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अध्ययन: आहार-जीवनशैली में सुधार के बाद भी नहीं कंट्रोल हो रहा है कोलेस्ट्रॉल? लिवर को स्वस्थ रखने के करें उपाय, मिलेगा लाभ

Sun, 12 Jun 2022 06:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोलेस्ट्रॉल की बढ़ती समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वैश्विक स्तर पर हृदय रोग के मामले काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ हाई कोलेस्ट्रॉल को प्रमुख जोखिम कारक मानते हैं। वैसे तो कोलेस्ट्रॉल रक्त में पाया जाने वाला मोमनुमा तत्व होता है जो शरीर में स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक माना जाता है। हालांकि इसकी बढ़ी हुए मात्रा को गंभीर हृदय रोगों के बढ़ने के खतरे को तौर पर देखा जाता है।

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं, जिससे भविष्य में होने वाले हृदय रोगों के खतरे को कम किया जा सके।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का लिवर कमजोर होता है, या जिन्हें लिवर से संबंधित किसी तरह की बीमारी होती है, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने का जोखिम हो सकता है। इसके साथ कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना भी लिवर के लिए समस्याएं बढ़ा सकता है। ऐसे में अगर आप कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए सभी उपाय करके भी लाभ नहीं पा रहे हैं तो अपने लिवर की सेहत पर भी ध्यान दें। आइए जानते हैं कि आखिर लिवर की सेहत का कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से क्या संबंध हो सकता है? कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने के लिए कौन से उपाय करना फायदेमंद हो सकता है?
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कोलेस्ट्रॉल के कारण शरीर हो सकता है प्रभावित - फोटो : istock
पहले कोलेस्ट्रॉल के खतरे के बारे में समझिए 

कोलेस्ट्रॉल मुख्यरूप से दो प्रकार को होता है- गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) और बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल)। सामान्यतौर पर जब भी हाई कोलेस्ट्रॉल की बात की जाती है तो इसका मतलब बैड कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से है। शरीर में एलडीएल की मात्रा की अधिकता के कारण  कोलेस्ट्रॉल धमनियों में जमा होकर उन्हें संकुचित कर सकता है, जिससे अंगों को रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। धमनियों के सिकुड़ने से खून के थक्के जमने का खतरा भी बढ़ जाता है। जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल की समस्या होती है, उन्हें इसे नियंत्रित करने के उपाय करते रहना चाहिए।
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हाई कोलेस्ट्रॉल का लिवर पर असर - फोटो : iStock
कोलेस्ट्रॉल और लिवर का संबंध

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शरीर में बनने वाले कोलेस्ट्रॉल का अधिकतर हिस्सा लिवर द्वारा निर्मित होता है, इसलिए कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते समय इस अंग की सेहत पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। लिवर, कोलेस्ट्रॉल का ब्रेकडाउन भी करता है, ऐसे में यदि आपका लिवर सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो कोलेस्ट्रॉल स्वयं लिवर के साथ शरीर को अन्य हिस्सों को भी क्षति पहुंचा सकता है।

यदि आपके आहार में कोलेस्ट्रॉल वाली चीजों की मात्रा अधिक है तो यह लिवर के आसपास जमकर कई तरह की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इसके कारण नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज होने का जोखिम सबसे अधिक होता है।

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कोलेस्ट्रॉल के कारण लिवर रोग के मामले - फोटो : iStock
लिवर के लिए भी परेशानियां बढ़ा सकता है कोलेस्ट्रॉल

हाई कोलेस्ट्रॉल को मुख्यरूप से हदय रोगों के प्रमुख कारक के तौर पर जाना जाता है, पर अध्ययनों से पता चलता है कि हृदय के साथ-साथ यह लिवर संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा देता है। विशेषकर डायट्री कोलेस्ट्रॉल के अधिक सेवन को विशेषज्ञ लिवर की सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं, इसका अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

उच्च रक्त कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों में नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के साथ-साथ लिवर में सूजन और इसके सामान्य कार्यों में बाधा हो सकती है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डायट्री कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल दोनों पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। 
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कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकने के उपाय जानिए - फोटो : istock
कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?

शोध बताते हैं कि जिन लोगों में एलडीएल की अधिकता की समस्या होती है उन्हें दवा के साथ जीवनशैली में बदलाव और आहार पर ध्यान लेकर लाभ मिल सकता है। ऐसे लोगों को सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाली चीजों का सेवन कम कर देना चाहिए। नियमित व्यायाम के साथ वजन कम करने के तरीके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा एलडीएल बढ़ने की समस्या से परेशान लोगों को लिवर को स्वस्थ रखने वाले उपाय भी करते रहने चाहिए, इससे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकने में मदद मिलती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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