Health Check-up: शरीर में अगर कुछ भी घट-बढ़ जाता है, तो उसका सीधा असर आंतरिक शरीर पर पड़ता है। ऐसे में ये जानना आपके लिए जरूरी होना चाहिए कि आपके शरीर में क्या कितना होना चाहिए।
विज्ञापन
1 of 6
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
Health Check-up: शरीर में किसी भी जरूरी तत्व की मात्रा कम या ज्यादा होने का असर हमारी सेहत पर पड़ सकता है। कई बार शरीर शुरुआती संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, थायराइड, कोलेस्ट्रॉल और शरीर से जुड़े दूसरे महत्वपूर्ण मानक सामान्य तौर पर कितने होने चाहिए। इनकी नियमित जांच से कई स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।
खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, एनीमिया, थायराइड और हृदय रोग जैसी स्थितियों में इन मानकों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। हालांकि हर व्यक्ति की सामान्य सीमा उसकी उम्र, लिंग, गर्भावस्था, दवाओं, स्वास्थ्य स्थिति और जांच की प्रयोगशाला के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक रिपोर्ट को देखकर खुद बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
आइए जानते हैं शरीर में 10 महत्वपूर्ण हेल्थ पैरामीटर का स्तर कितना होना चाहिए और इनके बढ़ने या घटने का क्या मतलब हो सकता है।
विज्ञापन
2 of 6
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
ब्लड प्रेशर
ब्लड प्रेशर को दो संख्याओं में मापा जाता है—ऊपरी संख्या सिस्टोलिक और निचली संख्या डायस्टोलिक। सामान्य वयस्कों में 120/80 mmHg से कम रक्तचाप को सामान्य माना जाता है। 120–129 और 80 से कम को बढ़ा हुआ रक्तचाप माना जाता है, जबकि लगातार 130/80 mmHg या उससे ज्यादा रीडिंग हाई ब्लड प्रेशर की श्रेणी में आ सकती है।
ब्लड शुगर
खाली पेट यानी फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज सामान्य तौर पर 70–99 mg/dL माना जाता है। 100–125 mg/dL का स्तर प्रीडायबिटीज की ओर संकेत कर सकता है। 126 mg/dL या उससे ज्यादा का स्तर डायबिटीज की जांच में महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन निदान के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत पड़ने पर दोबारा जांच जरूरी होती है।
विज्ञापन
3 of 6
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
हीमोग्लोबिन
हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। वयस्क पुरुषों में सामान्य हीमोग्लोबिन लगभग 13.8–17.2 ग्राम/डेसीलीटर और महिलाओं में करीब 12.1–15.1 ग्राम/डेसीलीटर हो सकता है। अलग-अलग प्रयोगशालाओं में संदर्भ सीमा थोड़ी अलग हो सकती है।
थायराइड यानी टीएसएच
थायराइड की कार्यप्रणाली जांचने में टीएसएच एक महत्वपूर्ण रक्त जांच है। कई प्रयोगशालाओं में वयस्कों के लिए लगभग 0.4–4.0 mIU/L को संदर्भ सीमा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आपकी रिपोर्ट पर दी गई प्रयोगशाला की सीमा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
4 of 6
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
कोलेस्ट्रॉल
कुल कोलेस्ट्रॉल सामान्य तौर पर 200 mg/dL से कम होना बेहतर माना जाता है। लेकिन केवल कुल कोलेस्ट्रॉल देखना पर्याप्त नहीं है। एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड भी महत्वपूर्ण होते हैं। आम तौर पर एलडीएल को 100 mg/dL से कम रखना बेहतर माना जाता है, जबकि एचडीएल का ज्यादा होना हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।
ट्राइग्लिसराइड
ट्राइग्लिसराइड खून में मौजूद एक प्रकार का वसा है। वयस्कों में इसका स्तर 150 mg/dL से कम होना सामान्य माना जाता है। ट्राइग्लिसराइड बढ़ने के पीछे मोटापा, डायबिटीज, अस्वास्थ्यकर खान-पान, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ अन्य कारण हो सकते हैं।
विज्ञापन
5 of 6
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
ऑक्सीजन लेवल
पल्स ऑक्सीमीटर से मापा जाने वाला SpO₂ सामान्य स्वस्थ व्यक्ति में आम तौर पर 95–100 प्रतिशत के आसपास रहता है। अगर ऑक्सीजन का स्तर लगातार सामान्य से कम दिखाई दे, खासकर साथ में सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, होंठ या चेहरा नीला पड़ना जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी हो सकता है।
आराम के समय हृदय गति
आराम की स्थिति में अधिकांश वयस्कों की हृदय गति लगभग 60–100 धड़कन प्रति मिनट होती है। हालांकि नियमित रूप से व्यायाम करने वाले लोगों में आराम की हृदय गति इससे कम भी हो सकती है। तनाव, व्यायाम, कैफीन, बुखार और कुछ दवाएं हृदय गति को प्रभावित कर सकती हैं।
हर किसी को पता होने चाहिए शरीर के ये 10 हेल्थ पैरामीटर
- फोटो : AI
विटामिन डी
विटामिन डी की स्थिति जानने के लिए आम तौर पर रक्त में 25-हाइड्रॉक्सी विटामिन डी की जांच की जाती है। विटामिन डी की व्याख्या में अलग-अलग दिशानिर्देश और प्रयोगशाला सीमाएं इस्तेमाल हो सकती हैं। इसलिए रिपोर्ट पर दी गई संदर्भ सीमा और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है।
यूरिक एसिड
यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन के टूटने से बनने वाला पदार्थ है, जिसे मुख्य रूप से किडनी बाहर निकालती है। इसकी सामान्य सीमा लिंग और प्रयोगशाला के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यूरिक एसिड बढ़ने पर कुछ लोगों में गाउट यानी गठिया का एक प्रकार या किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन केवल यूरिक एसिड बढ़ा हुआ मिलने का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति को गाउट जरूर है।
---------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।