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Sharda Sinha: मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थीं 'बिहार कोकिला', जानिए इसके लक्षण और कारण के बारे में विस्तार से

Wed, 06 Nov 2024 01:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शारदा सिन्हा मल्टीपल मायलोमा नामक ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं।  साल 2018 में उन्हें इसका पता चला था। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अस्पताल में भर्ती थीं। आइए इस बीमारी के बारे में जानते हैं।
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Sharda Sinha - फोटो : @shardasinha_official
भोजपुरी, मैथिली और हिंदी भाषाओं में अपने गीतों के लिए मशहूर 'बिहार कोकिला' शारदा सिन्हा का मंगलवार को निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अस्पताल में भर्ती थीं। मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक शारदा सिन्हा मल्टीपल मायलोमा नामक ब्लड कैंसर से जूझ रही थीं। सोमवार को उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। उन्होंने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अंतिम सांस ली।

जानकारियों के मुताबिक साल 2018 में पता चला था कि शारदा सिन्हा को मल्टीपल मायलोमा नामक ब्लड कैंसर है। कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मल्टीपल मायलोमा, जिसे काहलर रोग के नाम से भी जाना जाता है, ये एक दुर्लभ रक्त कैंसर है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।




आखिर ये कैंसर क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और किस तरह से इससे बचाव किया जा सकता है, आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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ब्लड कैंसर की समस्या - फोटो : Freepik.com
मल्टीपल मायलोमा के बारे में जानिए

मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का कैंसर है जो प्लाज्मा सेल नामक सफेद रक्त कोशिका में बनता है। स्वस्थ प्लाज्मा सेल्स एंटीबॉडी बनाकर संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। मल्टीपल मायलोमा तब होता है जब स्वस्थ कोशिकाएं असामान्य कोशिकाओं में बदल जाती हैं। ये कोशिकाएं असामान्य एंटीबॉडी बनाने लगती हैं जिसे एम प्रोटीन्स कहा जाता है। मल्टीपल मायलोमा की स्थिति में आपमें लक्षण नजर आएं ये भी जरूरी नहीं है। हालांकि रक्त परीक्षण के आधार पर इस स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

मल्टीपल मायलोमा का इलाज नहीं किया जा सकता है, उपचार में सिर्फ कैंसर को बढ़ने से रोकने और लक्षणों को कम करने का प्रयास किया जाता है।
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एनीमिया की समस्या - फोटो : istock
कैसे जानें किसी को है ये बीमारी?

मल्टीपल मायलोमा एक दुर्लभ बीमारी है। हर साल एक लाख लोगों में से लगभग सात लोगों को ये समस्या होती है। मल्टीपल मायलोमा पुरुषों को अधिक प्रभावित करता है और 40 से 70 वर्ष की आयु वालों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है। समय पर इसके लक्षणों का पता चल जाने से उपचार की प्रक्रिया आसान होती है और रोगी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।

मल्टीपल मायलोमा के कारण शरीर में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं जिसपर ध्यान देते रहना जरूरी है।
  • हाथों और पैरों में कमजोरी और सुन्नपन की अनुभूति होना।
  • मल्टीपल मायलोमा रीढ़ की हड्डियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं और रीढ़ पर दबाव डालती हैं।
  • रोगी बहुत अधिक थकान महसूस कर सकता है। कुछ लोगों में एनीमिया की भी समस्या हो सकती है।
  • मतली और उल्टी होना, यह हाइपरकैल्सीमिया का संकेत हो सकता है।
  • भूख न लगना और या सामान्य से ज्यादा प्यास लगना
  • जीवाणु संक्रमण होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

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रक्त कोशिकाओं से संबंधित समस्या - फोटो : freepik.com
क्यों होती है ये बीमारी?

मायलोमा किस कारण से होता है, ये स्पष्ट नहीं है।

मल्टीपल मायलोमा अस्थि मज्जा में प्लाज्मा कोशिका से शुरू होता है। बहुत जल्दी मायलोमा कोशिकाएं बनना शुरू हो जाती हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को मल्टीपल मायलोमा की समस्या रही है उनमें इसका खतरा अधिक हो सकता है। मल्टीपल मायलोमा को रोकने का कोई तरीका नहीं है। अगर आपको मल्टीपल मायलोमा हो जाता है, इलाज के माध्यम से इसको बढ़ने और जटिलताओं को रोकने के लिए ही प्रयास किया जा सकता है।
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रक्त कैंसर से बचाव - फोटो : Freepik.com
क्या मल्टीपल मायलोमा से बचाव किया जा सकता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मल्टीपल मायलोमा को रोकने का कोई ज्ञात तरीका नहीं है। शोधकर्ता मायलोमा बनने से रोकने के तरीकों की जांच कर रहे हैं। मल्टीपल मायलोमा लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करता है। जिन लोगों में इसका निदान किया जाता है उन्हें नियमित जांच और परीक्षण की आवश्यकता होती है। दिनचर्या और आहार को ठीक रखकर लक्षणों को बिगड़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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