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बोन हेल्थ: थायरॉइड से लेकर डायबिटीज तक, हड्डियों की सेहत पर कैसे पड़ता है इन बीमारियों का असर?

Tue, 20 Oct 2026 05:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Bone Problem: थायरॉइड, डायबिटीज, आंतों की कुछ बीमारियां और क्रोनिक किडनी डिजीज भी हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। इन स्थितियों में हड्डियों का घनत्व कम होने या फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। 
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हड्डियों की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
अगर आपसे कोई पूछे कि हड्डियां कमजोर क्यों होती हैं, कैसे लोगों को कम उम्र में ही गठिया की समस्या बढ़ती जा रही है? तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा कैल्शियम की कमी। इसके अलावा जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें भी हड्डियों से संबंधित समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। पर क्या सिर्फ यही दो कारण जिम्मेदार हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हड्डियों की कमजोरी को अक्सर बढ़ती उम्र या शरीर में कैल्शियम की कमी से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ बीमारियां भी हड्डियों को अंदर से कमजोर कर सकती हैं? कई बार आप हड्डियों की समस्याओं को ठीक करने के लिए तमाम कोशिश करते रहते हैं पर इसका जड़ असल में किसी दूसरी बीमारी में छिपा हो सकता है। कुछ मामलों में ये ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ा सकती है।

क्या आप जानते हैं कि कौन-कौन सी बीमारियां हड्डियों की सेहत पर असर डाल सकती हैं?
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थायरॉइड के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepil.com
ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों का घनत्व और उनकी मजबूती कम होने लगती है, इससे फ्रैक्चर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसमें शुरुआती चरणों में आमतौर पर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए केवल दर्द के आधार पर हड्डियों की समस्याओं का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि थायरॉइड, डायबिटीज और पाचन तंत्र की कुछ बीमारियां भी हड्डियों के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

थायरॉइड की समस्या
 
  • हाइपरथायरॉइडिज्म की स्थिति जिसमें थायरॉइड हार्मोन ज्यादा बनने लगता है, इससे हड्डियों के ब्रेकडाउन और दोबारा बनने की प्रक्रिया का संतुलन बिगड़ सकता है। लंबे समय तक हाइपरथायरॉइडिज्म की समस्या बने रहने पर हड्डियों का घनत्व घटने लगता है और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ सकता है।
  • यही कारण है कि थायरॉइड के मरीजों को अपनी हड्डियों को स्वस्थ रखने पर भी ध्यान देते रहना चाहिए।
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डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज की बीमारी

डायबिटीज की समस्या विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। टाइप-2 डायबिटीज में भी कुछ लोगों को हड्डियों का घनत्व सामान्य होने के बावजूद फ्रैक्चर का अधिक जोखिम हो सकता है। इसके अलावा ये आंखों या नसों से जुड़ी समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।
 
  • खून में शुगर की मात्रा अधिक होने पर एडवांस्ड ग्लाइकेशन एंड प्रोडक्ट्स नामक तत्व हड्डियों के कोलेजन प्रोटीन में जमा हो जाते हैं, जिससे हड्डियां सख्त और कमजोर हो जाती हैं।
  • इसी तरह अक्सर बढ़ा हुआ शुगर लेवल हड्डी के पुनर्निर्माण यानी नई हड्डियों के बनने और पुरानी हड्डियों की मरम्मत की प्रक्रिया को भी धीमा कर देता है। जिससे समय से साथ हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
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आर्थराइटिस का खतरा - फोटो : Adobe Stock
इन बीमारियों का भी हड्डियों पर होता है असर
 
  • रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों में सूजन पैदा करती है। लगातार सूजन, शारीरिक गतिविधि में कमी और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल हड्डियों के कमजोर कर देती है।
  • सीलिएक डिजीज और क्रोहन डिजीज जैसी स्थितियों में कैल्शियम और विटामिन-डी सहित कई पोषक तत्वों का अवशोषण प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक पोषण की कमी रहने से हड्डियों की मजबूती घट सकती है। 
  • लंबे समय तक किडनी की बीमारी रहने पर कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन-डी का संतुलन बिगड़ जाता है। इससे हड्डियों और खनिजों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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