फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Tips: गैस चैंबर में तब्दील हुई दिल्ली, लापरवाही करने वाले लोग इन बीमारियों को दे रहे हैं न्योता

Thu, 13 Nov 2025 09:21 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Air Pollution Diseases: राजधानी दिल्ली इन दिनों गैस चैंबर तब्दील हो चुकी है। आसमान भी धुंध की चादर लिपटी हुई है। ऐसी स्थिति में यहां सांस लेना बीमारियों को न्योता देने जैसा है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि जो लोग लापरवाहियां बरत रहे हैं उन्हें कौन सी बीमारियां घेर सकती हैं।
विज्ञापन
1 of 5
वायु प्रदूषण - फोटो : Amar Ujala
Delhi Air Pollution Impact on Health: इन दिनों दिल्ली में वायु प्रदूषण अपने चरम पर है। दिल्ली के अधिकतर जगहों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार है और औसत AQI लगभग 450 के गंभीर स्तर पर बना हुआ है। प्रदूषण, कोहरा, धुंध और सर्दी इन दिनों दिल्ली चौतरफा मार झेल रही है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि देश की राजधानी दिल्ली इस समय एक गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है, यहां की हवा में सांस लेना शरीर में जहर घोलने जैसा है।

यह स्थिति न केवल आंखों में जलन और गले की खराश पैदा कर रही है, बल्कि यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों हृदय, फेफड़ों और मस्तिष्क को भी दबे पांव स्थायी नुकसान पहुंचा रही है। इस जहरीले वातावरण में थोड़ी सी भी लापरवाही, गंभीर और लाइलाज बीमारियों को सीधे न्योता देने जैसी है।

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह प्रदूषण, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लिए जान का जोखिम बढ़ा रहा है। आइए इस लेख में जानते हैं कि ऐसी स्थिति में लापरवाही बरतने से किन बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है, साथ ही ये भी जानेंगे कि क्या सावधानियां बरतनी जरूरी है।
विज्ञापन

2 of 5
वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर खतरा
जहरीली हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सीधे फेफड़ों में गहराई तक पहुंचते हैं और वहां सूजन पैदा करते हैं। इससे अस्थमा के अटैक की गंभीरता बढ़ जाती है और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज का जोखिम तेजी से बढ़ता है। बच्चों में निमोनिया और ब्रोंकाइटिस का खतरा कई गुना अधिक हो जाता है। लंबे समय तक इस हवा में रहने से फेफड़ों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं, जो फेफड़ों के कैंसर का कारण भी बन सकती हैं।

ये भी पढ़ें- Air Pollution: जीन को भी नुकसान पहुंचा रही है प्रदूषित हवा, आने वाली पीढ़ियां भी खतरे में
 
विज्ञापन

3 of 5
हार्ट - फोटो : Adobe stock Images
हृदय रोग और रक्त संचार पर असर
प्रदूषण का दूसरा बड़ा हमला हृदय पर होता है। PM2.5 कण रक्तप्रवाह में मिलकर रक्त को गाढ़ा कर देते हैं, जिससे रक्त के थक्के बनने की आशंका बढ़ जाती है। यह स्थिति ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा जाता है। हृदय रोगी और बुज़ुर्ग इस खतरे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

ये भी पढ़ें- Health Tips: ज्यादा बैठने से भी हो सकती है किडनी में पथरी, खानपान के अलावा ये कारण भी कर सकते हैं स्टोन

4 of 5
वायु प्रदूषण - फोटो : Adobe Stock
मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को क्षति
प्रदूषण सिर्फ शारीरिक अंगों को ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचाता है। शोध बताते हैं कि प्रदूषक कण दिमाग में पहुंचकर सूजन पैदा करते हैं, जिससे बच्चों में संज्ञानात्मक विकास प्रभावित होता है। वयस्कों में यह याददाश्त की कमी (ब्रेन फॉग) और अल्जाइमर जैसे न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है, क्योंकि यह तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
वायु प्रदूषण में ये सावधानियां जरूर बरतें - फोटो : Adobe Stock
तत्काल बरतें ये 5 सावधानियां
इस जानलेवा हवा से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए ये 5 सावधानियां बरतना अनिवार्य है-
  • बाहर निकलने पर N95 या N99 मास्क जरूर पहनें।
  • सुबह और शाम, जब प्रदूषण चरम पर होता है, घर के अंदर ही रहें और बाहर जानें से बचें।
  • घर में HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें।
  • घर में अगरबत्ती, मोमबत्ती या मच्छर कॉइल जलाने से बचें।
  • गुनगुना पानी और विटामिन-सी (आंवला, खट्टे फल) से भरपूर आहार का सेवन करें, इससे आपकी इम्युनिटी बढ़ती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें