सही जानकारी है या नहीं
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तेरह से अठारह वर्ष
यह एक ऐसी आयु है, जिसमें बच्चे सब जान चुके होते हैं और शारीरिक बदलाव, हार्मोनल परिवर्तनों के दौर से गुजर रहे होते हैं। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप इस बात का ध्यान रखें कि बच्चों को सही जानकारी है या नहीं। उन्हें बताएं कि दो शरीर के मिलन से एक नए शिशु जन्म लेता है। यह एक अच्छी प्रक्रिया है। इसका उपहास बनाना या मजे लेना बिल्कुल गलत हैं। उन्हें इस बात का भान कराएं कि ये सब बेहद सामान्य है और समाज में सभी के लिए यह बना है। उन्हें समझाएं कि इस उम्र में क्यों उन्हें किसी शारीरिक क्रिया की ओर आकर्षित नहीं होना चाहिए। किस चीज को करने के लिए क्या तरीका और क्या समय सही है ताकि वे गलतियां न दोहराएं।
नोट- यह लेख नोबल हॉस्पिटल की मनोचिकित्सक डॉ अनुराधा फाल्के से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर फाल्के पिछले 14 सालों से प्रैक्टिस कर रही हैं।
अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।