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Alka Yagnik: कानों की समस्या चलना-फिरना तक कर सकती है मुश्किल; अलका याग्निक की हालत देख उठे कई सवाल

Fri, 26 Jun 2026 08:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप भी मानते आ रहे हैं कि कानों का काम सिर्फ सुनना है? तो जान लीजिए ये छोटा से अंग आपके पूरे शरीर का बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है। अगर कान में कोई दिक्कत आ जाए तो आपके लिए चलना-उठना तक मुश्किल हो सकता है।
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सुनने में समस्या का शरीर पर पड़ता है असर - फोटो : Amarujala.com/AI
मंगलवार (23 जून 2026) को आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में देश में अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 5 पद्म विभूषण और 13 पद्म भूषण सम्मान प्रदान किए गए। कार्यक्रम का मंच सजा हुआ था। पद्म भूषण सम्मान के लिए जानी-मानी गायिका अलका याग्निक का नाम पुकारा गया। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, लेकिन इस सम्मान समारोह में लोगों की नजर सिर्फ पुरस्कार पर नहीं, बल्कि उस व्हीलचेयर पर भी टिक गई जिस पर बैठकर अलका याग्निक कार्यक्रम के बाद बाहर जाती दिखीं। लाखों लोगों के मन में एक सवाल उठा क्या उनकी पुरानी सुनने की बीमारी अब उनके चलने-फिरने और शरीर के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है?

अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने जून 2024 में जानकारी दी थी कि मशहूर गायिका सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस नाम की समस्या से जूझ रही हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें कान के अंदर मौजूद सुनने वाली नाजुक नसें क्षतिग्रस्त हो जाती है।

मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं कि कान केवल सुनने का अंग नहीं है। कान के भीतरी हिस्से में एक बेहद जटिल वेस्टिब्युलर सिस्टम भी होता है, जो शरीर को यह बताता है कि हम खड़े हैं, बैठे हैं, झुक रहे हैं या चल रहे हैं। यही प्रणाली हमारी आंखों, मांसपेशियों और मस्तिष्क के साथ मिलकर शरीर का संतुलन बनाए रखती है। तो क्या अलका याग्निक को भी कान की समस्या के कारण शरीर के संतुलन में दिक्कत होने लगी है?
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अलका याग्निक - फोटो : Amarujala.com
अवार्ड के दौरान अलका याग्निक की वायरल तस्वीरों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए। क्या वह स्वस्थ नहीं हैं, क्या उनको भी चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी है?

थकान की वजह से लिया व्हीलचेयर

आखिरकार मशहूर सिंगर ने अपने व्हीलचेयर वीडियो की सच्चाई बताई। गुरुवार को सोशल मीडिया उन्होंने एक बयान चाहने वालों का धन्यवाद किया और कहा कि वीडियो को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह समझ में आती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘आप सभी के प्यार, चिंता और दुआओं के लिए धन्यवाद। सभी को बताना चाहती हूं कि मैं ठीक हूं और धीरे-धीरे बेहतर हो रही हूं। पद्म सम्मान समारोह के लंबे और यादगार दिन के बाद मैं काफी थक गई थी, इसलिए बाहर निकलते समय मैंने व्हीलचेयर की मदद ली।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कान में होने वाली दिक्कतें आपके पूरे शरीर के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। अलका याग्निक के वायरल वीडियो में तो इस समस्या की पुष्टि नहीं होती, क्योंकि उन्होंने खुद कारणों को स्पष्ट किया है। हालांकि ये उन लोगों के लिए जरूर चेतावनी है जो कानों की सेहत को हल्के में लेते हैं।

कान की समस्या के शिकार कई लोगों को चक्कर आने, चलते समय लड़खड़ाने, बार-बार गिरने, असंतुलन महसूस होने और यहां तक कि व्हीलचेयर या सहारे की जरूरत भी पड़ सकती है। 
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कानों को होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com
अलका याग्निक को कौन सी बीमारी है?

मशहूर गायिका सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस नाम की समस्या की शिकार हैं। 
 
  • सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस के कारण सुनने की क्षमता कम हो जाती है। जब भीतरी कान में मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल्स या कान से मस्तिष्क तक ध्वनि पहुंचाने वाली तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है, तब ये समस्या होती है। 
  • सामान्य स्थिति में ध्वनि तरंगें कान के पर्दे और मध्य कान से गुजरकर कोक्लिया तक पहुंचती हैं। यहां हेयर सेल्स इन तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजती हैं, जहां हमें आवाज सुनाई देती है।
  • यदि ये हेयर सेल्स नष्ट हो जाएं तो वे दोबारा नहीं बनते, इसलिए अधिकांश मामलों में सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस स्थायी माना जाता है। 

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चक्कर आने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
कान की दिक्कत बिगाड़ सकती है शरीर का बैलेंस 

हम सभी सोचते हैं कि कान केवल सुनने के लिए होते हैं, जबकि वास्तव में भीतरी कान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वेस्टिब्युलर सिस्टम शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करता है। 

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी के अनुसार उम्र बढ़ने, अत्यधिक तेज आवाज के संपर्क में रहने, वायरल संक्रमण, सिर की चोट और आनुवंशिक कारण ये समस्या हो सकती है। वैसे तो हर सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस वाले व्यक्ति में संतुलन बिगड़ने की दिक्कत नहीं होती, लेकिन यदि भीतरी कान का संतुलन तंत्र भी प्रभावित हो जाए तो शरीर की सामान्य गतिविधियां कठिन हो सकती हैं।
 
  • जब हम चलते-दौड़ते या सीढ़ियां चढ़ते हैं तो कान के भीतर मौजूद आंतरिक प्रणाली तुरंत मस्तिष्क को संकेत भेजती है।
  • मस्तिष्क इन संकेतों को तुरंत आंखों और पैरों से मिलने वाली जानकारी से मैच करता है और शरीर को संतुलित रखता है।
  • यदि भीतरी कान का यह हिस्सा बीमारी, संक्रमण, सूजन या नसों की क्षति के कारण प्रभावित हो जाए तो मस्तिष्क को गलत या अधूरी जानकारी मिलने लगती है। 
  • इसके कारण चक्कर आने, अस्थिरता, लड़खड़ाहट और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • कुछ मामलों में व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि कमरा घूम रहा है या जमीन हिल रही है।
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गंभीरता से लें कानों की समस्या - फोटो : Freepil.com
इन बातों को भी जानना जरूरी
 
  • हमारी जगह और दिशा का अंदाजा लगाने में भी कानों के स्वस्थ रहने और सुनने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है। दिमाग आवाज का इस्तेमाल करके हमारे आस-पास के माहौल का मानसिक नक्शा बनाता है और हमें हमारी जगह का एहसास कराता है। जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो आप उन आवाजों या संकेतों को नहीं सुन पाते जो जगह का अंदाजा लगाने के लिए जरूरी होते हैं। इससे दिमाग़ के लिए आपको पैरों पर स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखना भी काफी कठिन हो जाता है।
 
  • जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो बातचीत समझने और आवाज को प्रोसेस करने के लिए हमारे दिमाग को काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए बहुत ज्यादा मानसिक ऊर्जा की जरूरत होती है, जिसे अक्सर कॉग्निटिव लोड कहा जाता है। इस अतिरिक्त मेहनत के कारण शरीर का तालमेल और संतुलन बनाए रखने जैसी चीजों के लिए दिमाग के पास कम संसाधन बचते हैं, जिससे गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है।



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स्रोत:
Hearing and Balance Symptoms and Conditions


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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