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कोरोना के बाद नहीं चाहते हैं न कोई और महामारी? वैज्ञानिकों ने बताया इसका आसान तरीका, आज से ही करें शुरुआत

Tue, 22 Feb 2022 06:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के बाद महामारी का खतरा - फोटो : iStock
पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया कोरोना की मार झेल रही है। अब तक सामने आए वैरिएंट्स के कारण बनी स्थिति, लॉकडाउन आदि ने सेहत को गंभीर तौर से प्रभावित किया है। हाल में ही देश में तीसरी लहर का कारण बने ओमिक्रॉन वैरिएंट के कुछ अन्य सब-वैरिएंट्स भी सामने आए हैं, जिसे अध्ययनों में काफी संक्रामक बताया जा रहा है। मसलन हम सभी अब इस महामारी से पूरी तरह थक चुके हैं। सभी के मन में बस एक ही सवाल है कि कितनी जल्दी इस महामारी से छुटकारा मिलेगा? जन-जीवन कब सामान्य होगा? पर क्या यह इतना आसान है?

कुछ अध्ययनों में वैज्ञानिक चिंता जता चुके हैं कि आने वाले वर्षों में कोरोना की ही तरह और भी महामारियां आ सकती हैं, जिसको लेकर हम सभी को अलर्ट रहने की जरूरत है। हालांकि हाल ही में साइंस एडवांस जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने ऐसी परेशानियों से बचने का एक कारगर तरीका सुझाया है। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर मानव जाति अगली महामारी को रोकने के लिए गंभीर है, तो उसे वनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। महामारी से बचने के लिए अभी से हम सभी को पेड़ लगाने और वनों के संरक्षण पर ध्यान देने की आवश्यकता है। जिस तरह से हाल के वर्षों में पर्यावरण का प्रदूषण बढ़ा है, ऐसे में कई तरह की महामारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कोरोना के बाद भी खतरा - फोटो : पिक्साबे
कोरोना के बाद भी बना रह सकता है खतरा
रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण के क्षरण तेजी से बढ़ा है। बर्फ तेजी से पिघल रहे हैं, वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और समुद्र के स्तर में वृद्धि होती देखी जा रही है। इन कारणों से घटते वन आवरण ने जानवरों और पक्षियों की लाखों प्रजातियों को बेघर कर दिया है। पर्यावरण का बढ़ता इस तरह का असंतुलन भविष्य के लिए गंभीर मुसीबतों का कारण बन सकता है। इसके चलते कोरोना की तरह या संभवत: इसे भी खतरनाक महामारी जैसी स्थिति बन सकती है।
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पेड़ों को कटाई रोकना जरूरी - फोटो : pexel
वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट
एनर्जी एंड एनवायरनमेंट न्यूज पीएम की रिपोर्ट के अनुसार, कोरोनावायरस से एचआईवी जैसी समस्याओं तथा  हर साल उभरती संक्रामक बीमारियों के चलते वैश्विक स्तर पर मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। अगर समय रहते वन्यजीवों की निगरानी और पर्यावरण पर ध्यान न दिया गया तो पशुओं से इंसानों में होने वाली कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना तक बढ़ जाएगा। प्रकृति की व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ की हमारी आदतें बड़ी गंभीर समस्याओं का न्योता दे रही हैं।

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वन्यजीवों से संक्रमण को जोखिम - फोटो : Pixabay
महामारी के खतरों से बचाव के लिए क्या करें?
रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि आने वाली संभावित महामारियों के खतरे से बचने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि वनों की कटाई पर रोकथाम लगाई जाए साथ ही व्यक्तिगत तौर पर हम सभी को पेड़ लगाने चाहिए। सरकारों को वनों के संरक्षण की योजना बनाकर इसपर गंभीरता से काम करना चाहिए। इसके अलावा  वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों को मुश्तैद रहना होगा जिससे समय रहते उभरते वायरस और रोगजनकों का पता लगाकर उन्हें नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं। वन्यजीवों और पशुओं में आकस्मिक रोगों की निगरानी पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
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कोरोना जैसी महामारी का संकट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में वैश्विक स्वास्थ्य और जनसंख्या विभाग की अध्यक्ष मार्सिया कास्त्रो कहते हैं, कई अध्ययन इस ओर संकेत कर रहे हैं कि कोरोना कोई आखिरी महामारी नहीं है, बल्कि यह तो शुरुआत है। ऐसे में इन खतरों को ध्यान में रखते हुए हम सभी को ऐसे उपाय करने पर ध्यान देना होगा जो महामारी को आने से पहले ही रोक सकें। वन्य संरक्षण इसके लिए सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण कदम है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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