फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हार्ट अटैक से लेकर कैंसर और ब्रेन ट्यूमर तक, इंसानों के लिए वरदान हैं जानवरों के जहर से बनी दवाएं

Mon, 18 May 2020 09:37 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 17
जहर से बनने वाली दवाएं कई बीमारियों में इंसान की जान बचाती है - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
जब तक मेडिकल साइंस का आविष्कार नहीं हुआ था, इंसान पेड़-पौधों और जड़ी बूटियों से ही इलाज करता था। निएंडरथल्स मानवों ने भी चिनार के पेड़ की छाल का इस्तेमाल दर्द निवारक के रूप में किया था। जानवरों का भी उनके औषधीय गुणों के लिए शोषण किया जाता रहा है।

मिसाल के लिए चीन की पारंपरिक चिकित्सा (TCM) में जानवरों की 36 तरह की प्रजातियों का इस्तेमाल होता रहा है। इसमें भालू, गैंडे, बाघ और समुद्री घोड़े तक शामिल हैं। इनमें से कई तो अब खत्म होने के कगार पर हैं। अभी पैंगोलिन को कोविड-19 के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। लेकिन हाल के कुछ समय तक चीन में पारंपरिक चिकित्सा के लिए पैंगोलिन पालन होता था।
विज्ञापन

2 of 17
सांप - फोटो : Pixabay
आयुर्वेदिक चिकित्सा में गठिया के इलाज के लिए सांप के जहर का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह, अफ्रीका, दक्षिणी अमेरिका और एशिया में टेरेंटुला नाम की जहरीली मकड़ी का इस्तेमाल कई तरह की बीमारियां ठीक करने में किया जाता है। इसमें दांत का दर्द और कैंसर जैसे मर्ज भी शामिल हैं।
विज्ञापन

3 of 17
दुनिया कोरोना वायरस के कारण फैली महामारी से जूझ रही है(File Photo) - फोटो : PTI
हालांकि इन पारंपरिक उपचारों के समर्थन में कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है। इसी हफ्ते वैज्ञानिकों ने खबरदार भी किया है कि अगर जंगली जानवरों का शोषण अभी भी बंद नहीं किया गया तो भविष्य में और भी कई महामारियों का सामना करना पड़ सकता है।

4 of 17
चमगादड़ भी बीमारियां फैलाते हैं - फोटो : Pixabay
इंसान हजारों वर्षों से पेड़ पौधों से दवाएं बनाता रहा है। लेकिन जानवरों के संदर्भ में ऐसा करना जरा मुश्किल है। लेकिन तकनीक की मदद से इस काम को भी आसान बना लिया जाएगा। बहुत-सी बीमारियां इंसान को जानवरों से मिल रही हैं तो इनका इलाज भी उन्हीं की मदद से किया जाएगा।
विज्ञापन

5 of 17
कुछ दवा बनाने में मकड़ी का प्रयोग किया जाता है - फोटो : Pixabay
हमें शुक्रगुजार होना चाहिए क्रमिक विकास का, जिसकी वजह से हमें जानवरों में ऐसे अणु मिल जाते हैं। जो इंसान के शरीर में भी पाए जाते हैं। इन अणुओं को 'पेप्टाइड्स' कहते हैं। घोंघे और मकड़ियों से लेकर सैलामैंडर और सांपों तक में ये पेप्टाइड्स मिल जाते हैं।
विज्ञापन

6 of 17
कई गांवों में पुराने पेड़ों पर बड़ी संख्या में चमगादड़ दिख जाते हैं
पेप्टाइड्स प्रोटीन के रूप में ही होते हैं लेकिन बहुत छोटी श्रृंखला में। इन्हें हम 'मिनी प्रोटीन' कह सकते हैं। चूंकि वो एस्पिरिन जैसी दवाओं की तुलना में 10 से 40 गुना बड़े होते हैं। इसलिए, वो अपने टारगेट पर सक्रियता से काम करते हैं। इनके साइड इफेक्ट भी नहीं होते। तकनीक की मदद से आज वैज्ञानिक बहुत आसानी से पता लगा सकते हैं कि किस जानवर के कौन से अणु से दवा बनाई जा सकती है।
विज्ञापन

7 of 17
क्या आप जानते हैं कि घोंघे के जहर से भी दवा बनती है?
बाजार में आज ऐसी सैकड़ों दवाएं मौजूद हैं, जो जानवरों के जहर से ही तैयार की गई हैं। मिसाल के लिए टाइप-2 शुगर के मरीजों की दी जाने वाली दवा एनैक्सेटाइड गिला मॉन्सटर की लार से तैयार होती है। पुराने दर्द में आराम के लिए जिकोनिटाइड दवा दी जाती है। ये दवा घोंघे के जहर से तैयार होती है।

8 of 17
सभी पशुओं के पास दुर्लभ जहर नहीं होता - फोटो : Pixabay
जानवरों के अणुओं से बनने वाली सभी दवाओं में उनका जहर शामिल होता है। लेकिन सभी पशुओं के पास दुर्लभ प्रकार का जहर नहीं होता। ये केवल 2 लाख 20 हजार प्रजातियों में ही पाया जाता है। जो धरती पर पाए जाने वाली जीवों की प्रजातियों का 15 फीसदी है।

9 of 17
हार्ट अटैक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
हार्ट अटैक के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा मौत स्ट्रोक से होती हैं। हर साल करीब 60 लाख लोग इसी बीमारी से मरते हैं। 50 लाख लोग ब्रेन डेड होकर बिस्तर पर पड़े रहते हैं। ऐसे लोगों को खतरनाक जहर वाली दवाएं दी जाती हैं। ऐसे मरीजों के लिए बहुत ज्यादा दवाएं अभी तक नहीं हैं। टिशू प्लासमीनो एक्टिवेटर ही ऐसी दवा है, जिसे अमेरिकी एफडीए से मान्यता मिली हुई है।

10 of 17
बिच्छू(प्रतीकात्मक तस्वीर)
बायोकेमिस्ट ग्लेन किंग दुनिया के सबसे बड़े भौतिक संग्रह के साथ काम करते हैं। यहां ऐसे 700 तरह के रीढ़ विहीन जीवों के जहर के नमूने से लिए गए पेप्टाइड्स हैं, जिसमें बिच्छू, मकड़ी, खतरनाक कीड़े और गोजर शामिल हैं। स्ट्रोक ठीक करने के लिए उन्हें यहां महज एक ही अणु मिला जिसका नाम है Hi1a। ये ऐसे खतरनाक जहर का अणु है, जो ऑस्ट्रेलियाई फेनेल वेब स्पाइडर हाइड्रोनिक इनफेन्सा से लिया गया है।

11 of 17
ब्रेन स्ट्रोक(प्रतीकात्मक तस्वीर)
किंग कहते हैं ये दुनिया का सबसे जटिल रासायनिक नुस्खा है। वो कहते हैं कि अगर स्ट्रोक के 8 घंटे बाद इस दवा की एक छोटी-सी भी खुराक मरीज को दी जाए तो बड़े पैमाने पर दिमाग को नुकसान पहुंचने से बचाया जा सकता है। और अगर चार घंटे बाद ही दे दी जाए तो 90 फीसद तक नुकसान रोका जा सकता है।

12 of 17
दुनिया में मकड़ियों की एक लाख से ज्यादा प्रजातियां हैं - फोटो : Social media
इस दवा के साइट इफेक्ट भी नहीं के बराबर हैं। ग्लेन किंग कहते हैं कि हर जहर उतना जहरीला नहीं होता, जितना हम समझते हैं। मिसाल के लिए दुनिया में मकड़ियों की एक लाख से ज्यादा प्रजातियां हैं। लेकिन इनमें से मुठ्ठी भर ही इंसान को नुकसान पहुंचाने वाली हैं।

13 of 17
कैंसर का इलाज जटिल होता है
टोज्युलेरिस्टाइड एक ऐसी दवा है जिससे दिमाग में कैंसर के ट्यूमर को आसानी से देखा जा सकता है। इसे बिच्छू के जहर से तैयार किया गया है। ये सिर्फ दिमाग के ट्यूमर की पहचान के लिए ही इस्तेमाल की जाने वाली दवा है। लेकिन अब ब्रेस्ट कैंसर और स्पाइन कैंसर की पहचान के लिए भी इस पर रिसर्च की जा रही है।

14 of 17
स्किन कैंसर भी गंभीर बीमारी होती है
इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्चर मारिया ने अपनी रिसर्च में पाया है कि ब्राजील के टैरंटुला अकेंथोस्क्युरा गोमेसियाना के जहर से लिया गया पेप्टाइड स्किन कैंसर के सेल को खत्म कर सकता है। इसी तरह ऑस्ट्रेलियाई फेनेल वेब स्पाइडर एच इनफेन्सा के जहर से भी स्किन कैंसर के सेल खत्म किए जा सकते हैं।

15 of 17
दवाओं में इस्तेमाल होने वाले जहर का बड़ा हिस्सा सांप से आता है
रिसर्चर मारिया का कहना है कि मेलानोमा नाम के स्किन कैंसर में ये बहुत कारगर है। ब्रिटेन में ये पांचवें नंबर की बड़ी बीमारी है और दुनिया में हर साल एक लाख 32 हजार लोग इस बीमारी का शिकार होते हैं। दवाओं में जो जहर इस्तेमाल किया जाता है, उसका बड़ा हिस्सा सांप से आता है।

16 of 17
सांप सबसे ज्यादा जहर का उत्पादन करता है
धरती पर सांप ही ऐसा जीव है, जो सबसे ज्यादा जहर का उत्पादन करता है। लेकिन जो जानवर कम जहर पैदा करते हैं, उनके विष का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। मकड़ी एक दिन में 10 मिलीलीटर जहर पैदा करती है। बिच्छू सिर्फ दो मिलीलीटर जहर बनाता है। लेकिन रिसर्चर इनके जहर से भी काम के अणु निकाल कर इस्तेमाल कर रहे हैं।
विज्ञापन

17 of 17
कोविड-19 (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
पशुओं के पेप्टाइड में कई तरह की ऑटो इम्यून बीमारियां और दर्द ठीक करने की क्षमता है। अब वैज्ञानिक जानवरों के बायोलॉजिकल मूल्यों का इस्तेमाल कोविड-19 जैसी महामारियों का इलाज तलाशने में भी कर रहे हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें