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Health Tips: तनाव और अनिद्रा के कारण आते हैं बुरे विचार, तो इन उपायों से पाएं राहत

Sat, 18 Mar 2023 10:02 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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तनाव और अनिद्रा की शिकायत - फोटो : Pixabay
Prevent Stress and Insomnia: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों में तनाव और अवसाद होना आम बात है। वहीं तनाव के कारण अनिद्रा की शिकायत भी हो जाती है। कई लोग इन दिनों अनिद्रा से पीड़ित हैं। पूरे दिन के कामकाज के बाद शरीर थक जाता है। वहीं रात में जब थकान के बाद लोग बिस्तर पर जाते हैं, तो भी उन्हें नींद नहीं आती। लोगों की शिकायत रहती है कि रात में भी उनका दिमाग काम करना बंद नहीं करता। दिमाग लगातार चलते रहने के कारण उन्हें नींद नहीं आती। लोग सोना तो चाहते हैं लेकिन मन में हो रहे मंथन व तरह तरह के विचार आने के कारण नींद नहीं आती और लोग देर रात तक जागते रहते हैं। नींद पूरी न होने शरीर में थकावट, उलझन, आंखों में दर्द और कई अन्य शारीरिक व मानसिक समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन हर किसी के लिए आठ घंटे की नींद लेना जरूरी होता है। ऐसे में रात में दिमाग को शांत रखने और विचारों पर विराम लगाने के लिए कुछ उपाय अपना सकते हैं, जिससे तनाव व अनिद्रा की शिकायत दूर हो सके। चलिए जानते हैं अनिद्रा और तनाव के कारण रात में आने वाले विचारों और मन भटकने की इस स्थिति के बारे में और इसका इलाज।
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अनिद्रा की समस्या - फोटो : Pixabay
मनोवैज्ञानिक आधार पर विचारों के मंथन के कारण नींद न आने की स्थिति किसी के साथ भी हो सकती है। इस अवस्था में पीड़ित की चिंताएं सक्रिय हो जाती हैं और उसे सोने में मुश्किल होती है। पीड़ित के मन में कई तरह के विचार आते हैं। हालांकि तनाव में मात्र अनिद्रा की शिकायत ही नहीं होती। कई बार चिंता व तनाव की अवधि में कई लोग बिस्तर पर जाते ही सो जाते हैं और लंबी नींद लेते हैं। यह स्थिति भी खतरनाक होती है। ऐसे में अगर आप अनिद्रा से पीड़ित हैं तो इसे रेसिंग थाॅट्स यानी विचारों का विचरण कहते हैं। इस अवस्था में लोग आंखे बंद करते जागते हैं।
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अनिद्रा और रेसिंग थाॅट्स के कारण - फोटो : iStock
अनिद्रा और रेसिंग थाॅट्स का कारण

तनाव और चिंता के कारण दिमाग अधिक गतिशील हो जाता है। यह स्थित अधिकतर उस समय होती है, जब आपके आसपास का वातावरण शांत होता है, यानी रात के समय। यह किसी के साथ भी हो सकता है लेकिन रेसिंग थाॅट्स को केवल एंग्जाइटी डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों की समस्या माना जाता है, पर यह जरूरी नहीं है। जिन्हें लगता है कि वह चिंतित वह परेशान नहीं हैं, उन्हें भी यह समस्या हो सकती है। तनाव की यह स्थित किसी भी कारण से हो सकती है, जैसे किसी प्रियजन का निधन, नौकरी छूट जाना, तलाक या परिवार में कोई परेशानी, ट्रांसफर या शोक आदि।

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अनिद्रा के लक्षण - फोटो : Pixabay
अनिद्रा और रेसिंग थाॅट्स के लक्षण

रेसिंग थॉट्स यानी रात में बुरे ख्याल आने की स्थिति या विचारों के मंथन से तंग होने वाली अवस्था में कई लोग रात में कमरे में अंधेरा होने के बाद भी सो नहीं पाते। उनका दिमाग विचारों के भवर में घूमता रहता है। बिस्तर पर कुछ देर लेटे रहने के बाद वह व्याकुल होने लगते हैं। लोग फोन इस्तेमाल करके मन को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। कई बार तो भोर होने तक नींद आंखों में नहीं होती।
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नींद न आने पर करें ये काम - फोटो : pixabay
अनिद्रा और तनाव कम करने के उपाय
  • अनिद्रा की शिकायत दूर करने के लिए तनाव और रेसिंग थॉट्स को नियंत्रित करने की जरूरत होती है। इसके लिए अपने लिए दिन में कुछ समय निकालें और चिंता के बारे में सोचकर उसका हल निकालें।
  • हर दिन एक निर्धारित समय पर अपने कामों की समीक्षा करें। ताकि आप अपने काम से संतुष्ट हो सके और तनाव को कम कर सकें।
  • पूरी नींद लेने के लिए कंप्यूटर, फोन को बंद करके दूर रखें। सोशल मीडिया से दूर रहें, ताकि खुद को आराम दे सकें।
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अनिद्रा का इलाज - फोटो : Pixabay
  • नींद की तैयारी के लिए कुछ समय लें। कम से कम 30 मिनट सोने में लग सकते हैं। धैर्य बनाकर रखें और बिस्तर पर जाते ही तुरंत नींद न आए तो चिंता न करें।
  • आप चाहें तो सोने से पहले कुछ पढ़ें, संगीत सुनें, थोड़ी देर टीवी देख सकते हैं, व्यायाम कर सकते हैं या फिर ध्यान व प्रार्थना कर सकते हैं। इन एक्टिविटी से आपको नींद आ सकती है।
  • अगर इसके बाद भी आपको नींद न आए और देर रात तक जागें तो योग या मेडिटेशन करें। 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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