सांकेतिक तस्वीर
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बेहद गंभीर स्थिति
बताया जाता है कि छह फीसदी लोग इस वायरस के कारण बेहद गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस स्टेज में इंसान का शरीर वायरस के सामने हार जाता है और गंभीर रूप से बीमार पड़ जता है। इस स्टेज पर फेफड़े का फेल होना, सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम तक हो सकता है। इस स्तर पर रोग प्रतिरोधक शक्ति काबू से बाहर हो जाती है और शरीर को गंभीर क्षति पहुंचाती है। फेफड़ों में सूजन के कारण शरीर को जरूरत के मुताबिक ऑक्सिजन नहीं मिल पाता।
इसका सीधा असर किडनी पर पड़ सकता है जो खून साफ करने का काम करती है, वो काम करना बंद कर सकते हैं। साथ ही आपकी अंतड़ियां भी प्रभावित हो सकती हैं। डॉक्टर भारत पनखानिया कहते हैं, "वायरस के कारण शरीर की सूजन इतनी बढ़ जाती है शरीर के कई ऑर्गन फेल हो जाते हैं जिससे इंसान मर सकता है।" इस स्टेज पर इलाज के लिए ईसीएमओ यानी एक्स्ट्रा कॉर्पोरल मेम्ब्रेन ऑक्सिजनेशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें एक तरह के कृत्रिम फेफड़ों का इस्तेमाल किया जाता है जो शरीर के भीतर का खून बाहर निकाल कर उसे ऑक्सिजनेट कर के वापिस शरीर में डाल देते हैं। लेकिन पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि ये इलाज कारगर ही होगा।