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Health Tips: चीनी का अधिक सेवन आपकी किडनी-लिवर को भी कर सकता है खराब, इन आदतों में अभी से कर लें सुधार

Sat, 21 Feb 2026 12:05 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Sugar And Fatty Liver Disease Link: चीनी का अधिक सेवन हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बहुत से लोगों को लगता है कि चीनी के सेवन से सिर्फ डायबिटीज होता है, मगर सच यह है कि इससे किडनी-लिवर-हार्ट जैसे अंग भी प्रभावित होते हैं।
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किडनी - फोटो : Freepik.com
Risks Of High Sugar Intake: हममे से अधिकतर लोग मीठा खाना पसंद करते हैं। चाहे चाय हो, कोल्ड ड्रिंक हो या मिठाइयां हों, इन सभी चीजों में पर्याप्त मात्रा में रिफाइंड शुगर होता है। देखा जाए तो अधिक मीठा खाने को लेकर हमारे समाज दो धारणाएं हैं पहला तो ये कि कम उम्र के लोगों को अधिक मीठा खाने से कुछ नहीं होता है दूसरा ये कि अगर कोई अधिक मीठा खाता भी है तो उसे सिर्फ डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है। मगर ये धारणा पूरी तरह सच नहीं है। अगर कोई जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन करता है तो उसमें डायबिटीज के अलावा कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

हावर्ड मेडिकल स्कूल की एक स्टडी के मुताबिक अधिक मीठा खाने से हार्ट, किडनी और लिवर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण अंग भी प्रभावित होने लगते हैं। दरअसल, जब कोई बहुत अधिक रिफाइंड शुगर या फ्रुक्टोज का सेवन करता है, तो हमारा लिवर इसे फैट में बदलने लगता है, जिससे 'फैटी लिवर' की समस्या पैदा होती है।

वहीं चीनी के कारण होने वाला हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी की नाजुक रक्त वाहिकाओं को डैमेज कर सकता है, जिससे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। चीनी का असर धीमी गति से होता है, इसलिए अक्सर लोग तब तक सतर्क नहीं होते जब तक स्थिति गंभीर नहीं हो जाती है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपनी रोजमर्रा की बदलाव करना और चीनी की मात्रा पर नियंत्रण रखना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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लिवर - फोटो : Adobe Stock
लिवर पर चीनी का असर
इसी विषय पर हमने केजीएमयू से एमडी कर रहे डॉक्टर अभय वर्मा से बात की। उन्होंने बताया कि शरीर में शुगर (ग्लूकोज) को प्रबंधित करने वाला प्राथमिक अंग है। जब आप सोडा, मिठाइयां या प्रोसेस्ड जूस के जरिए भारी मात्रा में शुगर लेते हैं, तो लिवर इसे ग्लूकोज के बजाय फैट के रूप में स्टोर करने लगता है।

यह स्थिति 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज' (NAFLD) को जन्म देती है। समय रहते ध्यान न देने पर लिवर में सूजन बढ़ सकती है और यह लिवर सिरोसिस जैसी स्थिति तक पहुंच सकता है।

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किडनी - फोटो : Freepik.com
किडनी पर चीनी का प्रभाव
अधिक चीनी का सेवन खून में यूरिक एसिड के लेवल को बढ़ाता है, जो किडनी के लिए हानिकारक है। जब ब्लड शुगर लगातार हाई रहता है, तो किडनी की फिल्टर करने की क्षमता कमजोर होने लगती है, जिससे शरीर में विषाक्त पदार्थ जमा होने लगते हैं। इसके साथ ही शुगर के कारण होने वाला 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' किडनी की नसों पर दबाव डालता है, जो क्रॉनिक किडनी डिजीज के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।

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नो शुगर डाइट - फोटो : Freepik.com
इन आदतों में अभी से करें सुधार
डॉक्टर वर्मा ने बताया कि किडनी-लिवर को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले पैकेट बंद जूस, कोल्ड ड्रिंक्स और सफेद चीनी से दूरी बनाएं। प्राकृतिक मिठास के लिए फलों का सेवन करें, क्योंकि उनमें फाइबर होता है जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है।

चाय या कॉफी में चीनी की मात्रा धीरे-धीरे कम करें। लेबल पढ़ने की आदत डालें, अगर पैकेट पर 'हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप' जैसे नाम लिखा हो सेहत के लिए अधिक खतरनाक होते हैं, इसलिए इससे परहेज करें।
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दौड़ना - फोटो : Adobe Stock
सक्रिय जीवनशैली ही समाधान
चीनी छोड़ना शुरुआती दिनों में कठिन लग सकता है, लेकिन आपके शरीर के अंगों की लंबी उम्र के लिए यह बहुत जरूरी है। पर्याप्त पानी पिएं और नियमित व्यायाम करें, क्योंकि सक्रिय रहने से शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग कर पाता है। ध्यान रखें आज का परहेज कल के महंगे इलाज और अस्पतालों के चक्कर से बचने का एकमात्र रास्ता है।

स्रोत और संदर्भ
Sugar and Your Kidneys
Fatty liver disease

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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