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कोविड से ठीक हुए हैं तो इतने समय बाद लें वैक्सीन, छोटी सी चूक पड़ सकती है भारी

Fri, 14 May 2021 12:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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टीकाकरण के नियमों को जान लें - फोटो : Social media
सरकार ने कोरोना संक्रमण की रफ्तार को काबू करने के लिए देशभर में टीकाकरण अभियान को तेज कर दिया है। एक आंकड़े के मुताबिक 17.7 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोवीशील्ड या कोवैक्सीन का डोज लगाया जा चुका है, उनमें से 3.9 करोड़ लोगों को दूसरी डोज भी मिल चुकी है। हालांकि अब भी लोगों के मन में टीकाकरण को लेकर कई तरह के सवाल हैं। ऐसा ही एक सवाल है कि जिन लोगों को एक बार कोविड का संक्रमण हो चुका है उन्हें कितने दिनों बाद टीकाकरण करना चाहिए? इसके समय को लेकर लोगों में मन में कई तरह के सवाल हैं। इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि कोरोना संक्रमितों के लिए वैक्सीनेशन का सही समय क्या है? साथ ही अन्य कई परिस्थितियों में कितने दिनों के अंतराल पर टीकाकरण कराना चाहिए?
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कोविड-19 से संक्रमित रह चुके लोग 90 दिनों बाद कराएं टीकाकरण - फोटो : पीटीआई
एनटीएजीआई ने टीकाकरण को लेकर दिए हैं सुझाव
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) ने हाल ही में सरकार को कोविशील्ड वैक्सीन की दो खुराक के बीच 12-16 हफ्ते का अंतराल रखने का सुझाव दिया था, जिसे मंजूर कर लिया गया है। इस पैनल ने कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के टीकाकरण को लेकर भी सुझाव दिया है। सुझाव में कहा गया है कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित रह चुके हैं उन्हें रिकवरी के बाद छह महीने तक टीकाकरण नहीं कराना चाहिए।
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एनटीएजीआई ने टीकाकरण को लेकर दिए हैं सुझाव - फोटो : iStock
स्थिति 1: एक डोज लेने के बाद संक्रमित हो चुके लोग कब कराएं वैक्सीनेशन?
पैनल के विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि जिन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी हो और दूसरी डोज से पहले संक्रमित हो गए हों, ऐसे लोगों को संक्रमण से ठीक होने के चार से आठ सप्ताह बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को किसी अन्य गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने या आईसीयू की जरूरत पड़ी हो, ऐसे लोगों को दूसरी डोज लेने से पहले चार से आठ सप्ताह तक इंतजार करना चाहिए। 
 

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शरीर में बनी इम्यूनिटी के कुछ महीनों तक बनी रहती है - फोटो : सोशल मीडिया
स्थिति 2: यदि वैक्सीन नहीं लगी है और संक्रमण से ठीक हो चुके हैं-
इस बारे में सेंटर फोर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि जिन लोगों को पहले वैक्सीन नहीं लगी है और वह कोरोना संक्रमण से ठीक होकर लौट चुके हैं उन्हें संक्रमण वाले दिन से 90 दिनों के बाद ही टीकाकरण कराना चाहिए। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) में प्रतिरक्षा वैज्ञानिक डॉक्टर विनीता बल का कहती हैं कि संक्रमण के बाद शरीर में बनी इम्यूनिटी कुछ महीनों तक सक्रिय रहती है, ऐसे में ठीक होने के 6-8 सप्ताह के बाद ही ऐसे लोगों को वैक्सीनेशन कराना चाहिए।
 
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वैक्सीन नहीं मिल रही है तो घबराएं नहीं - फोटो : iStock
स्थिति 3: पहली डोज ले चुके हैं लेकिन दूसरी उपलब्ध नहीं है-
यदि आपने वैक्सीन की पहली खुराक ले ली है और संक्रमण से सुरक्षित हैं, लेकिन अनुपलब्धता के कारण दूसरी खुराक नहीं मिल पा रही है तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। यदि आपने कोवैक्सिन की खुराक ली है तो दूसरी खुराक के तय समय से 45 दिनों बाद तक टीकाकरण करा सकते हैं। यदि आपने पहली खुराक कोविशील्ड की ली है पहली डोज के तीन महीने बाद तक दूसरी खुराक ली जा सकती है।
 
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टीकाकरण के बाद लोगों को महसूस हो रहे हैं इसके साइड-इफेक्ट्स - फोटो : Social media
वैक्सीनेशन के बाद साइड-इफेक्ट्स कैसे कम करें
वैक्सीन लेने के बाद कई लोगों में इसके साइड-इफेक्ट्स के रूप में बुखार, थकान और कमजोरी महसूस होने की शिकायत देखी गई थी। इसे ठीक करने को लेकर दिल्ली में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ रविन्द्र डबास कहते हैं कि वैसे तो यह समस्याएं एक से दो दिनों में स्वत: ठीक हो जाती हैं, फिर भी यदि आपको ज्यादा दिक्कत हो रही हो तो आप पैरासिटामॉल ले सकते हैं। ध्यान रहे, टीकाकरण के बाद कुछ दिनों तक किसी तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
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नोट: यह लेख टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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