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डॉक्टर्स ने चेताया: बाढ़-जलजमाव के कारण संक्रामक बीमारियों और पीलिया का बढ़ा खतरा, करें बचाव

Thu, 13 Jul 2023 04:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जोखिम - फोटो : istock
राजधानी दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात हैं। इससे न सिर्फ सामाजिक और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा है साथ ही सेहत को लेकर भी गंभीर जोखिम हो सकते हैं। बाढ़-जलजमाव के कारण स्वाभाविक तौर पर मच्छर जनित रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है, पर जोखिम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं।

डॉक्टरों ने चेताया है कि इस तरह की प्रतिकूल परिस्थितियां पेट और श्वसन रोगों को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं। ऐसे में जिन स्थानों पर बाढ़ है, वहां के लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर साल बरसात के दिनों में स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ जाता है, यह संक्रामक रोगों का समय होता है। डेंगू-चिकनगुनिया और मलेरिया जैसी बीमारियों के चलते न सिर्फ बड़ी संख्या में लोग शिकार होते हैं साथ ही हजारों की मौत भी हो जाती है। आइए डॉक्टर से समझते हैं कि बाढ़ की स्थिति किस प्रकार से मानव स्वास्थ्य के लिए समस्याकारक हो सकती है?
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बाढ़ और बीमारियां - फोटो : iStock
बाढ़ के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा

बाढ़ और जलजमाव जैसी स्थितियों के कारण होने वाले खतरों को समझने के लिए हमने दिल्ली स्थित एक अस्पताल में आपातकालीन चिकित्सा विभाग के डॉक्टर निरंजन.एन. सिन्हा से बातचीत की।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बाढ़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूप से मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर स्थिति हो सकती सकती है। केवल बाढ़ से प्रभावित लोगों में ही स्वास्थ्य का खतरा नहीं है, इससे बचाव कार्यों में लगे लोग, स्वास्थ्य देखभालकर्ता और महत्वपूर्ण सेवा प्रदाता भी प्रभावित हो सकते हैं। मच्छर जनित बीमारियों के अलावा डायरिया और पेट से संबंधित समस्याओं का जोखिम इस मौसम में बढ़ जाता है।
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पेट में संक्रमण होने का जोखिम - फोटो : iStock
पेट से संबंधित संक्रमण और पीलिया का जोखिम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बाढ़ के दिनों में पेट से संबंधित संक्रमण और पीलिया जैसी बीमारियों के मामले बढ़ जाते हैं। इसका मुख्य कारण दूषित जल का सेवन हो सकता है। इससे डायरिया, हैजा, टाइफाइड बुखार और लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा भी हो सकता है। लिवर में होने वाले संक्रमण की स्थिति पीलिया का कारण बनती है इसलिए जरूरी है कि हम सभी अपने स्तर पर पेयजल की शुद्धता का ध्यान रखें। पानी को उबालकर ठंडा करें फिर ही इसका सेवन किया जाना चाहिए।

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सांस से संबंधित बीमारियों का खतरा - फोटो : iStock
श्वसन रोग का भी रहता है खतरा

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित हिस्सों में श्वसन संबंधी रोगों का खतरा भी अधिक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि बाढ़ के साथ जहरीले रसायन, कीटनाशक और रोगजनक घरों में आ जाते है। बाढ़ के कम हो जाने के बाद भी सूखे हिस्सों में भी ये जहरीले तत्व रह सकते हैं। जैसे-जैसे स्थान सूखता है, ये हानिकारक तत्व  चलने और सफाई जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों के माध्यम से धूल में बदल जाते हैं और हवा में मिल सकते हैं। इस तरह की दूषित हवा में सांस लेने से ये पदार्थ फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर श्वसन रोगों का खतरा बढ़ा देते हैं।
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स्वच्छ जल का सेवन करें सुनिश्चित - फोटो : istock
कैसे करें सेहत की देखभाल

डॉक्टर निरंजन कहते हैं, इन दिनों चूंकि कई राज्यों में भारी बारिश के कारण हालात गड़बड़ हैं, इसलिए आवश्यक है कि हम सभी बीमारियों से बचाव को लेकर हमेशा प्रयास करते रहें। घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। खान-पान को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतें, सब्जियों-फलों को अच्छे से साफ करके ही सेवन करें। उबालकर ठंडा किया हुआ पानी ही पिएं। मच्छरों से बचाव के उपाय भी बहुत जरूरी हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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