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Fatty Liver: सिर्फ अल्कोहल नहीं, आपके किचन में मौजूद ये चीजें भी बढ़ा देती हैं फैटी लीवर का जोखिम, जरूर जानें

Fri, 24 Oct 2025 04:37 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फैटी लीवर एक गंभीर समस्या है, जिसको लेकर लोगों के मन एक भ्रांती ये है कि ये सिर्फ अल्कोहल से होता है। बहुत कम लोगों को मालूम है कि ये बीमारी खराब खानपान और अनियमित दिनचर्या की वजह से भी होता है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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लिवर - फोटो : Freepik.com
Fatty Liver Causes: फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर की कोशिकाओं में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है। इसे हेपेटिक स्टीटोसिस भी कहा जाता है। आमतौर पर लोग इसे केवल अत्यधिक शराब के सेवन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि फैटी लीवर दो तरह का होता है।

अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज जो शराब के सेवन के कारण होता है, और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज, जिसका सीधा संबंध मोटापा, खराब जीवनशैली और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी मेटाबॉलिक समस्याओं से होता है। इस लेख में हम नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के बारे में जानेंगे।

अत्यधिक मीठा और कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ, जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, मिठाइयां, सफेद ब्रेड और पास्ता, फैटी लीवर के जोखिम को बढ़ाते हैं। इसके अलावा ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट से भरपूर तले-भुने खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड फूड्स भी लिवर के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए जो लोग शराब का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें भी अपने खान-पान के प्रति सचेत रहना चाहिए, आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जाते हैं।
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नो शुगर डाइट - फोटो : Freepik.com
अत्यधिक मीठे चीजों का सेवन
आपके रसोई घर में फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण अत्यधिक चीनी और फ्रुक्टोज है। जब आप कोल्ड ड्रिंक्स, डिब्बाबंद जूस, या पके हुए मीठे सामान (जैसे केक और पेस्ट्री) का सेवन करते हैं, तो आपके शरीर में फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है।

लिवर इस फ्रुक्टोज को सीधे ऊर्जा के रूप में उपयोग नहीं कर पाता, इसलिए इसे तेजी से फैट में परिवर्तित करना शुरू कर देता है। यही अतिरिक्त वसा लिवर की कोशिकाओं में जमा होकर फैटी लिवर रोग को जन्म देती है। 

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ब्रेड - फोटो : freepik.com
परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और फैट
फैटी लिवर के खतरे को बढ़ाने में परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और अनहेल्दी फैट की बड़ी भूमिका होती है। सफेद आटा (मैदा) और उससे बनी चीजें, जैसे कि बिस्किट, सफेद ब्रेड, और नाश्ते के लिए तैयार किए गए अनाज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है।

ये ब्लड शुगर के लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं, जिससे इंसुलिन प्रतिरोध उत्पन्न होता है, जो फैट को लिवर में जमा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। इसके साथ ही ट्रांस फैट और अधिक सैचुरेटेड फैट वाले जंक फूड्स लिवर में सूजन पैदा करते हैं और फैटी लिवर को बढ़ाते हैं।

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सेडेंटरी लाइफस्टाइल - फोटो : Freepik
निष्क्रिय जीवनशैली भी फैटी लीवर का बड़ा कारण है
खानपान के अलावा निष्क्रिय जीवनशैली भी फैटी लीवर के खतरे को बढ़ाता है। इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करना, कम से कम 30 मिनट प्रतिदिन मध्यम तीव्रता का व्यायाम करना अत्यंत आवश्यक है। शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है, जो फैटी लिवर का एक प्रमुख कारण है।

इसके अलावा व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करता है, जिससे शरीर शुगर को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर पाता है और लिवर में फैट जमा होने का खतरा कम हो जाता है। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को प्रबंधित करना भी लिवर के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। एक सक्रिय जीवनशैली फैटी लिवर के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।
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लिवर - फोटो : adobe stock images
बरतें ये जरूरी सावधानियां
अपने लिवर को स्वस्थ रखने के लिए, सबसे पहले चीनी का सेवन पूरी तरह से कम करना जरूरी है। सभी प्रकार के मीठे पेय, कैंडी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं। अपनी डाइट में साबुत अनाज (जैसे ब्राउन राइस, ओट्स), ताजे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियों को शामिल करें।

इनमें फाइबर होता है जो पाचन को धीमा करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखता है। इसके अतिरिक्त, हेल्दी फैट जैसे कि नट्स, सीड्स, एवोकाडो और जैतून का तेल का सेवन बढ़ाएं, क्योंकि ये लिवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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