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Health Tips: देश में आधे से अधिक गर्भवती महिलाओं में है खून की कमी, क्या हैं इसके मायने?

Mon, 05 Jan 2026 06:37 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pregnant Women Anemia: हमारे देश में लगभग हर दूसरी गर्भवती महिला में खून की कमी है। इस आंकड़े अपने आप में हैरान कर देने वाले हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि इसके मुख्य कारण क्या है? और इससे बचाव के क्या उपाय हो सकते हैं?
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गर्भावस्था - फोटो : Freepik.com
Anemia in Pregnancy India: नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के मुताबिक देश की लगभग 52.2% गर्भवती महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से जूझ रही हैं। यह स्थिति केवल एक सामान्य पोषण की कमी नहीं है, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है जो मातृ मृत्यु दर और समय से पहले प्रसव के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक खून की आवश्यकता होती है ताकि भ्रूण का विकास सही ढंग से हो सके। 

जब शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर गिरता है, तो हृदय पर दबाव बढ़ता है और शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके कारण न केवल मां को अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होती है, बल्कि जन्म लेने वाले शिशु में भी कम वजन और विकास संबंधी विकारों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनीमिया की यह व्यापक दर देश के भविष्य के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जिसे समय रहते पहचानना और उपचार करना बहुत जरूरी है।
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कॉफी - फोटो : Freepik.comAl
आयरन के अवशोषण में बाधा
  • एनीमिया का मुख्य कारण केवल आयरन की कमी नहीं, बल्कि इसका अवशोषण न हो पाना है। भोजन के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीने की आदत आयरन को सोखने की प्रक्रिया में बाधा डालती है। शरीर में पुरानी सूजन भी आयरन के मेटाबॉलिज्म को सुस्त कर देती है, जिससे रक्त में हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता।
  • साथ ही कई महिलाओं में आयरन की कमी बचपन से ही शुरू हो जाती है। किशोरावस्था में जब शरीर तेजी से बढ़ता है, तब उसे ज्यादा आयरन की जरूरत होती है। अगर उस वक्त यह कमी पूरी नहीं होती, तो उनके शरीर में आयरन पहले से ही कम रह जाता है।
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गर्भावस्था में दवाओं के इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
दवाओं की सीमाएं और दुष्प्रभाव
अक्सर एनीमिया के उपचार के लिए आयरन की गोलियां दी जाती हैं, लेकिन इनकी अपनी सीमाएं हैं। बहुत सी महिलाओं को ये गोलियां खाने के बाद उल्टी, जी मिचलाना और गंभीर कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, गोलियों के माध्यम से हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार आने में 2 से 3 महीने का लंबा समय लगता है। इस देरी के कारण गर्भावस्था के अंतिम महीनों में स्थिति और भी जटिल हो सकती है।

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IV आयरन इन्फ्यूजन - फोटो : Adobe Stock Images
IV आयरन इन्फ्यूजन
गंभीर एनीमिया के मामलों में 'IV आयरन इन्फ्यूजन' एक प्रभावी और आधुनिक समाधान बनकर उभरा है। इसमें आयरन को सीधे नसों के माध्यम से शरीर में पहुंचाया जाता है, जिससे यह पाचन तंत्र को प्रभावित किए बिना तेजी से काम करता है। यह तकनीक बिना पेट खराब किए मात्र कुछ ही दिनों में हीमोग्लोबिन के स्तर को सामान्य कर देती है। प्रसव से ठीक पहले आयरन की कमी को दूर करने के लिए यह सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।
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गर्भावस्था - फोटो : Freepik.com
बचाव के उपाय
एनीमिया से बचने के लिए आयरन युक्त आहार जैसे पालक, दालें, गुड़ और खजूर को प्राथमिकता दें। सबसे जरूरी बात यह है कि आयरन के साथ विटामिन-सी (जैसे नींबू, संतरा) का सेवन जरूर करें, क्योंकि यह आयरन के अवशोषण को बढ़ाता है। गर्भावस्था की शुरुआत से ही नियमित अंतराल पर हीमोग्लोबिन की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह का पालन करें। याद रखें, मां की सेहत में ही बच्चे की सुरक्षा छिपी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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