माइक्रोप्लास्टिक के कई गंभीर नुकसान
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शरीर में पहुंच रहे हैं कई बिलियन प्लास्टिक के कण
इस अध्ययन में विशेष रूप से नैनोप्लास्टिक्स को देखा गया, जिसका माप 1 से 1000 नैनोमीटर के बीच था। प्रोफेसर डॉडर ने कहा, डेटा से पता चलता है कि प्लास्टिक के कणों का आकार जितना छोटा होगा, कोशिकाओं में प्लास्टिक का अवशोषण उतना ही अधिक होगा। इसको ऐसे भी समझा जा सकता है कि प्लास्टिक के कणों की आकार जितना छोटा होगा, इससे हमारी सेहत को जोखिम उतना ही अधिक होगा।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट की टीम ने पाया कि बाजार में आसानी से उपलब्ध टी-बैग से चाय बनाते समय भारी मात्रा में प्लास्टिक के कण गर्म पानी में मिल जाते हैं। अध्ययन के लिए तीन प्रकार के प्लास्टिक युक्त बैग्स (पॉलीप्रोपिलीन, नायलॉन-6 और सेल्यूलोज) का इस्तेमाल किया गया।
पॉलीप्रोपाइलीन युक्त टी-बैग की प्रति बूंद या मिलीलीटर चाय में लगभग 1.2 बिलियन (120 करोड़) प्लास्टिक के सूक्ष्म कण निकलते हैं। सेल्यूलोज युक्त थैलियों से प्रति बूंद से 13.5 करोड़ और नायलॉन-6 से प्रति बूंद 81.8 लाख प्लास्टिक के सूक्ष्म और अति सूक्ष्म कण निकलते हैं।