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Brain Health: ब्रेन सेल्स को मारने वाले 'विषैले प्रोटीन' का खुला राज, अल्जाइमर से लड़ाई में जगी नई उम्मीद

Tue, 21 Jul 2026 05:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है, जिसे 'कैरियोप्टोसिस नाम दिया गया है।
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ब्रेन हेल्थ - फोटो : Freepik.com
हमारे दिमाग की अरबों तंत्रिका कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) हर पल यादों को संजोने, सोचने-समझने, फैसले लेने और शरीर को नियंत्रित करने का काम कर रही हैं। लेकिन अगर इन्हीं कोशिकाओं के भीतर धीरे-धीरे ऐसे विषैले प्रोटीन जमा होने लगें, जो अंततः उन्हें अंदर से खत्म कर दें, तो क्या होगा? यही प्रक्रिया अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया (एफटीडी) और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसी गंभीर न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों की सबसे बड़ी पहेली बनी हुई थी। 

वैज्ञानिक लंबे समय से जानते थे कि इन बीमारियों में मस्तिष्क की कोशिकाओं में जहरीले प्रोटीन जमा होते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि ये प्रोटीन आखिर तंत्रिका कोशिकाओं को किस तरह डैमेज करके नष्ट कर देते हैं?

अब इस रहस्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी वैज्ञानिकों के हाथ लगी है। ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है, जिसे 'कैरियोप्टोसिस नाम दिया गया है। शोध के अनुसार, यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब विषैले प्रोटीन तंत्रिका कोशिका के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से यानी उसके नाभिक (न्यूक्लियस) पर हमला करते हैं। नाभिक के नष्ट होने के साथ ही कोशिकाएं अपनी सामान्य कार्यप्रणाली खो देती है और अंततः डेड होने लग जाती हैं। 
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न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का इलाज होगा आसान - फोटो : Adobe Stock
न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज में होगी आसानी

नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित यह अध्ययन करीब दस वर्षों की लगातार रिसर्च का नतीजा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि इस नई प्रक्रिया को दवाओं के जरिए रोका या धीमा किया जा सके, तो भविष्य में अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और एएलएस जैसी लाइलाज मानी जाने वाली बीमारियों की प्रगति को धीमा करने वाली नई उपचार पद्धतियां विकसित करना संभव हो सकता है।

यह खोज न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के इलाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है।
  • शोधकर्ताओं ने कैरियोप्टोसिस नामक नई कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया की पहचान की है। 
  • जिसके तहत विषैले प्रोटीन कोशिका के नाभिक को नष्ट कर देते हैं और अंततः तंत्रिका कोशिकाएं डेड होने लगती हैं। 

अब तक वैज्ञानिक जानते थे कि अल्जाइमर, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) जैसी बीमारियों में मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर विषैले प्रोटीन जमा होते हैं, लेकिन ये प्रोटीन आखिर कोशिकाओं को किस तरह नष्ट करते हैं, इसका स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया था।
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तंत्रिका कोशिकाओं की प्रक्रिया - फोटो : Freepik.com
समझ में आएगी बीमारी की जैविक प्रक्रिया

नई खोज ने इस महत्वपूर्ण कड़ी से पर्दा उठाया है और बीमारी की जैविक प्रक्रिया को समझने में नई दिशा दी है।
 
  • शोध के अनुसार जब तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर विषैले प्रोटीन लगातार जमा होने लगते हैं तो वे कैरियोप्टोसिस नामक रासायनिक प्रक्रिया को सक्रिय कर देते हैं।
  • इस प्रक्रिया के दौरान कोशिका का नाभिक, जिसमें उसकी पूरी आनुवंशिक जानकारी सुरक्षित रहती है, धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है। इसके बाद नाभिक की बाहरी झिल्ली कमजोर होकर टूट जाती है और अंततः पूरी कोशिका नष्ट हो जाती है। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्जाइमर और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में बड़ी संख्या में न्यूरॉन की मौत के पीछे यही प्रक्रिया एक प्रमुख कारण हो सकती है।



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स्रोत: 
Scientists may have finally found how Alzheimer's kills brain cells


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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