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महज कुछ ही घंटों में फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है कोरोना वायरस, अध्ययन में हुआ खुलासा

Mon, 01 Feb 2021 05:16 PM IST
प्रकाश चंद जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस महामारी ने हर किसी को अपनी सेहत के प्रति काफी चिंतित करके रखा है। कोई कोरोना की चपेट में न आ जाए, इसको लेकर इम्यूनिटी का काफी ख्याल रखा जा रहा है। हालांकि, भारत समेत विश्व के कई देशों ने कोरोना को मात देने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण की प्रक्रिया को भी शुरू कर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोरोना हमारे फेफड़ों को भी महज कुछ ही घंटो में बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है? शायद नहीं, तो यहां आपको बता दें कि कई ऐसे अध्ययन किए गए हैं जिनमें इस बात को बल मिलता हुआ नजर आता है। वहीं, इसके लिए मौजूदा 18 दवाओं के इस्तेमाल से इसमें मदद मिल सकती है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
दरअसल, अमेरिका के बोस्टरन विश्वविद्यालय समेत कई वैज्ञानिकों ने अध्ययन किए और अपने विश्लेषण में इन सभी ने पाया कि अमेरिकी खाद्य एंव औषधि प्रशासन यानी एडीए द्वारा मंजूर की गई 18 मौजूदा दवाओं का इस्तेमाल कोरोना वायरस के खिलाफ किया जा सकता है। जिस तरह कोरोना वायरस कुछ ही घंटों में हमारे फेफड़ों पर हमला बोल सकता है, उसको लेकर उन्होंने कहा कि इनमें से पांच दवाइयां मानव फेफड़ों की कोशिकाओं में कोरोना वायरस का प्रसार 90 फीसदी तक कम कर सकती है। ये अध्ययन अच्छा संकेत देता हुआ नजर आता है कि फेफड़ों को कोरोना वायरस की मार से बचाया जा सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ये अनुसंधान 'मोलेक्युलर सेल' नाम की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। इसमें शामिल वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित किए गए मानव फेफड़ों की हजारों कोशिकाओं को एक साथ संक्रमित किया और इनकी गतिविधियों को देखा। इस पर उन्होंने कहा कि, ये कोशिकाएं शरीर की कोशिकाओं से एकदम समान नहीं होती लेकिन उनसे मिलती-जुलती होती हैं। बोस्टर विश्वविद्यालय में वायरस वैज्ञानिक एवं अनुसंधान के सह लेखक एल्के मुहलबर्गर ने कहा कि, इस अनुसंधान में विषाणु के फेफड़ों की कोशिकाओं को संक्रमित करने के एक घंटे बाद से नजर रखी गई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
एल्के मुहलबर्गर ने कहा कि, ये देखना काफी डरावना था कि संक्रमण के शुरुआत में ही विषाणु ने कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। विषाणु अपनी प्रतिलिपियां तो नहीं बना सकता है तो इसलिए वो कोशिकाओं के तंत्र के जरिए अपनी आनुवंशिक सामग्री की प्रतियां बनाता है। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि जब एसएआएस-सीओवी-2 सक्रमण होता है तो ये कोशिका की मेटाबोलिक प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल देता है। विषाणु संक्रमण के तीन से छह घंटे में ही कोशिका की आणविक झिल्ली यानी मेम्ब्रेंस को भी क्षतिग्रस्त कर देता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस की शुरुआत से लेकर ही इस बात को कहा गया कि जो लोग पहले से कई बीमारियों से ग्रसित हैं, वो लोग जल्दी कोरोना की चपेट में आ सकते हैं। वहीं, इसके बाद कोरोना का फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने की बात सामने आना सभी के लिए चिंता की बात है। लेकिन जिस तरह इस अध्ययन में बताया गया है कि कुछ दवाइयां इसमें मदद पहुंचाने में 90 फीसदी तक मदद कर सकती है, वो शुभ संकेत हैं।
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