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Health Tips: गर्भावस्था में महिलाओं को हो सकती है बवासीर की समस्या, जानें कारण, लक्षण और उपचार

Wed, 26 Apr 2023 10:23 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्भवस्था में बवासीर - फोटो : Pixabay
Health Tips: गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में कई बदलाव होते हैं। साथ ही डिलीवरी से पहले तक कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। हालांकि लोगों का मानना होता है कि प्रसव के बाद सब सामान्य हो जाएगा। महिला का शरीर गर्भावस्था से पहले की स्थिति में आ जाएगा। लेकिन ऐसा होता नहीं है। बच्चे की डिलीवरी के बाद कई महिलाओं को बवासीर की बीमारी हो जाती है। भले ही प्रेगनेंसी से पहले महिला को बवासीर की समस्या न हो लेकिन गर्भावस्था में होने वाली पेट संबंधी समस्या के कारण प्रसव के बाद पाइल्स की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि प्रेग्नेंसी के दौरान ही अगर महिलाएं इस समस्या से बचाव के उपायों को अपना लें तो बवासीर की समस्या से बचा जा सकता है। आइए जानते हैं गर्भवती महिला को डिलीवरी के बाद क्यों बवासीर की समस्या हो जाती है और पाइल्स से बचाव के लिए गर्भवती को क्या उपाय अपनाने चाहिए। 
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बवासीर - फोटो : Pixabay
बवासीर क्या है?

बवासीर में मलाशय के आसपास की नसों में सूजन हो जाती है। असामान्य सूजन और गांठ की समस्या से खुजली व मल त्यागने के दौरान दर्द की शिकायत होती है। बवासीर का आकार बाहर की ओर उभरा हुआ छोटे दाने जैसा होता है।
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गर्भावस्था में बवासीर - फोटो : iStock
गर्भावस्था में बवासीर होने की वजह

दरअसल, गर्भावस्था के दौरान यूट्रस का आकार बढ़ जाता है और रक्त संचार में वृद्धि होने लगती है। इस वजह से नसों में आसानी से सूजन आ जाती है। इसके अलावा प्रोजेस्टेरोन नाम के हार्मोन में वृद्धि होने से गर्भवती महिला को कब्ज हो सकता है। कब्ज के दौरान मल काफी सख्त हो जाता है और बवासीर की स्थिति गंभीर हो जाती है। आसान शब्दों में कह सकते हैं कि गर्भवती महिलाएं कब्ज के कारण पाइल्स का शिकार बन जाती हैं। डिलीवरी के दौरान बहुत ज्यादा दबाव बनाने के कारण बवासीर हो सकता है।

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बवासीर के लक्षण - फोटो : pixabay
बवासीर के लक्षण

-बवासीर की बीमारी में गुदा में दर्द, जलन और खुजली होने लगती है।

-मल त्यागने के दौरान दर्द बढ़ जाता है।

-बैठते समय भी बवासीर के कारण दर्द होता है।

-बवासीर होने पर मल त्यागने के बाद भी फ्रेश महसूस नहीं करते।

-मलाशय के पास ऊतकों में सूजन, घाव और रक्तस्राव के संकेत मिलते हैं।
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डाइट में फाइबर करें शामिल - फोटो : Pixabay
गर्भावस्था में बवासीर से बचाव के उपाय

फाइबर युक्त भोजन का सेवन

प्रेगनेंसी के दौरान कब्ज की समस्या से परेशान महिलाओं को डाइट में फाइबर युक्त भोजन को शामिल करना चाहिए। इसके लिए फल, सब्जी और अनाज का सेवन कर सकती हैं। फाइबर युक्त भोजन कब्ज से निजात दिलाता है और स्टूल को सॉफ्ट रखता है। इससे पाइल्स होने का खतरा कम होता है।
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स्टूल रोके नहीं - फोटो : Pixabay
शौच रोके नहीं

गर्भावस्था में जब भी बाथरूम जाने की जरूरत महसूस हो, तो तुरंत शौच के लिए जाएं। स्टूल को रोके नहीं। पेट फ्रेश न होने पर यूट्रस और इंटेस्टाइन में परेशानी होती है और बवासीर की समस्या हो सकती है।
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तरल पदार्थों का सेवन - फोटो : istock
शरीर को हाइड्रेट रखें

गर्भवती महिलाएं खुद को हाइड्रेट रखें। इसके लिए खूब पानी पीएं। तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रूट जूस का सेवन करते रहें। इससे भी पाइल्स की समस्या होने से बचा जा सकता है। 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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