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How to Fall Asleep At Night: क्या आपको भी रात में नींद नहीं आती है? ये एक तकनीक आएगी आपके काम

Tue, 30 Jun 2026 03:12 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How to Fall Asleep At Night: अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जिन्हें रात-रातभर नींद नहीं आती है तो ये लेख आपके काम का है। यहां हम आपको एक ऐसी तकनीक के बारे में बताएंगे, जिसको ट्राई करने के बाद आपको 5 मिनट में नींद आ जाएगी।
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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : AI
How to Fall Asleep At Night: आज की तेज़ और तनावभरी जीवनशैली में अनिद्रा एक आम समस्या बनती जा रही है। बहुत से लोग रात में बिस्तर पर लेटने के बाद भी घंटों करवटें बदलते रहते हैं और उन्हें नींद नहीं आती। इसका मुख्य कारण तनाव, चिंता, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल और अनियमित दिनचर्या होता है। 

नींद पूरी न होने से न केवल शरीर थक जाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और एकाग्रता पर भी असर पड़ता है। ऐसे में एक आसान और प्रभावी तकनीक 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक काफी मददगार साबित हो सकती है। 

यह एक वैज्ञानिक श्वास अभ्यास है जिसको सही तरीके से करने पर व्यक्ति कुछ ही मिनटों में गहरी नींद में जा सकता है। आइए जानते हैं यह तकनीक क्या है और कैसे काम करती है।

 
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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : AI
क्या है 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक?

4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक एक सरल लेकिन प्रभावी श्वास अभ्यास है जिसे डॉक्टर एंड्रयू वेइल  ने लोकप्रिय बनाया। इसमें सांस लेने और छोड़ने का एक विशेष पैटर्न होता है जो नर्वस सिस्टम को शांत करता है।

 
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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : AI
कैसे करें 4-7-8 तकनीक

1. आराम से बैठें या लेट जाएं।
2. नाक से 4 सेकंड तक धीरे-धीरे सांस लें।
3. सांस को 7 सेकंड तक रोककर रखें।
4. फिर 8 सेकंड में धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें।
5. इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराएं।

 

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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : AI
ये हैं इसके फायदे

1. तनाव और चिंता कम होती है
 
  • 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक शरीर के नर्वस सिस्टम को शांत करने में मदद करती है। 
  • जब आप धीमी और नियंत्रित सांस लेते हैं, तो दिमाग में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन (कॉर्टिसोल) का स्तर कम होने लगता है।
  •  इससे चिंता, घबराहट और मानसिक दबाव धीरे-धीरे कम हो जाता है और मन शांत महसूस करता है।

 
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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : Adobe stock images
2. दिमाग शांत होता है
 
  • यह तकनीक दिमाग को वर्तमान क्षण पर फोकस करने में मदद करती है।
  •  लगातार सांस पर ध्यान देने से ओवरथिंकिंग और नेगेटिव विचार कम होते हैं। 
  • इससे मानसिक शांति मिलती है और ब्रेन रिलैक्स अवस्था में चला जाता है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी है।


3. हार्ट रेट नियंत्रित होता है
 
  • धीमी और गहरी सांस लेने से शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है, जिससे दिल की धड़कन सामान्य हो जाती है। 
  • यह तकनीक हार्ट रेट को संतुलित करती है और शरीर को “रिलैक्स मोड” में ले जाती है, जिससे नींद आने में आसानी होती है।
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नींद नहीं आए तो क्या करें? - फोटो : adobe stock

4. नींद जल्दी आने में मदद मिलती है
 
  • इस तकनीक के दौरान शरीर धीरे-धीरे रिलैक्स होता है और ब्रेन स्लीप मोड में प्रवेश करता है।
  •  इससे बिस्तर पर लेटते ही लंबे समय तक करवटें बदलने की समस्या कम होती है और व्यक्ति कुछ ही मिनटों में नींद महसूस करने लगता है।


5. अनिद्रा में राहत मिलती है
 
  • जो लोग लंबे समय से नींद की समस्या से परेशान हैं, उनके लिए यह तकनीक काफी फायदेमंद हो सकती है। 
  • नियमित अभ्यास करने से स्लीप साइकिल बेहतर होती है और नींद की गुणवत्ता भी सुधरती है।
  •  यह बिना दवा के प्राकृतिक रूप से नींद सुधारने में मदद करती है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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