Winter Tremor Causes : इन दिनों ठंड अपने चरम पर है, ऐसे में बहुत लोगों को हल्की-फुल्की कंपकंपी रहती है। मगर कई बार होने वाली कंपकंपी हमारे शरीर में होने वाले बीमारी का संकेत हो सकता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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हाथों में झुनझुनी पड़ना या सुन्न होना
- फोटो : Adobe Stock
Shaking Hands Cold: भीषण ठंड में शरीर का थोड़ा-बहुत कांपना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। जब हमें ठंड लगती है, तो हमारी मांसपेशियां तेजी से सिकुड़ती और फैलती हैं ताकि शरीर के भीतर गर्मी पैदा की जा सके, जिसे 'शिवरिंग' कहते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब यह कंपन सामान्य सीमा को पार कर जाए। अगर आपके हाथ जरूरत से ज्यादा कांप रहे हैं, या कमरे का तापमान सामान्य होने के बाद भी यह कंपन लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे केवल ठंड का असर मानकर नजरअंदाज करना जानलेवा हो सकता है।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार हाथों में होने वाला यह असामान्य कंपन नसों की कमजोरी या मस्तिष्क के किसी हिस्से में खराबी का संकेत हो सकता है। अगर कंपन के कारण आपको एक कप चाय पकड़ने या लिखने में भी कठिनाई हो रही है, तो यह साधारण ठंड नहीं बल्कि शरीर के भीतर पनप रही किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का अलार्म हो सकता है।
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पैरों में झुनझुनी पड़ना या सुन्न होना
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असामान्य कंपन और सामान्य शिवरिंग में अंतर क्या है?
सामान्य ठंड में पूरा शरीर एक साथ कांपता है, लेकिन केवल हाथ या उंगलियां हिल रही हैं, तो यह 'एसेंशियल ट्रेमर' हो सकता है। यह कंपन तब अधिक स्पष्ट होता है जब आप कोई काम करने की कोशिश करते हैं। अगर यह कंपन सामान्य लोगों की तुलना में बहुत देर तक रहता है, तो इसका मतलब है कि आपकी तंत्रिका तंत्र बाहरी तापमान के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है।
किन गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है यह कंपन?
लगातार रहने वाला कंपन कई बीमारियों की शुरुआती आहट हो सकता है-
पार्किंसंस रोग: इसमें आराम करते समय भी हाथ कांपते हैं।
थायरॉयड की समस्या: ओवरएक्टिव थायरॉयड मेटाबॉलिज्म को तेज कर देता है, जिससे हाथ कांपने लगते हैं।
विटामिन B12 की कमी: नसों की मजबूती के लिए यह विटामिन अनिवार्य है, इसकी कमी से हाथों में अस्थिरता आती है।
लो ब्लड शुगर: ब्लड शुगर लेवल गिरने से भी कंपकंपी महसूस होती है।
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पैरों में झुनझुनी पड़ना या सुन्न होना
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नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है
यदि इन लक्षणों को शुरुआत में ही नहीं पहचाना गया, तो यह स्थिति 'क्रोनिक' हो सकती है। मांसपेशियों की यह जकड़न और कंपन धीरे-धीरे आपके दैनिक कार्यों को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय में यह याददाश्त की कमी, चलने-फिरने में संतुलन बिगड़ने और गंभीर स्नायु रोगों का रूप ले सकती है। समय पर जांच न कराने से मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाला नुकसान अपरिवर्तनीय हो सकता है।
कब और कैसे लें डॉक्टरी सलाह?
ठंड के मौसम में कंपन को सामान्य न समझें। अगर हाथों की थरथराहट आपकी जीवनशैली को प्रभावित कर रही है, तो तुरंत एक न्यूरोलॉजिस्ट से मिलें। पर्याप्त मात्रा में गर्म तरल पदार्थ पिएं, मैग्नीशियम और विटामिन युक्त आहार लें और तनाव से दूर रहें। याद रखें समय पर किया गया डायग्नोसिस ही आपको भविष्य की बड़ी शारीरिक चुनौतियों से बचा सकता है। स्वस्थ रहें और शरीर के छोटे से छोटे संकेत पर भी गौर करें।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।