डेंगू, मच्छर और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों के जनक मच्छर एक और ऐसी बीमारी फैलाते हैं जो न सिर्फ व्यक्ति को शारीरिक रूप से बीमार बनाती है बल्कि मानसिक रूप से भी रोगी को काफी आहत करती है। इस बीमारी का नाम एलीफेंटिटिस है।यह बीमारी एक परजीवी के कारण फैलती है जो कि मच्छर के काटने से शरीर के अंदर प्रवेश करता है। इस बीमारी से मरीज के पैर हाथी के पैरों की तरह फूल जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ घरेलू उपाय जो आपको इस बीमारी से राहत पहुंचा सकते हैं।
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इस बीमारी को एलीफेंटिटिस को लसीका फाइलेरिया भी कहा जाता है क्योंकि फाइलेरिया शरीर की लसिका प्रणाली को प्रभावित करता है। यह रोग मनुष्यों के हाथ- पैरों के साथ ही जननांगों को भी प्रभावित करता है।
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लौंग-
लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिए बहुत प्रभावी उपाय है। लौंग में मौजूद एंजाइम परजीवी के पनपते ही उसे खत्म कर देते हैं। इस बीमारी से पीड़ित रोगी को लौंग खई चाय का सेवन करना चाहिए।
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काले अखरोट-
काले अखरोट के तेल को एक कप गर्म पानी में 3-4 बूंद डालकर पिएं। इस पानी को दिन में दो बार पिएं। अखरोट में मौजूद कई गुण खून में मौजूद कीड़ों की संख्या कम कर देते हैं।
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लहसुन-
फाइलेरिया के इलाज के लिए अपने आहार में लहसुन, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खुबानी आदि को शामिल करें। इनमें विटामिन ए होता है जो बैक्टरीरिया को मारने में काफी मदद करता है।
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अदरक -
फाइलेरिया से निजात पाने के लिए सूखे अदरक का पाउडर (सोंठ) का रोजाना गरम पानी के साथ सेवन करें। ऐसा करने से शरीर में मौजूद परजीवी नष्ट होते हैं और मरीज जल्दी ठीक हो जाता है।
आंवला -
आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसमें मौजूद एन्थेलमिंथिंक घाव को जल्दी भरने में मदद करता है। रोजाना एक आंवला खाने से इंफेक्शन दूर होता है।