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Coronavirus: कोरोना संक्रमण से लेकर सीरो सर्वे तक, डॉ. मधुर से जानें सात जरूरी सवालों के जवाब

Mon, 03 Aug 2020 04:06 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Question Answer - फोटो : Amar Ujala/AIR
कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच बहुत सारे लोग घबराए हुए हैं। इससे संबंधित कई तरह के सवाल लोगों के मन में चलते रहते हैं। जैसे कि कोरोना वायरस से बचने के लिए कौन से मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए? बिना मास्क लगाए कोई सामने आता है तो क्या किया जाए? किसी सतह से संक्रमित होने का कितना खतरा रहता है? अगर आप अनजाने में कोरोना मरीज के संपर्क में आ जाते हैं तो क्या करें? सीरो सर्वे से कोरोना नियंत्रण में किस तरह के फायदे हैं? 
दिल्ली के प्रतिष्ठित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. मधुर यादव ने आकाशवाणी के एक साक्षात्कार कार्यक्रम में ऐसे ही कई सवालों के जवाब दिए हैं। 
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Mask for Coronavirus Cure - फोटो : PTI/Amarujala
कौन से मास्क का प्रयोग करना ज्यादा अच्छा है?
  • बाजार में तीन लेयर का कपड़े का मास्क मिलता है। घर में भी सूती कपड़े से भी मास्क बना सकते हैं और इसे बार-बार धो कर पहन सकते हैं। अगर किसी कंटेनमेंट जोन में जा रहे हैं या किसी संक्रमित के साथ हैं तो N-95 मस्क लगा सकते हैं। ध्यान रहे वॉल्व वाला N-95 मास्क नहीं होना चाहिए। उसका प्रयोग करने से स्वास्थ्य मंत्रालय ने मना किया है। बिना वॉल्व वाला N-95 मास्क इस्तेमाल कर सकते हैं।
 
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कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाए लोग - फोटो : पीटीआई
अगर कोई बिना मास्क लगाए सामने आता है तो क्या करें? 
  • इस वायरस का अबतक कोई निश्चित इलाज और वैक्सीन उपलब्ध हो पाई है। इसलिए खुद की सुरक्षा के साथ दूसरों की सुरक्षा जरूरी है। अगर कोई आपके घर बिना मास्क लगाए आता है, तो उसे घर के अंदर आने से मना करें। बहुत जरूरी है घर आना तो वह मास्क लगाकर आए। कोई भी इसे परेशानी ना समझें। यह सभी की सुरक्षा के लिए है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मास्क पहनने से असहज महसूस होता है, क्या करें?
  • कुछ लोगों को मास्क पहनने से लगता है कि सांस फूल रही है या घबराहट हो रही है। किसी को कान में इसकी डोरी से दर्द होता है। लेकिन अगर इसे सुरक्षा के लिहाज से लगाएंगे तो परेशानी का एहसास नहीं होगा। दोनों तरफ की डोरी या इलास्टिक को पीछे क्लिप से फंसाया जा सकता है। घर में अपने चेहरे की माप के अनुसार भी मास्क तैयार कर सकते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किसी सतह से संक्रमण का कितना खतरा रहता है? 
  • यह निर्भर करता है कि वायरस के ड्रॉपलेट्स किस सरफेस यानी सतह पर गिरे हैं। जैसे किसी सूखी चीज पर गिरे हों तो कुछ घंटे बाद खत्म हो सकते हैं। वहीं गीली सतह पर वायरस चार दिन तक रह सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि वायरस वसा प्रोटीन आदि से बना है। इसलिए साबुन से हाथ धोने पर या खत्म हो जाता है। ध्यान रहे किसी सतह पर वायरस है तो वह केवल आपके हाथों के जरिए ही आपके मुंह तक पहुंच सकता है। इसलिए हाथ धोते रहें। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pexels
अगर अनजाने में कोई कोरोना मरीज के संपर्क में आ गया है तो क्या करें? 
  • अगर आप किसी के संपर्क में आए और बाद में पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले खुद को आइसोलेट कर लें। लक्षण आने में पांच से 14 दिन का वक्त लगता है। कई बार लगता है कि बुखार खत्म हो गया तो हम ठीक हो गए, लेकिन ऐसा नहीं है। आपको 14 दिन तक आइसोलेट रहना चाहिए। 
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
कोरोना जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई तकनीक आई है, यह क्या है? 
  • इस्रायल ने भारत के डीआरडीओ के साथ मिलकर एक टेस्टिंग उपकरण तैयार किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करता है। इसमें अगर कोई कोरोना जांच कराने के लिए आता है तो उसकी नाक या मुंह से उसका स्पूटम(Sputum) सैंपल लेते हैं और वॉइस रिकॉर्डिंग करते हैं। इस टेस्ट में यह चेक करते हैं कि मरीज के अंदर क्या-क्या बदलाव आए हैं। यह टेस्ट 10 मिनट में हो सकता है। इसकी जांच के लिए कई केंद्र हैं। लेडी हार्डिंग अस्पताल में भी इसकी जांच होती है। कोई भी जाकर पंजीकरण करा सकता है।
     

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कोरोना की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
दिल्ली में सीरो सर्वे का दूसरा चरण शुरू हो रहा है, इसके क्या फायदे हैं?
  • सीरो सर्वे एक एंटीबॉडी टेस्टिंग है, जिससे पता चलता है कि किसी व्यक्ति को संक्रमण हुआ है या नहीं। इसमें यह नहीं पता चलता है कि व्यक्ति कब संक्रमित हुआ है, लेकिन पॉजिटिव आने पर यह जरूर सुनिश्चित हो जाता है कि व्यक्ति के अंदर एंटीबॉडी बन चुकी है और वह सुरक्षित है। 
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कोरोना की जांच (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
  • सीरो सर्वे से यह भी पता चलता है कि किसी सोसाइटी में लोग संक्रमित हो चुके हैं या नहीं। जिन लोगों ने इम्यूनिटी बन रही है और जो संक्रमित मरीज एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले हैं, उन लोगों को आइसोलेट किया जाता है ताकि संक्रमण दूसरी जगह नहीं फैले।
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