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World No-Tobacco Day 2022: सिर्फ आपकी ही नहीं, अगली पीढ़ियों की सेहत के लिए भी नुकसानदायक है धूम्रपान की आदत, तुरंत बना लें इससे दूरी

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धूम्रपान से दीर्घकालिक नुकसान - फोटो : istock
World No-Tobacco Day 2022: हम क्या खाते-पीते हैं, किस तरह से जीवन व्यतीत करते हैं, इनका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर देखा जा सकता है। पर क्या आप जानते हैं कि हमारी कुछ गलत आदतें आने वाली पीढ़ियों की सेहत के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण समस्याओं का कारण बन सकती हैं? अध्ययन में शोधकर्ता बताते हैं कि हम में से ज्यादातर लोगों में कई ऐसी आदतें देखी गई हैं, जिसका असर बच्चों की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है-धूम्रपान उनमें से एक है।

धूम्रपान करने वाले लोगों में न सिर्फ फेफड़ों और हृदय से संबंधित समस्याओं का जोखिम अधिक होता है, साथ ही इसका असर बच्चों की सेहत को भी गंभीर तौर से प्रभावित कर सकता है। इसी खतरे को देखते हुए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 31 मई को 'वर्ल्ड नो टोबैको डे' मनाया जाता है।

कुछ शोध बताते हैं कि धम्रपान करने वालों के साथ-साथ उसके धुएं के संपर्क में आने वाले लोगों में भी कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। विशेषकर नवजात बच्चों के इस खतरनाक धुएं के अधिक संपर्क में आने के कारण मौत तक का जोखिम भी बढ़ सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को धूम्रपान की आदत से बचने की सलाह देते हैं। आइए इस आदत से होने वाले खतरनाक दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं।
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धूम्रपान के दुष्प्रभावों के बारे में जानिए - फोटो : pixabay
बच्चों के स्वास्थ्य पर असर

अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले माता-पिता से उनके बच्चों में भी कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। साल 2014 के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन बच्चों के माता-पिता अधिक धूम्रपान करते हैं, उन बच्चों में बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) अधिक होने का खतरा हो सकता है। बच्चों में बढ़ी हुई बीएमआई को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय रोग, फेफड़ों की समस्या और डायबिटीज का कारक माना जाता है।
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धूम्रपान से हो सकते हैं गंभीर दुष्प्रभाव - फोटो : iStock
तीन पीढ़ियों तक हो सकता है दुष्प्रभाव

धूम्रपान के दुष्प्रभावों को जानने को लेकर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ परिवारों में इसके दुष्प्रभाव, तीन पीढ़ियों तक भी देखे जा सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि धूम्रपान के कारण होने वाले दुष्प्रभावों के साथ धूम्रपान की आदत भी पीढ़ियों तक ट्रांसफर हो सकती हैं।

तंबाकू उत्पादों के सेवन को कई गंभीर रोगों के प्रमुख कारक के रूप में देखा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते धूम्रपान की आदत को कंट्रोल कर लिया जाए तो समय से पहले मृत्यु के खतरे को 30 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

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धूम्रपान का फेफड़ों पर नकारात्मक असर - फोटो : iStock
धूम्रपान के कारण होने वाली बीमारियां

अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वाले लोगों में कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़े के रोग, मधुमेह और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) होने का जोखिम काफी अधिक देखा गया है। धूम्रपान से तपेदिक, नेत्र रोगों और रुमेटीइड आर्थराइटिस सहित प्रतिरक्षा प्रणाली की समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इनमें से ज्यादातर समस्याओं को समय से पहले मृत्यु का जोखिम बढ़ाने वाला माना जाता है। 
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धूम्रपान को कहें न - फोटो : pixabay
इन गंभीर खतरों के बारे में भी जानिए

धूम्रपान की आदत हृदय-फेफड़े और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इसे कोरोनरी हार्ट डिजीज (सीएचडी) का प्रमुख कारण माना जाता है, जिसमें धमनियां, हृदय की मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति नहीं कर पाती हैं। धूम्रपान के धुएं के कारण फेफड़े की गंभीर दीर्घकालिक बीमारियों जैसे कि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), निमोनिया और टीबी, फेफड़ों के संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जोकि जानलेवा भी हो सकती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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