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अध्ययन: फेफड़े-मस्तिष्क के कैंसर के साथ गंभीर हृदय रोगों से बचा सकती है यह औषधि, हर घर में आसानी से उपलब्ध

Tue, 03 May 2022 05:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर के खतरे से कैसे बचें? - फोटो : Pixabay
हमारी किचन में मौजूद कई चीजें सिर्फ स्वाद ही नहीं, सेहत का भी खजाना मानी जाती हैं। कई चीजों को तो हम रोजाना प्रयोग में लाते हैं, पर उनसे होने वाले स्वास्थ्य लाभ से ज्यादातर लोग अनजान रहते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि हम सभी के घरों में आसानी से उपलब्ध एक औषधि कई प्रकार के गंभीर कैंसर, हृदय रोगों और जानलेवा संक्रमण के जोखिम को कम कर सकती है। भारतीय भोजन में प्रयोग में लाई जाने वाली इन औषधियों को मेडिकली प्रमाणिकता भी मिल चुकी है। इन पर किए गए शोध में नियमित रूप से इसके सेवन की आदत को विशेषज्ञ काफी लाभकारी मानते हैं। 

इस लेख में हम हर घर में उपलब्ध और प्रयोग में लाए जाने वाले लहसुन की बात कर रहे हैं। लहसुन, भोजन के स्वाद को बढ़ाने के साथ वर्षों से कई तरह के रोगों के घरेलू उपचार के तौर पर भी प्रयोग में लाया जाता रहा है। पर इस लेख में हम लहसुन के अध्ययन आधारित स्वास्थ्य लाभ के बारे में बात करेंगे।

शोध में पाया गया है कि लहसुन में कई प्रकार के ऐसे यौगिक और एंटी-ऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं जो इंसानों में गंभीर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। आइए लहसुन के अध्ययन आधारित ऐसे ही कुछ फायदों के बारे में जानते हैं।
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बहुत फायदेमंद है लहसुन - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

लहसुन को लेकर हुए कई शोध में वैज्ञानिकों ने इसे शरीर के लिए अत्यंत लाभदायक औषधि बताया है। प्राचीन यूनानी चिकित्सक रिचर्ड एस. रिवलिन  हिप्पोक्रेट्स,  जिन्हें "पश्चिमी चिकित्सा के जनक" के रूप में भी जाना जाता है वह कहते हैं कि- लहसुन श्वसन समस्याओं, परजीवी संक्रमण की समस्या, खराब पाचन और थकान जैसी दिक्कतों को आसानी से ठीक करने वाला औषधि है। उन्होंने दवाई के रूप में भी लहसुन के सेवन को काफी बढ़ावा दिया। 

यूनानी के साथ मेडिकल जर्नल्स में भी छपे कई रिपोर्ट्स में लहसुन के सेवन को सेहत के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है।
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लहसुन से कम होता है कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क कैंसर से बचाव

लहुसन के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभावों को जानने के लिए किए गए एक शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका सेवन ब्रेन कैंसर कोशिकाओं को निष्क्रिय करने में मदद कर सकता है। जर्नल कैंसर में प्रकाशित इस अध्ययन में दक्षिण कैरोलिना के मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने बताया कि लहसुन में पाए जाने वाला ऑर्गेनो-सल्फर यौगिक, ग्लियोब्लास्टोमास (एक प्रकार का घातक ब्रेन ट्यूमर) कोशिकाओं को नष्ट करने में प्रभावी हो सकता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक लहसुन में तीन प्रभावी ऑर्गेनो-सल्फर यौगिक होते हैं जो मस्तिष्क कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोक सकते हैं।

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फेफड़ों के लिए फायदेमंद है लहसुन - फोटो : iStock
फेफड़ों के कैंसर का जोखिम कम

वहीं एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि लहसुन, फेफड़ों के कैंसर के खतरे को भी कम कर देता है। जर्नल कैंसर प्रिवेंशन रिसर्च में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, 7 साल की अध्ययन अवधि के दौरान सप्ताह में कम से कम दो बार कच्चा लहसुन खाने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर के विकास का जोखिम 44 प्रतिशत तक कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने फेफड़ों के कैंसर के 1,424 रोगियों और 4,543 स्वस्थ व्यक्तियों के बीच यह अध्ययन किया, जिसके आधार पर यह परिणाम सामने आए। 
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लहसुन हृदय को रखता है स्वस्थ - फोटो : iStock
हृदय रोगों से बचाव

कैंसर के साथ-साथ लहसुन, आपमें हृदय रोगों के जोखिम को भी कम कर सकता है। एमोरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने पाया कि लहसुन में पाया जाने वाला घटक- डायलिल ट्राइसल्फाइड, कार्डियक रोगों से सुरक्षा दे सकता है। हार्ट अटैक के बाद भी दिल को स्वस्थ रखने के लिए लहसुन का सेवन किया जा सकता है। लहसुन में हृदय को क्षति से बचाने वाले कई यौगिक और कैमिकल कंपाउंड पाए जाते हैं। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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