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Health Alert: स्ट्रेस के दौरान शरीर में क्या होता है, तनाव कब बन जाता है खतरनाक? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Tue, 24 Mar 2026 07:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लगातार तनाव शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। शुरुआत में तनाव इम्यून सिस्टम को थोड़े समय के लिए सक्रिय कर सकता है, जिससे शरीर संक्रमण से लड़ने और घाव भरने में मदद करता है।
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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Freepik.com
शरीर अपनी रक्षा खुद ही कर लेता है, ये प्रक्रिया निरंतर चलती भी रहती है भले ही हमें इसका एहसास न हो। बुखार होना, उल्टी आना, छींक आना, चोट के बाद सूजन होना या सिर्फ स्ट्रेस होना इसका सबसे आम उदाहरण है। हालांकि जब ये स्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो आपको सावधान भी हो जाना चाहिए। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन प्रक्रियाओं में स्ट्रेस यानी तनाव का लंबे समय तक बने रहना आपके लिए दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां या भविष्य की चिंता, जिंदगी में तनाव बढ़ने की वजहें कम नहीं हैं। कई बार ट्रैफिक में फंस जाना, ऑफिस की डेडलाइन या रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां भी हमें तनाव में डाल देती हैं। अक्सर हम इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यही तनाव लंबे समय तक बना रहे तो पूरे शरीर पर इसका नकारात्मक असर हो सकता है।

अक्सर तनाव में रहना आपको जानलेवा बीमारियों का शिकार भी बना सकता है।
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स्ट्रेस होने से क्या दिक्कतें होती है? - फोटो : Adobe stock photos
तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, वैसे तो तनाव हमारे शरीर की एक सामान्य प्रतिक्रिया है, जब हम किसी दबाव या मुश्किल का सामना करते हैं तो तनाव महसूस होता है।
 
  • इस दौरान दिमाग का हिस्सा हाइपोथैलेमस शरीर को संकेत देता है।
  • ये हमारे शरीर को फाइट या फ्लाइट मोड में डाल देता है। इससे शरीर में तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल रिलीज होने लगता हैं। 
  • इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है, सांसें तेज चलने लगती हैं और शरीर किसी खतरे से निपटने के लिए तैयार हो जाता है।

यहां तक तो सब ठीक है पर अगर आपको लगातार स्ट्रेस बना रहता है और इस दौरान रिलीज होने वाले कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर अधिक हो जाता है तो ये समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती है।
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लगातार तनाव में रहने से क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe stock
लगातार तनाव में रहने के नुकसान

हार्वर्ड मेडिकल ऑफ स्कूल के मुताबिक लगातार तनाव में रहने से दिल, पाचन तंत्र और नींद पर असर पड़ सकता है, साथ ही शरीर का इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो सकता है।
 
  • लगातार बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। 
  • इसी तरह, तनाव के कारण धड़कन तेज होने, नींद में कमी, पाचन में गड़बड़ी और सिरदर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।
  • अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि लंबे समय तक मानसिक तनाव हृदय रोग, स्ट्रोक और मानसिक विकारों का जोखिम बढ़ा सकता है।

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इम्युनिटी कमजोर होने से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
बार-बार होने लगती हैं बीमारियां

लगातार तनाव शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है। शुरुआत में तनाव इम्यून सिस्टम को थोड़े समय के लिए सक्रिय कर सकता है, जिससे शरीर संक्रमण से लड़ने और घाव भरने में मदद करता है। लेकिन लंबे समय तक रहने पर यह संक्रमण से लड़ने की ताकत कम कर देता है।

ऐसे लोगों को सर्दी-जुकाम, फ्लू जैसे संक्रमण जल्दी होते हैं। साथ ही बीमारी या चोट से उबरने में भी सामान्य से अधिक समय लग सकता है।
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मानसिक तनाव के कारण क्या-क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe Stock
लगातार तनाव में रहने के इन दुष्प्रभावों को भी जान लीजिए

जो लोग लगातार तनाव में रहते हैं, उनके शरीर की लगभग हर प्रणाली प्रभावित होती है। 
  • तनाव मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस हिस्से को प्रभावित करता है, जिससे याददाश्त और सीखने की क्षमता कमजोर होने लगती है। 
  • लंबे समय तक तनाव में रहने से ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है।
  • इसका पाचन तंत्र पर भी गहरा असर पड़ता है। तनाव के कारण गैस, कब्ज, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  • तनाव कई क्रॉनिक बीमारियों का भी कारण बन सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग और मोटापा जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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