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GIST Cancer: इस दुर्लभ कैंसर को लेकर विशेषज्ञों ने किया सावधान, जानिए क्या हैं इसके लक्षण और कैसे पहचानें

Mon, 16 Feb 2026 02:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक दुर्लभ और गंभीर प्रकार का कैंसर है, जो पाचन तंत्र में होता है। चूंकि इसके मामले बहुत कम होते हैं, इसलिए इसके लक्षणों और कारणों को लेकर आम लोगों में जागरूकता भी कम देखी जाती है। आइए इसके बारे में जानते हैं...
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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ता जा रहा है। कुछ दशकों पहले कैंसर को उम्र बढ़ने के साथ या बुजुर्गों को होने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता था, हालांकि अब बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि हर साल अकेले भारत में 50 हजार बच्चे कैंसर का शिकार हो रहे हैं, बच्चों में कुछ खास तरह के कैंसर के मामले ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं।

वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हर साल कैंसर के नए मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। खराब जीवनशैली, पर्यावरणीय प्रदूषण, खानपान की गड़बड़ आदतें और समय पर रोग का पता न चलना कैंसर के खतरे को बढ़ाता जा रहा है। भारत जैसे विकासशील देशों में स्थिति और भी चिंताजनक है, क्योंकि यहां बड़ी आबादी समय पर स्क्रीनिंग और इलाज तक नहीं पहुंच पाती।

लंग्स-ब्रेस्ट, सर्वाइकल और ओवेरियन जैसे कैंसर के बारे में हम सभी अक्सर सुनते-पढ़ते रहते हैं। विशेषज्ञों की टीम कहती हैं, कुछ प्रकार के कैंसर काफी दुर्लभ होते हैं जिनकी चर्चा कम होती है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर (जीआईएसटी) ऐसा ही कैंसर है जिसके जोखिमों को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए। 
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पाचन तंत्र की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार का कैंसर है, ये पाचन तंत्र में विकसित होता है। यह कैंसर आमतौर पर पेट और छोटी आंत में होता है। हालांकि कुछ मामलों में यह भोजन नली, बड़ी आंत या मलाशय में भी हो सकता है। गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर के मामले  बहुत कम होते हैं और ये अक्सर धीरे-धीरे बढ़ने वाला कैंसर है। जेनेटिक म्यूटेशन को इस कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। 
 
  • जीआईएसटी कैंसर वाले ट्यूमर होते हैं। ये एक तरह के सॉफ्ट टिशू सारकोमा होते हैं। 
  • ट्यूमर आमतौर पर आपके पेट या छोटी आंत में आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में बनते हैं।
  • कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर एक इंच से भी छोटे हो सकते हैं। इस तरह के ट्यूमर के आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं।
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पेट में दर्द और कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर की क्या पहचान है?

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर और इसके कैंसर में हर बार लक्षण हों ये जरूरी नहीं है। कई बार लोगों को इसका तब पता चलता है कि जब वे किसी और वजह से टेस्ट या सर्जरी करवाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पेट से संबंधित कुछ लक्षणों को लेकर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए ताकि समय रहते इसकी पहचान हो सके।
 
  • अक्सर पेट में दर्द रहना या शौच के साथ खून आना।
  • अक्सर कब्ज और थकान की दिक्कत होते रहना।
  • बिना कोशिश किए वजन कम होना
  • भूख न लगना या खाने की इच्छा न होना।
  • उल्टी के साथ खून आने की समस्या होना।

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पाचन से संबंधित कैंसर के खतरे - फोटो : Freepik.com
क्या है इस कैंसर की वजह?

गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर वाले कैंसर का सबसे बड़ा कारण जेनेटिक म्यूटेशन माना जाता है। ज्यादातर मामलों में KIT या PDGFRA जीन में बदलाव के कारण कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं। यह म्यूटेशन आमतौर पर जन्म के समय नहीं होता, बाद के दिनों में ये विकसित हो सकता है। इसलिए अधिकतर मामलों में इसे वंशानुगत कैंसर नहीं माना जाता।
 
  • जीआईएसटी कैंसर का खतरा आमतौर पर 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखा जाता है। 
  • पुरुषों और महिलाओं दोनों में इसका जोखिम लगभग समान होता है। 
  • कुछ दुर्लभ जेनेटिक सिंड्रोम, जैसे न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप-1 से ग्रसित लोगों में ट्यूमर और कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। 
  • इसके अलावा जिन लोगों में पहले किसी प्रकार का ट्यूमर रहा हो या जिनकी इम्यून सिस्टम कमजोर हो, उनमें भी जोखिम अधिक हो सकता है। 
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कैंसर से बचाव के लिए क्या किए जाए - फोटो : Adobe Stock Photo
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर से बचने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर को आम तौर पर रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये पर्यावरणीय या लाइफस्टाइल फैक्टर्स के बजाय जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से होते हैं। 

अब तक इससे बचाव के लिए कोई पुख्ता तरीका नहीं खोजा जा सका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे पौष्टिक आहार, व्यायाम और स्मोकिंग से दूरी बनाकर रखना आपके कैंसर को जोखिमों को कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार हो सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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