूआई खराब होने पर बाहर व्यायाम और लंबे समय बाहर तक रहने से बचें।
  • बच्चों, बुजुर्गों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
  • प्रदूषण ज्यादा होने पर बाहर जाते समय सही फिटिंग वाला मास्क जरूर पहनें।
  • घर में धूम्रपान, कचरा जलाने और अनावश्यक धुआं पैदा करने से बचें।
  • जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। इससे घर के अंदर प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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