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Coronavirus Drug: कोरोना मरीजों की जान बचाने वाली पहली दवा, सस्ती भी है और आसानी से उपलब्ध भी

Wed, 17 Jun 2020 12:45 AM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
सस्ती और हर जगह मिलने वाली दवा डेक्सामेथासोन कोरोना वायरस से संक्रमित गंभीर रूप से बीमार मरीजों की जान बचाने में मदद कर सकती है। ब्रिटेन के विशेषज्ञों का कहना है कि कम मात्रा में इस दवा का उपयोग कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कामयाबी की तरह सामने आया है। जिन मरीजों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने की वजह से वेंटिलेटर का सहारा लेना पड़ रहा है, उनके मरने का जोखिम करीब एक तिहाई इस दवा की वजह से कम हो जाता है। जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, उनमें पांचवें हिस्से के बराबर मरने का जोखिम कम हो जाता है।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
डेक्सामेथासोन 1960 के दशक से गठिया और अस्थमा के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा है। कोरोना के जिन मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है, उनमें से आधे नहीं बच पा रहे हैं, इसलिए इस जोखिम को एक तिहाई तक कम कर देना वाकई में काफी बड़ी कामयाबी है।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगर इस दवा का इस्तेमाल ब्रिटेन में संक्रमण के शुरुआती दौर से ही किया जाता तो फिर करीब पांच हजार लोगों की जान बचाई जा सकती थी। चूंकि यह दवा सस्ती भी है, इसलिए गरीब देशों के लिए भी काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह दवा उस परीक्षण का भी हिस्सा है जो मौजूदा दवाइयों को लेकर यह जांचने के लिए किया जा रहा है कि कहीं ये दवाइयां कोरोना पर भी तो असरदार नहीं।

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
अधिक जोखिम वाले मरीजों के लिए मददगार
कोरोन के करीब 20 मरीजों में से 19 मरीज बिना अस्पताल में भर्ती हुए ठीक हो रहे हैं। जो मरीज अस्पताल में भर्ती भी हो रहे हैं, उनमें से भी ज्यादातर ठीक हो रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे मरीज हैं, जिन्हें ऑक्सीजन या फिर वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है। यह दवा ऐसे ही अधिक जोखिम वाले मरीजों को मदद पहुंचाती है।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
इस दवा का इस्तेमाल पहले से ही सूजन को कम करने में किया जाता रहा है और अब ऐसा लगता है कि यह कोरोना वायरस से लड़ने में शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली को मदद पहुँचाने वाली है। जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक सक्रियता के साथ प्रतिक्रिया करती है तब वैसे हालात को साइटोकिन स्टॉर्म कहा जाता है यह जानलेवा हो सकता है।
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक दल ने अस्पतालों में भर्ती 2000 मरीजों को यह दवा दी और उसके बाद इसका तुलनात्मक अध्ययन उन 4000 हजार मरीजों से की जिन्हें दवा नहीं दी गई थी। 
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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
वेंटिलेटर के सहारे जो मरीज जीवित थे उनमें इस दवा के असर से 40 फीसदी से लेकर 28 फीसदी तक मरने का जोखिम कम हो गया और जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत थी उनमें 25 फीसदी से 20 फीसदी तक मरने की संभावना कम हो गई।

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इस दल के मुख्य अध्ययनकर्ता प्रोफेसर पीटर हॉर्बी ने कहा, "यह एकमात्र ऐसी दवा है अब तक जिसके असर से मृत्यु दर में कमी देखी गई है और यह कमी इतनी है जो कि काफी अहम मात्रा में है। यह एक बड़ी कामयाबी है।"

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
एक अन्य शोधकर्ता प्रोफेसर मार्टिन लैंड्रे का कहना है कि इस दवा की मदद से आप वेंटिलेटर के सहारे जीवित हर आठ में से एक की जिंदगी बचा सकते हैं। और जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, उनमें से करीब हर 20-25 मरीजों पर आप एक मरीज बचा सकते हैं।

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दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
वो कहते हैं, "यह साफ तौर पर मदद पहुंचाने वाली दवा है। डेक्सामेथासोन के दस दिन के इलाज का खर्च एक मरीज पर करीब मात्र पाँच सौ रूपया पड़ता है। इसलिए करीब महज साढ़े तीन हजार रुपये में एक मरीज की जान बचाई जा सकती है और यह दवा हर जगह मिलती है।"

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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
हालांकि कोरोना के जिन मरीजों में हल्के लक्षण हैं, उनको यह दवा कोई मदद नहीं पहुंचा पाती है। इसलिए प्रोफेसर लैंड्रे कहते है कि जब जरूरत पड़े तो अस्पताल में भर्ती मरीजों को ही यह दवा देनी चाहिए और लोगों को यह दवा बाजार से खरीद कर अपने घरों पर रखने की जरूरत नहीं है।
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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
जिन दवाओं पर ट्रायल चल रहा है उनमें मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन भी एक थी लेकिन इसकी वजह से हृदय संबंधी समस्या बढ़ने और जान जाने का खतरा रहता है। एक दूसरी दवा रेमडेसीविर है, जो कोरोना संक्रमण से जल्दी ठीक होने में मदद पहुंचा रही है।
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