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Health Tips: सेहत के लिए इन चीजों को आयुर्वेद में माना जाता है कारगर, पर अधिक सेवन बढ़ा सकती है आपकी दिक्कत

Fri, 12 Aug 2022 12:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आयुर्वेद की औषधियों के लाभ और नुकसान - फोटो : amarujala
आयुर्वेद दुनिया की प्राचीनतम चिकित्सा पद्धतियों में से एक है जिसका प्रयोग सेहत को बेहतर रखने से लेकर कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार तक में किया जाता रहा है। आयुर्वेद में कई ऐसी औषधियों का जिक्र मिलता है जो शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकती हैं। इतना ही नहीं अध्ययनों में कई औषधियों को गंभीर बीमारियों के इलाज तक के लिए काफी कारगर पाया गया है, पर क्या आप जानते हैं कि इन औषधियों से सेवन से लाभ तभी तक पाया जा सकता है, जब तक इनका सेवन संयमित मात्रा में किया जाता है। कुछ औषधियों और खाद्य पदार्थों की अधिकता को आयुर्वेद में स्वास्थ्य के लिए काफी गंभीर और नुकसानदायक बताया गया है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी औषधि का सेवन हमेशा स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और उनके द्वारा बताई गई मात्रा के आधार पर ही करना चाहिए, वरना इसके कई नुकसान हो सकते हैं। आयुर्वेदिक औषधियों के अलावा किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर भी यह नियम लागू होता है। आइए ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जानते हैं जिन्हें वैसे तो सेहतमंद शरीर के लिए आवश्यक माना जाता है पर इनका अधिक मात्रा में सेवन करना शरीर पर नकारात्मक प्रभाव डालकर कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकता है।
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सेब का सिरका कितना फायदेमंद? - फोटो : Pixabay
सेब का सिरका

सेब के सिरके को कई प्रकार से सेहत के लिए लाभकारी प्रभावों वाला माना जाता रहा है। इसका सेवन प्रतिरक्षा बढ़ाने, वजन कम करने, पाचन में सुधार और कोलेस्ट्रॉल- ब्लड शुगर के स्तर को कम करने के लिए किया जाता रहा है। लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन करना शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचा सकता है। आयुर्वेद के मुताबिक यह किण्वित और अम्लीय पेय है जिसकी अधिकता वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को प्रभावित कर सकती है। इसका नियमित रूप से अधिक सेवन करना त्वचा में जलन और पेट में अल्सर का कारण बन सकता है।
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आयुर्वेद के सेवन को लेकर सावधानी - फोटो : Pixels
पिप्पली को लेकर बरतें सावधानी

पिप्पली का आयुर्वेद में कई प्रकार के लाभ के लिए जिक्र मिलता है। इसका उपयोग व्यापक रूप से खाद्य पदार्थों के स्वाद को बढ़ाने और आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करने के लिए किया जाता है। इसमें ग्लाइकोसाइड्स, यूजेनॉल्स, एल्कलॉइड्स, टेरपेनोइड्स जैसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं जो कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। लेकिन इस जड़ी-बूटी का अत्यधिक सेवन वात, पित्त, कफ को असंतुलित कर सकता है। यह अपच, पेट दर्द, खुजली, लालिमा और त्वचा की सूजन का कारण बनता है। 

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नमक का अधिक सेवन नुकसानदायक - फोटो : iStock
नमक की संतुलित मात्रा जरूरी

नमक, भोजन के स्वाद को बढ़ाने के लिए आवश्यक है। नमक में आयोडीन होता है, जो एक ट्रेस खनिज है और घेंघा नामक बीमारी को रोकने के लिए आवश्यक है। लेकिन ध्यान रहे नमक में सोडियम भी होता है जिसका अधिक मात्रा में सेवन करने पर आपके स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, नमक के अधिक सेवन से ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा रहता है जिसे हृदय रोगों को बढ़ाने वाला कारक माना जाता है। 
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गिलोय का संयमित सेवन नुकसानदायक - फोटो : istock
गिलोय की मात्रा को लेकर रखें ध्यान

शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए गिलोय के सेवन को बहुत लाभकारी माना जाता है। गिलोय में मौजूद औषधीय गुण से शरीर को लाभ मिल सकता है। पर कहीं आप भी तो अधिक लाभ के चक्कर में इस औषधि का बहुत अधिक सेवन तो नहीं कर रहे हैं? आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि गिलोय का अधिक सेवन कब्ज़ के साथ लो ब्लड शुगर का कारण बन सकता है। इसकी अधिकता गर्भवती महिलाओं के लिए भी हानिकारक हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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