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Health Alert: जुलाई-अगस्त के महीनों में बढ़ सकता है श्वसन रोगों का खतरा, विशेषज्ञों ने बताई इसकी मुख्य वजह

Sun, 09 Jul 2023 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़ों-श्वसन रोगों का खतरा - फोटो : iStock
देशभर में मानसून सक्रिय स्थिति में है। राजधानी दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में तेज बारिश का दौर जारी है, जिसके कारण कई हिस्सों में भारी जलजमाव और बाढ़ की भी स्थिति बन रही है। बरसात का मौसम अपने साथ कई बीमारियां लेकर आता है, विशेषतौर पर जलजमाव के कारण मच्छर जनित रोगों का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

इस बीच एक अध्ययन में विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा है कि जिन इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति है या फिर इसका जोखिम हो सकता है, वहां विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बाढ़ के कारण कई प्रकार की श्वसन बीमारियों के बढ़ने का जोखिम हो सकता है।

बाढ़ के कारण किस प्रकार से श्वसन रोगों का जोखिम हो सकता है? इस बारे में वैज्ञानिकों की टीम ने स्पष्ट रूप से समझाया है। हार्वर्ड हेल्थ के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बाढ़ की स्थिति से सिर्फ डेंगू-मलेरिया और दूषित जल जनित पेट के रोगों का ही खतरा नहीं होता है, यह अस्थमा और एलर्जी जैसी श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। सभी लोगों को इस बारे में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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बाढ़ के कारण होने वाली बीमारियां - फोटो : Twitter
बाढ़ वाले इलाकों में श्वसन रोगों का जोखिम 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि बाढ़ के साथ जहरीले रसायन, मेटल्स, कीटनाशक, बायोटॉक्सिन और जल-जनित रोगजनक घरों में आ जाते है। बाढ़ के कम हो जाने के बाद भी सूखे हिस्सों में ये जहरीले तत्व रह सकते हैं। जैसे-जैसे स्थान सूखता है, ये हानिकारक तत्व  चलने और सफाई जैसी रोजमर्रा की गतिविधियों के माध्यम से धूल में बदल जाते हैं और हवा में मिल सकते हैं।

इस तरह की दूषित हवा में सांस लेने से ये पदार्थ फेफड़ों में पहुंचकर गंभीर श्वसन रोगों का खतरा बढ़ा देते हैं।
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फंगल संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock
फंफूद के कारण बढ़ जाता है खतरा

दूसरा खतरा बाढ़ के बाद उत्पन्न होने वाले फफूंद के कारण है।  नम या सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों पर फंफूद बनती और फैलती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इनडोर फफूंद के संपर्क में आने से अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस और साइनोसाइटिस जैसी श्वसन संबंधी जटिलताएं हो सकती हैं, इससे इनके ट्रिगर होने का भी खतरा रहता है।

इस प्रकार, बाढ़ अपने साथ कई बीमारियां तो लेकर आता ही है, इसके चले जाने के बाद भी जोखिम बने रहते हैं।
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बाढ़ के मौसम में होने वाले संक्रमण से बचें - फोटो : Pixabay
बाढ़ क्षेत्र वाले लोग बरतें विशेष सावधानी

यूनाइटेड स्टेट्स के न्यू ऑरलियन्स में 2021 में तूफान इडा के बाद किए गए शोध में इस तरह के कारकों को लेकर चिंता जताई थी। इसके कारण स्थानीय लोगों में श्वसन स्वास्थ्य पर बहुत नकारात्मक प्रभाव देखा गया था।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन स्थानों में बाढ़ का जोखिम है वहां के लोगों को पहले से ही अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों ने बाढ़ के पानी के साथ लोगों को संपर्क को कम करने के लिए कुछ उपाय बताए हैं, जिनका पालन करके स्वास्थ्य जोखिमों को कम किया जा सकता है।
  • बाढ़ वाले क्षेत्रों (विशेषकर तूफान के बाद) या इमारतों में तब तक रहना कम करें जब तक वे सूख न जाएं और अच्छी तरह से साफ न हों।
  • बाढ़ के तुरंत बाद पानी के प्रवेश, नमी और फफूंदी जांच करें।
  • बाढ़ का पानी निकालें और शेष तलछट की भी सफाई करें। 
  • सभी खिड़कियां और दरवाजे खुले रखकर वेंटिलेशन दर बढ़ाएं।
  • बेसमेंट जैसे नम स्थानों में ह्यूमिडिफ़ायर का उपयोग करें।
  • जिन लोगों को पहले से ही सांस की समस्या है उन्हें ऐसे मौसम में और भी अलर्ट हो जाने की आवश्यकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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