वैश्विक स्तर पर युवाओं में कम सुनाई देने या बहरेपन की समस्या बढ़ती हुई देखी जा रही है। हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में साल 2010 से 2020 के बीच 20-30 की आयु वाले लोगों में सुनाई न देने की समस्या 15.78 फीसदी तक बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि यह वैश्विक चिंता का विषय है क्योंकि यह समस्या सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं है, दुनिया के अधिकतर देशों में हालात ऐसे ही हैं।
हार्वर्ड विशेषज्ञ कहते हैं, जैसे-जैसे हम प्रौद्योगिकी से जुड़ते जा रहे हैं, इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। युवाओं में कानों की बढ़ती समस्याओं के लिए हेडफोन के अधिक इस्तेमाल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हेडफोन्स की तेज आवाज और कंपन के कारण पर्दों को क्षति पहुंच रही है जिससे कानों से कम सुनाई देने, टिनिटस या गंभीर मामलों में बहरेपन का भी खतरा अधिक हो सकता है।