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Cancer Risk: मोटापा और कैंसर का खतरनाक रिश्ता, विशेषज्ञों से जानिए क्या है इसका कनेक्शन और कैसे करें बचाव

Sat, 12 Jul 2025 06:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा और कैंसर के जोखिम के बीच स्पष्ट संबंध है।
  • इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापा की स्थिति 13 तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ा देती है।
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मोटापा और इससे होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos
Cancer Risk: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह केवल आपके लुक से जुड़ी परेशानी नहीं है? अगर समय रहते बढ़ते वजन-मोटापा को कंट्रोल न कर लिया जाए तो इसका सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है।

मोटापा  के शिकार लोगों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर कैंसर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

जी हां, अगर आप अधिक वजन का शिकार हैं तो सावधान हो जाइए इससे कैंसर होने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) की रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापा 13 तरह के कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। इनमें ब्रेस्ट, लिवर, कोलन, किडनी, पैनक्रियाज, ओवरी, थायरॉइड और पेट का कैंसर प्रमुख हैं।

महिला हों या पुरुष, सभी इसका शिकार हो सकते हैं, इसलिए जरूरी है कि आप कम उम्र से ही अपने वजन को कंट्रोल में रखने के लिए उपाय करते रहें। 
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दुनियाभर में कैंसर के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
मोटापा और कैंसर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापा और कैंसर के जोखिम के बीच स्पष्ट संबंध है। यह मुख्य रूप से विसरल फैट (आंत या पेट की चर्बी) और इसके कारण होने वाली सूजन के कारण होता है। 

एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर में प्रोफेसर करेन बेसन-एंग्क्विस्ट कहती हैं, अत्यधिक विसरल फैट की स्थिति आपके शरीर में होने वाली कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। इसमें यह भी शामिल है कि आपका शरीर इंसुलिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का प्रबंधन कैसे करता है। इन स्थितियों में कोशिकाओं के विभाजन पर भी असर होता है जिसके कारण कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
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कैंसर कोशिकाओं में विभाजन - फोटो : Freepik.com
क्यों बढ़ जाते हैं कैंसर के मामले?

पेट के आसपास बढ़ने वाली चर्बी के कारण शरीर में इंफ्लेमेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है। इंफ्लेमेशन वैसे तो चोट और बीमारी के प्रति शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। उदाहरण के लिए, जब आपको कोई गहरा घाव हो जाता है, तो घाव के आस-पास का हिस्सा लाल हो जाता है और सूज जाता है। शरीर की ये प्रतिक्रिया ऊतकों की मरम्मत करने और उपचार प्रक्रिया में मदद करती हैं।

हालांकि लंबे समय तक या बार-बार होने वाले इंफ्लेमेशन के कारण कोशिकाओं में अनियंत्रित विभाजन और गंभीर समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। 

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मोटापा-अधिक वजन के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freeoik.com
अध्ययनों से क्या पता चला?

इसके अलावा ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित साल 2016 के एक अध्ययन के अनुसार, शरीर का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) जितना अधिक होता है, कैंसर का खतरा उतना बढ़ जाता है, खासकर महिलाओं में ये जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 

मोटापा शरीर में एस्ट्रोजन, इंसुलिन और अन्य हॉर्मोन्स का संतुलन बिगाड़ देता है। फैट टिशू ज्यादा एस्ट्रोजन बनाते हैं, जिससे ब्रेस्ट और एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा अधिक वजन से शरीर में क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन हो सकता है। यह सूजन कोशिकाओं के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है और कैंसर पैदा करने वाले बदलाव ला सकती है।
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वजन कंट्रोल में रखने वाले उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
कम उम्र से ही करें बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, भारत सहित दुनियाभर में मोटापे का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। शोध के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में हर तीन में से एक व्यक्ति मोटापे की श्रेणी में आते हैं। वहीं अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार, हर साल कैंसर के कुल मामलों में लगभग 8% मामले मोटापे से सीधे जुड़े होते हैं।

कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आप अपने वजन को नियंत्रित रखते हैं, तो न सिर्फ आप खुद को फिट रख सकते हैं, बल्कि कई प्रकार के कैंसर से बचाव भी कर सकते हैं। इसलिए आज से ही अपने खानपान और जीवनशैली में बदलाव लाकर कैंसर के खतरे को कम कीजिए।

संतुलित और फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम, मीठा-जंक फूड्स और ट्रांस फैट से परहेज जैसे छोटे-छोटे उपाय आपको वजन घटाने और कैंसर से बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं।




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स्रोत
Obesity and Cancer


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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