शरीर अपनी रक्षा खुद ही कर लेता है, ये प्रक्रिया निरंतर चलती भी रहती है भले ही हमें इसका एहसास न हो। बुखार होना, उल्टी आना, छींक आना, चोट के बाद सूजन होना या सिर्फ स्ट्रेस होना इसका सबसे आम उदाहरण है। हालांकि जब ये स्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो आपको सावधान भी हो जाना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन प्रक्रियाओं में स्ट्रेस यानी तनाव का लंबे समय तक बने रहना आपके लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां या भविष्य की चिंता, जिंदगी में तनाव बढ़ने की वजहें कम नहीं हैं। कई बार ट्रैफिक में फंस जाना, ऑफिस की डेडलाइन या रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां भी हमें तनाव में डाल देती हैं। अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यही तनाव लंबे समय तक बना रहे तो पूरे शरीर पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है।
अक्सर तनाव में रहना आपको जानलेवा बीमारियों का शिकार भी बना सकता है।