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आई डिजीज: महिलाओं में मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ जाती है ड्राई आइज की समस्या? यहां जानिए

Sun, 11 Oct 2026 10:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव कुछ महिलाओं में आंखों के सूखापन, जलन और किरकिरापन जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। डायबिटीज जैसी स्थितियां आंखों की सेहत को और भी प्रभावित करने वाली मानी जाती हैं।
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का वह समय होता है, जब मासिक धर्म पूरी तरह से बंद हो जाता है। ये प्राकृतिक बदलाव है, आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होने वाली इस अवस्था में लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आते। इस दौरान एस्ट्रोजन सहित दूसरे हार्मोन का स्तर बदलता है, जिससे हड्डियों में कमजोरी, वजन बढ़ने, नींद में परेशानी और अचानक गर्मी महसूस होने जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि मेनोपॉज के बाद शरीर का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा प्रभावित होता है?

मेनोपॉज की बात होने पर सबसे पहले हमारे दिमाग में हड्डियों की कमजोरी की बात आती है, पर क्या आप जानते हैं कि रजोनिवृत्ति का महिलाओं की आंखों पर भी असर हो सकता है। 50 की उम्र के बाद ज्यादातर महिलाओं में ड्राई आइज की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि इस तरह की दिक्कतें क्यों होती हैं?
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महिलाओं में आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
 मेनोपॉज में आंखों में सूखपान क्यों बढ़ जाता है?

 मेनोपॉज की अवस्था में शरीर में हार्मोनल बदलाव होने लगते हैं। इससे आंखों की सतह और आंसुओं की परत भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे आंखों में सूखापन, जलन, लालिमा, खुजली और किरकिरापन महसूस हो सकता है। 
 
  • कभी-कभी आंखों से ज्यादा पानी भी आने लगता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी महिलाओं को मेनोपॉज के बाद आंखों की सेहत को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
  • लंबे समय तक स्क्रीन देखना, एसी की सीधी हवा और कुछ दवाएं इन समस्याओं को बढ़ा सकती हैं।
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मोतियाबिंद और आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का भी खतरा

उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद और ग्लूकोमा का जोखिम भी बढ़ जाता है। मोतियाबिंद में आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला हो जाता है, जबकि ग्लूकोमा में ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, मेनोपॉज सीधे इन बीमारियों का कारण नहीं बनता है, पर हार्मोनल समस्याओं के कारण आंखों की समस्याएं बढ़ सकती हैं।
 
  • जिन लोगों के पारिवारिक में इन बीमारियों की हिस्ट्री रही है या फिर डायबिटीज की दिक्कत रही है, ऐसे लोगों के लिए नियमित आंखों की जांच जरूरी है।
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आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
 
  • हर 20 मिनट में 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें।
  • स्क्रीन देखते समय पलकें झपकाएं और बीच-बीच में ब्रेक लें।
  • एसी या पंखे की सीधी हवा आंखों पर पड़ने से बचाएं।
  • आंखों में ड्रानेस होने पर डॉक्टर की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करें।
  • हरी सब्जियां, फल और मेवे खाएं तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
  • धूम्रपान से बचें और यूवी सुरक्षा वाले चश्मे पहनें।

मेनोपॉज के दौरान डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर होने पर नियमित रूप से आंखों की जांच कराते रहें। आंखों की समस्याओं की समय रहते पहचान और इलाज होने से बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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