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Hepatitis Risk: लिवर को चुपचाप डैमेज कर देता है हेपेटाइटिस संक्रमण, कब कराएं इसकी जांच?

Tue, 28 Jul 2026 01:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण लिवर की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस बी और सी, गंभीर स्थितियों में लिवर में फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण बन सकता है। कहीं आपको भी तो खतरा नहीं है? 
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हेपेटाइटिस ए का संक्रमण - फोटो : Amarujala.com/AI
हेपेटाइटिस का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। दुनियाभर में वायरल हेपेटाइटिस से हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो जाती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 28.7 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से पीड़ित हैं। हेपेटाइटिस वायरस, लिवर को प्रभावित करता है, गंभीर स्थितियों में इससे लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का भी खतरा हो सकता है। 

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने हेपेटाइटिस के पांच प्रकार के बारे में जानकारी दी थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कई बार हेपेटाइटिस के शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में संक्रमण कई वर्षों तक रह सकता है और इसका पता भी नहीं चलता।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल लक्षण दिखने पर ही जांच कराने का इंतजार नहीं करना चाहिए। जिन लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक है, उन्हें नियमित रूप से अपने डॉक्टर से सलाह लेते रहना चाहिए। आइए जानते हैं कि हेपेटाइटिस की जांच कब करानी चाहिए?
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लिवर की समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
हेपेटाइटिस संक्रमण और इसका खतरा

हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण लिवर की कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। हेपेटाइटिस-बी और सी, गंभीर स्थितियों में लिवर में फाइब्रोसिस और सिरोसिस का कारण बन सकता है। डॉक्टर कहते हैं कुछ लोगों में हेपेटाइटिस और इसके कारण होने वाली समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है।
 
  • डॉक्टर, नर्स या लैब स्टाफ जैसे स्वास्थ्यकर्मी। 
  • डायलिसिस कराने वाले मरीज।
  • नशीले पदार्थ लेने वाले लोग।
  • असुरक्षित यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति।
  • संक्रमित मां से जन्म लेने वाले शिशु।
  • पहले से लिवर रोग से पीड़ित लोग।
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हेपेटाइटिस की जांच - फोटो : Adobe stock photos
कब कराएं  हेपेटाइटिस की जांच?
 
डॉक्टर कहते हैं, जिन लोगों में हेपेटाइटिस का खतरा अधिक रहता है उन्हें अपने लक्षणों पर ध्यान देते रहना चाहिए। 
  • ऐसे लोगों में यदि लगातार थकान या मतली, पेट में दर्द बना रहता है या फिर पीलिया के लक्षण हैं तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
  • इसके अलावा यदि हाल ही में संक्रमित रक्त चढ़ा हो, असुरक्षित यौन संबंध बनाए हों या संक्रमित सुई का उपयोग हुआ हो, तब भी जांच जरूरी हो सकती है।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस बी की स्क्रीनिंग की जाती है।
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हेपेटाइटिस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर बताते हैं, हेपेटाइटिस ए और बी के लिए प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस-बी का टीकाकरण संक्रमण और उससे होने वाली गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा रोजमर्रा की कुछ सावधानियां भी जोखिमों को कम करने में मददगार मानी जाती है।
 
  • हमेशा साफ या उबाल कर ही पानी पिएं।
  • भोजन स्वच्छ और अच्छी तरह पका हुआ खाएं।
  • नियमित रूप से हाथ धोते रहें।
  • रेजर, टूथब्रश जैसी निजी चीजें साझा न करें।
  • सुरक्षित यौन संबंध अपनाएं।
  • शराब का सेवन न करें, ये लिवर की बीमारियों का प्रमुख कारण है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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