हमारे दिमाग की अरबों तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) हर पल यादों को संजोने, सोचने-समझने, फैसले लेने और शरीर को नियंत्रित करने का काम कर रही हैं। लेकिन अगर इन्हीं कोशिकाओं के भीतर धीरे-धीरे ऐसे विषैले प्रोटीन जमा होने लगें, जो अंततः उन्हें अंदर से खत्म कर दें, तो क्या होगा? यही प्रक्रिया अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (एफटीडी) और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसी गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों की सबसे बड़ी पहेली बनी हुई थी।
वैज्ञानिक लंबे समय से जानते थे कि इन बीमारियों में मस्तिष्क की कोशिकाओं में जहरीले प्रोटीन जमा होते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि ये प्रोटीन आखिर तंत्रिका कोशिकाओं को किस तरह डैमेज करके नष्ट कर देते हैं?
अब इस रहस्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी वैज्ञानिकों के हाथ लगी है। ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है, जिसे 'कैरियोप्टोसिस नाम दिया गया है। शोध के अनुसार, यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब विषैले प्रोटीन तंत्रिका कोशिका के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी उसके नाभिक (न्यूक्लियस) पर हमला करते हैं। नाभिक के नष्ट होने के साथ ही कोशिकाएं अपनी सामान्य कार्यप्रणाली खो देती है और अंततः डेड होने लग जाती हैं।