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खरीदने से पहले जान लें: स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? जानिए कब रीडिंग दे सकती है धोखा

Thu, 01 Oct 2026 04:05 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How Accurate Are Smart Watches for Heart Rate: अपने दिल पर नजर रखने के लिए आज-कल लोग कलाई में स्मार्ट वॉच पहनना पसंद करते हैं। ये कितनी सही हार्टबीट बताती है, आइए जानते हैं। 
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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
How Accurate Are Smart Watches for Heart Rate: अपने दिल की धड़कन पर नजर रखने के लिए आजकल लोग कलाई में स्मार्टवॉच पहनना पसंद करते हैं। ये घड़ियां कुछ ही सेकंड में हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन की जानकारी स्क्रीन पर दिखा देती हैं। 

लेकिन सवाल यह है कि स्मार्टवॉच पर दिखाई देने वाली हार्ट रेट की संख्या कितनी सही होती है? क्या घड़ी पर 80 बीट प्रति मिनट दिखने का मतलब वास्तव में दिल भी उसी गति से धड़क रहा है? 

विशेषज्ञों के अनुसार, स्मार्टवॉच हार्ट रेट की निगरानी के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसकी रीडिंग पर कई परिस्थितियों का असर पड़ सकता है। घड़ी कलाई पर सही तरीके से पहनी गई है या नहीं, व्यक्ति आराम में है या व्यायाम कर रहा है, सेंसर का त्वचा से संपर्क कैसा है और घड़ी की तकनीक कितनी बेहतर है इन सभी का असर रीडिंग पर पड़ सकता है। ऐसे में स्मार्टवॉच को फिटनेस मॉनिटर समझना चाहिए, न कि डॉक्टर की जांच का विकल्प।
 
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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
स्मार्टवॉच हार्टबीट कैसे मापती है?

 ज्यादातर स्मार्टवॉच प्रकाश आधारित सेंसर यानी पीपीजी तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। घड़ी का सेंसर त्वचा पर रोशनी डालता है और रक्त के प्रवाह में होने वाले बदलावों को पहचानता है। इन बदलावों का विश्लेषण करके घड़ी दिल की धड़कन यानी प्रति मिनट धड़कनों का अनुमान लगाती है। यही वजह है कि स्मार्टवॉच की हार्ट रेट रीडिंग सीधे दिल के इलेक्ट्रिकल सिग्नल को नहीं मापती, बल्कि रक्त प्रवाह में होने वाले बदलावों के आधार पर हार्ट रेट का अनुमान लगाती है।

 
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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
आराम की स्थिति में कितनी सही होती है रीडिंग?

 जब व्यक्ति आराम की स्थिति में बैठा या लेटा होता है और घड़ी कलाई पर ठीक तरह से लगी होती है, तब स्मार्टवॉच की हार्ट रेट रीडिंग आम तौर पर ज्यादा स्थिर हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग डिवाइस और परिस्थितियों में सटीकता अलग हो सकती है। इसलिए कभी-कभार एक-दो बीट का अंतर देखकर घबराने के बजाय लगातार दिख रहे पैटर्न पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है।

 

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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
  एक्सरसाइज के दौरान क्यों बदल सकती है सटीकता?

 वर्कआउट के दौरान शरीर और कलाई में लगातार हलचल होती है। पसीना भी आता है और घड़ी की स्थिति थोड़ी बदल सकती है। इन परिस्थितियों में सेंसर को रक्त प्रवाह से संबंधित संकेतों को पहचानने में अधिक चुनौती हो सकती है। खासकर तेज और अनियमित गतिविधियों के दौरान स्मार्टवॉच की रीडिंग और वास्तविक हार्ट रेट के बीच अंतर हो सकता है।

 
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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
घड़ी पहनने का तरीका भी महत्वपूर्ण

 स्मार्टवॉच अगर कलाई पर बहुत ढीली है तो सेंसर और त्वचा के बीच सही संपर्क नहीं बन पाएगा। वहीं बहुत ज्यादा कसकर पहनने पर भी असुविधा हो सकती है। आम तौर पर सेंसर का त्वचा से उचित संपर्क होना जरूरी है ताकि डिवाइस बेहतर रीडिंग दे सके। इसलिए हार्ट रेट जांचते समय घड़ी को निर्माता के निर्देशों के अनुसार पहनना महत्वपूर्ण है।

 
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स्मार्टवॉच से हार्टबीट नापना कितना सही? - फोटो : AI
क्या स्मार्टवॉच दिल की बीमारी पहचान सकती है?

 स्मार्टवॉच कुछ स्वास्थ्य संकेतों की निगरानी में मदद कर सकती है, लेकिन केवल उसकी हार्ट रेट रीडिंग के आधार पर किसी हृदय रोग का निदान नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को बार-बार असामान्य हार्ट रेट दिखाई देता है या इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, चक्कर, बेहोशी या दिल की धड़कन अनियमित महसूस होने जैसे लक्षण हैं, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

 हमेशा याद रखें ये बात

 स्मार्टवॉच की हार्ट रेट रीडिंग उपयोगी संकेत दे सकती है, लेकिन यह डॉक्टर की जांच या चिकित्सकीय उपकरण का विकल्प नहीं है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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