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Latest Study: डायबिटीज के दौरान हुआ था कोरोना? सावधान- ऐसे लोगों में इस जानलेवा समस्या का देखा गया जोखिम

Mon, 21 Nov 2022 05:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज रोगियों में कोविड-19 की समस्या - फोटो : iStock
पिछले तीन साल से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना के संक्रमण ने लोगों की सेहत को बुरी तरह से प्रभावित किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पाया कि जिन लोगों को कोमोरबिडिटी यानी एक ही समय पर एक से अधिक गंभीर बीमारी रही हो, ऐसे लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। यही कारण है कि डायबिटीज, हृदय, किडनी जैसे रोगों के शिकार लोगों को कोरोना से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरतते रहने की सलाह दी जाती रही है। इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया है कि कोमोरबिडिटी वाले, विशेषकर डायबिटीज के शिकार जिन लोगों को संक्रमण हुआ था, उनमें अब इससे संबंधित गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं देखी जा रही हैं।

'अमेरिकन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी' में प्रकाशित हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि मधुमेह के दौरान कोविड-19 से भी पीड़ित रह चुके लोगों में दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं देखी जा रही हैं। अध्ययन के दौरान ऐसे लोगों में हृदय रोगों, विशेषकर हार्ट फेलियर की समस्या का जोखिम अधिक देखा जा रहा है।

अध्ययन में पाया गया है कि डायबिटिक रोगियों में कोरोनावायरस, हृदय में इंफ्लामेशन को बढ़ाने वाला हो सकता है जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। जो डायबिटिक रोगी, कोरोना संक्रमण के शिकार रह चुके हैं फिलहाल उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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हार्ट फेलियर को जोखिमों के बारे में जानिए - फोटो : istock
कोरोना संक्रमित डायबिटिक रोगियों में हार्ट फेलियर का जोखिम

कॉलेज ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता डॉ दिनेंद्र सिंगला ने इस अध्ययन में बताया कि डायबिटिक रोगियों में कोरोना संक्रमण के दौरान ऐसे जेनिटिक मेकअप देखे गए हैं, जो उनमें इंफ्लामेटरी समस्याओं को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। इसके दुष्प्रभाव हृदय और मस्तिष्क पर देखे जा रहे हैं। इस तरह के खतरे को ध्यान में रखते हुए संक्रमित रह चुके मधुमेह रोगियों को एहतियातन हृदय की जांच जरूर करा लेनी चाहिए, जिससे इसके संभावित जोखिमों को कम किया जा सके। डायबिटीज रोगियों में स्वाभाविक रूप से भी कार्डियोवास्कुलर समस्याओं का खतरा अधिक होता है। 
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डायबिटीज रोगियों में कोविड-19 की जटिलताएं - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन के बारे में डॉ सिंगला बताते हैं, शोध के दौरान हमने पाया कि डायबिटीज रोगियों में कोरोनावयरस, व्यक्ति के आनुवंशिक मेकअप को बदलाव का कारण बन रहा है जो बीमारी की गंभीरता का कारण बनता है। ऐसे रोगियों में हमने तीन गंभीर प्रकार के दीर्घकालिक जोखिमों का पता लगाया है।

पहला- कॉग्नेटिव डिस्फंक्शन, जो अल्जाइमर जैसे रोगों का कारण बनती है, दूसरा- यह प्री-डायबिटीक रोगियों में डायबिटीज के खतरे को बढ़ाता हुआ देखा गया है और तीसरा यह कार्डियोमायोपैथी या मांसपेशियों की शिथिलता का कारण बन रही है। ये तीनों ही जटिलताएं गंभीर मानी जाती हैं।

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डायबिटिक रोगियों होने वाली दिक्कतें - फोटो : Pixabay
इंफ्लामेशन और ब्लड सेलुलर कंपोजीशन की दिक्कत

शोधकर्ता बताते हैं, कोरोना संक्रमित कुछ डायबिटिक रोगियों के रक्त में अलग प्रकार का सेलुलर कंपोजीशन देखा गया है। यह भी जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। डॉ सिंगला कहते हैं, आगे हमारा लक्ष्य यह देखना है कि रक्त संरचना में यह अंतर किस प्रकार के दुष्प्रभावों का कारण बन सकता है। यदि कोई अंतर नोट किया जाता है, तो हमें यह जांचने की आवश्यकता होगी कि वे उन रोगियों में किस प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकते हैं या बढ़ा सकते हैं। इस बारे में विस्तार से समझने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।
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कोरोना से बचाव करते रहना जरूरी - फोटो : iStock
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

इस अध्ययन के बारे में अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉ विक्रमजीत सिंह कहते हैं, कोमोरबिडिटी वालों में संक्रमण के कारण कई प्रकार की दीर्घकालिक जटिलताओं के जोखिमों को लेकर पहले से अलर्ट किया जाता रहा है। चूंकि इस अध्ययन में हृदय और मस्तिष्क संबंधी जटिलताओं को बढ़ा हुआ देखा जा रहा है, ऐसे में जो लोग संक्रमित रहे हैं उन्हें डॉक्टर से मिलकर एहतियातन जांच जरूर करा लेनी चाहिए। इससे अगर कोई स्थिति विकसित हो भी रही होगी तो उसका समय पर इलाज करके ठीक किया जा सकेगा। 



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स्रोत और संदर्भ

Mechanisms of COVID-19 pathogenesis in diabetes

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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