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HIV/AIDS: देश में एचआईवी-एड्स का बढ़ता खतरा, दिल्ली-हरियाणा में संक्रमण की रोकथाम को लेकर सरकार अलर्ट

Fri, 20 Mar 2026 08:24 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली में अभी वयस्कों में एचआवी की दर 0.33 प्रतिशत है और अनुमानित 59,079 लोग संक्रमण के साथ जी रहे हैं। वहीं हरियाणा में वयस्कों में एचआईवी की दर 0.24 प्रतिशत है और अनुमानित 59,642 लोग एचआईवी का शिकार हैं। 
 
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एचआईवी-एड्स का खतरा - फोटो : Amarujala.com
एचआईवी-एड्स वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। भारत में भी इसका जोखिम लगातार देखा जा रहा है। अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने मेघालय में बढ़ते एचआईवी के मामलों को लेकर जानकारी दी थी।  मेघालय देश का सबसे ज्यादा एचआईवी प्रभावित राज्य बना हुआ है। 

देश में एचआवी और एड्स को लेकर हालिया रिपोर्ट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 219 जिलों की पहचान की है, जहां एचआईवी और एड्स के लिए प्राथमिकता वाले कदम उठाए जाने हैं। इनमें से 11 जिले हरियाणा और सात दिल्ली के हैं। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में अभी वयस्कों में एचआवी की दर 0.33 प्रतिशत है और अनुमानित 59,079 लोग संक्रमण के साथ जी रहे हैं। वहीं हरियाणा में वयस्कों में एचआईवी की दर 0.24 प्रतिशत है और अनुमानित 59,642 लोग एचआईवी का शिकार हैं। 
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एचआईवी-ए्ड्स को लेकर सरकार अलर्ट - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
दिल्ली-हरियाणा के इन जिलों पर खास नजर

स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) ने शुक्रवार (20 मार्च) को नई दिल्ली में 'सुरक्षा संकल्प कार्यशाला' का आयोजन किया। ये एचआईवी/एड्स को लेकर जिला-स्तर पर तैयारियों और निगरानी को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है, इसमें हरियाणा और दिल्ली पर विशेष ध्यान दिया गया है।
 
  • दिल्ली में, जिन जिलों की पहचान की गई है उनमें उत्तर, नई दिल्ली, शाहदरा, मध्य, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम शामिल हैं।
  • वहीं हरियाणा में जिन जिलों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें पानीपत, रोहतक, सिरसा, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, हिसार, सोनीपत, कैथल और फतेहाबाद शामिल हैं।
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एचआईवी संक्रमण का खतरा और बचाव की रणनीति - फोटो : Adobe Stock
एड्स की रोकथाम-इलाज के लिए 95:95:95 लक्ष्य

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के डायरेक्टर जनरल डॉ. राकेश गुप्ता ने साल 2027 के विश्व एड्स दिवस तक एचआईवी/एड्स को एक नियंत्रित महामारी घोषित करने की दिशा में आगे बढ़ने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने जल्द से जल्द 95:95:95 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में प्रयास करने के महत्व पर जोर दिया।

95:95:95 एड्स की रोकथाम और इलाज के लिए तय किया गया एक फॉर्मूला है।
 
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एचआईवी के साथ जी रहे 95 प्रतिशत लोगों को अपनी स्थिति के बारे में पता हो।
  • जिन 95 प्रतिशत लोगों में इसकी पहचान हुई है, वे लगातार एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) ले रहे हों।
  • संक्रमण का इलाज करा रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरल का स्तर नियंत्रित हो जाए।
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एचआईवी रोकथाम को लेकर सावधानी जरूरी - फोटो : Adobe Stock Images
संक्रमण की रोकथाम को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत

डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि एचआईवी/एड्स की रोकथाम और इलाज को लेकर दिल्ली में अभी भी कई गंभीर कमियां बनी हुई हैं। यहां संक्रमण के लिए पहचाने गए लोगों में से केवल 70 प्रतिशत ही वर्तमान में इलाज से जुड़े हुए हैं या इलाज प्राप्त कर रहे हैं।

इसके विपरीत, हरियाणा ने लगभग 81:83:95 का आंकड़ा हासिल किया है, जो उत्साहजनक प्रगति को दर्शाता है। डॉ. राकेश गुप्ता ने कुछ और बातों पर जोर दिया।
 
  • मां से बच्चे में होने वाले एचआवी के संक्रमण की रोकथाम को लेकर विशेष सावधानी बरतने और इसपर ध्यान देने की जरूरत है। यह संक्रमण गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान हो सकता है।
  • समय पर जांच, परामर्श और इलाज के माध्यम से इस तरह के संक्रमण को पूरी तरह से रोका जा सकता है। 
  • कोई भी बच्चा एचआवी के साथ पैदा न हो, प्रसव-पूर्व जांच को मजबूत करने और रोकथाम सेवाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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