कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने देश के तमाम हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया है। आलम यह है कि अब रोजोना साढ़े तीन लाख से ज्यादा संक्रमित मरीजों के आंकड़े सामने आ रहे हैं। इतना ही नहीं पिछले साल की तुलना में इस बार संक्रमण से मरने वालों की संख्या भी ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के म्यूटेशन और नए स्ट्रेन पहले के अपेक्षाकृत ज्यादा खतरनाक हैं जिसके कारण इस बार संक्रमितों के मामलों में ज्यादा तेजी से उछाल देखने को मिल रहा है।
देश में कोरोना की रफ्तार पर काबू पाने के लिए सरकार ने टीकाकर की रफ्तार भी बढ़ा दी है। हालांकि अब लोगों के मन में सवाल है कि क्या वैक्सीनेशन कराने के बाद भी वें वायरस के नए स्ट्रेनों से सुरक्षित रह सकेंगे? क्या यह वैक्सीन नए स्ट्रेनों पर भी प्रभावी है? आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं।
विज्ञापन
2 of 5
देश में दी जा रही हैं कोवैक्सीन और कोवीशील्ड वैक्सीन
- फोटो : Social Media
देश में दी जा रही है कोरोना की दो वैक्सीन
कोरोना संक्रमण से मुकाबले के लिए देश में दो स्वदेशी वैक्सीन- कोवैक्सीन और कोवीशील्ड को प्रयोग में लाया जा रहा है। सरकार के निर्देशानुसार सभी लोगों को वैक्सीन की दो खुराक लेना अनिवार्य है। पहली खुराक के 28 दिनों बाद दूसरी खुराक दी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार वैक्सीन की पहली खुराक शरीर में एंटीबॉडीज का निर्माण करती है जबकि दूसरी खुराक से इन एंटीबॉडीज को बूस्ट किया जाता है।
विज्ञापन
3 of 5
विशेषज्ञ वैक्सीन को मान रहे हैं काफी असरदार
- फोटो : iStock
क्या वायरस के सभी वैरिएंट्स पर असरदार है वैक्सीन?
इस बारे में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि भारत में बने टीके यूके, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील के साथ भारत में मिले अब तक सभी म्यूटेंट वैरिएंट पर कारगर हैं। पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी ने तमाम वैरिएंट्स पर वैक्सीन की जांच की है। हमें अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
4 of 5
कोरोना के ट्रिपल म्यूटेशन वेरिएंट सामने आ चुके हैं
- फोटो : pixabay
भारत में मिले हैं कोरोना के ट्रिपल म्यूटेशन वाले वैरिएंट्स
भारत में कोरोना के अब तक डबल और ट्रिपल म्यूटेशन वाले वेरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दिल्ली में कोरोना के ट्रिपल म्यूटेशन वाले वैरिएंट्स की पुष्टि हो चुकी है। डबल म्यूटेशन वाले वेरिएंट को अधिक संक्रामक माना जाता है वहीं ट्रिपल म्यूटेशन वाले वेरिएंट को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं।
क्या करोना से ठीक हो चुके लोगों को भी वैक्सीन लगवानी चाहिए?
इस बारे जानने के लिए हमने एम्स में कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत सिंह से बातचीत की। डॉ अजीत सिंह बताते हैं कि जिन लोगों को कोरोना का संक्रमण हो जाता है उनका शरीर खुद ही वायरस के खिलाफ इम्यून रिस्पांस तैयार कर लेता है। ऐसे लोगों के शरीर में स्वत: ही एंटीबॉडीज आ जाती हैं जो उनकी रक्षा करने के लिए काफी होती हैं, लेकिन देखने को मिल रहा है कि ये एंटीबॉडीज दो से तीन महीने के बाद नष्ट हो जाती हैं। इसके अलावा वायरस के नए वैरिएंट्स से सुरक्षित रहने के लिए कोरोना से ठीक हो चुके लोगों के लिए भी वैक्सीनेशन जरूरी है।
----------------------------- नोट: यह लेख आईसीएमआर के निदेशक डॉ. बलराम भार्गव के एक बयान और कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ अजीत सिंह से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।